नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारे इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम Diwali क्या है और Diwali क्यो मनाया जाता है के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम जानने भी वाले हैं।

आपको मालूम ही होगा कि भारत में आए दिन कई सारे पर्व त्यौहार आते रहते हैं और जाते रहते हैं उसी पावन पर्व त्यौहार में से एक तेव्हार दीपावली भी है इसे भारत के कई सारे धर्म के लोगों द्वारा बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।

मगर दोस्तों क्या आपको मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर दीपावली क्या है और दीपावली को क्यों मनाया जाता है और दीपावली के पीछे इतिहास कह रहा है और दीपावली के लाभ क्या क्या है तो हम आपके इन्हीं सभी सवालों का जवाब देने के लिए इस लेख को स्टेप बाइ स्टेप लिख कर के आपको दीपावली से जुड़ी सभी जानकारी को बताने की कोसिसि की है।

तो दोस्तों अगर आप सच में दीपावली से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से मेरा यह अनुरोध है कि आप मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढे तभी आपको मेरा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए और जानते हैं दीपावली के बारे में

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दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल है कि दीपावली क्या होता है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक पर आपको बताएंगे कि दीपावली क्या होता है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आ पकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपावली एक त्यौहार है जिसे हिंदू , सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग काफी ही धूमधाम से मनाते हैं।

गाइस हर एक धर्म के पीछे उसका एक खास इतिहास होता है उसी तरह से इस धर्म के पीछे भी एक खास इतिहास है ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिस दिन राम जी वनवास से लौटे थे उसी दिन सभी लोगों ने दिया जला करके उनका हार्दिक स्वागत किया था इसीलिए दीपावली मनाया जाता है।

यह बड़े आराम से कह सकते हैं कि यह पर्व हिंदू समुदाय के लोगों का है मगर हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसे पूरा भारत बड़े ही धूमधाम से मनाता है और खूब मजे करता है इस दिन लोग पटाखे जलाते हैं और इस दिन का आनंद लेते हैं छोटे-बड़े बुड्ढे लोग अपने खुशी को अपनी तरफ से व्यक्त करते हैं और अपने बड़े से छोटे का आदर करते हैं और अपने में मिठाई भी बांटते हैं।

दोस्तों कई सारे लोग तो इस दिन लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा भी करते हैं इसके पीछे भी कुछ खास वजह है जिसके कारण लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है हम आपको नीचे के टॉपिक में इन सभी चीजों को विस्तार से बताएंगे दीपावली के दिन लोग अपने घर द्वार सभी को साफ करते हैं और चारों तरफ दिए और मोमबत्तियां को जलाकर के अंधेरा को दूर भगाते हैं और लगभग सभी जगह को प्रकाश के उजली किरणों से भर देते हैं।

दीपावली के दिन सभी लोग लगभग सभी भगवान की पूजा करते हैं और उनके मंदिरों में जाकर के दिए भी जलाते हैं और दिल से दुआ करते हैं कि वो हमें खुश रखें और हमारे आने वाले भविष्य में भी हमें दुख से बचाए रखें अगर हम इसे सरल शब्दों में समझें तो यह हिंदू हिंदू , सिख, जैन और बौद्ध धर्म  के लोगों का पर्व है जिसे लोग धूमधाम से मनाते हैं अब तो लगभग हर धर्म के लोग भी इस त्यौहार को काफी मजे और आनंद के साथ मना रहे हैं और चारों तरफ एकता का प्रतीक दे रहे हैं।

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दीपावली क्यो मनाया जाता है ?

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दोस्तों इस टॉपिक में हम जानने वाले हैं कि आखिर दीपावली क्यों मनाई जाती है तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि यह पर्व  हर शाल कार्तिक महीना के अमावस्या के दिन आने वाला हिंदू , बौद्ध ,सिख, जैन धर्म के लोगों का पर्व है और हर धर्म हर समुदाय के लोग इस दिन के साथ खास महत्व कुछ खास वजह जुड़ा हुआ है साथ में ही दीपावली को मनाने के पीछे कई सारी पौराणिक और पारंपरिक कथाएं भी हैं।

माता लक्ष्मी जी का जन्मदिन- दोस्तों क्या आपको मालूम है कि इस दिन माता लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था और उन का विवाह भी भगवान श्री विष्णु जी से इसी दीपावली के दिन हुआ था। हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि ऐसा कहाँ जाता है कि हर साल इन दोनों की शादी का जश्न लगभग हर कोई अपने घरों को रोशन कर के मनाता है और इनकी पूजा भी करता है।

लक्ष्मी मां को रिहा करवाया था हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि भगवान श्री विष्णु जी के पांचवें अवतार जिनको लोग कार्तिक के नाम से जानते है उन्होंने अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी जी को राजा बाली की जेल से उनको बचाया था उनको छुड़वाया था और इसके चलते ही इस दिन  माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

दोस्तो क्या आपको मालूम है कि जैन धर्म के लोगों के लिए यह विशेष दिन इसलिए होता है कि जैन धर्म में आधुनिक और पूजनीय जैन धर्म के संस्थापक और बड़े ही अच्छे इंसान थर जिन्होने दीपावली के दिन पर ही अपना  निर्वाण प्राप्त किया था और अपने धर्म के लगभग सभी लोगो के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण बनाया था।

सिक्ख समुदाय के लिए विशेष दिन इसलिए होता है कि इस पावन दिन को सिक्ख समुदाय के गुरु अमर दास ने red letter day के रूप में सभी के बीच संस्थागत किया था, जिस के बाद से लगभग  सभी सिख्क, अपने गुरु अमर दास जी का आशीर्वाद इस दिन प्राप्त करते हैं।  शाल 1577 में दीपावली के दिन ही अमृतसर नामक किसी जगह के स्वर्ण मंदिर की आधारशिला भी रखी गई थी।

दोस्तों आप ने महाभारत का नाम जरूर ही सुना होगा कि पांडवों का पूरा वनवास हुआ इस के पीछे एक कथा है कि महाभारत के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन ही पांडवों का पूरा वनवास  हुआ था और इनका लगभग 12 साल का वनवास बहु पूरा होने की खुशी में इन से प्रेम करने वाले लोगों ने अपने घरों में दीये जलाए थे और घरों को रौशन किया था।

क्या आपको मालूम है कि बहुत पहके विक्रमादित्य का राज तिलक हुआ था जो कि हमारे देश भारत के महाराजा विक्रमादित्य थे जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य पर  अपना राज किया था, उनका राज तिलक और उनका सम्मान भी इसी पावन दिन को किया गया था।

दोस्तों क्या आपको मालूम है कि दिवाली मनाने का एक वजह यह भी माना जाता है कि कृष्ण जी ने नरकासुर का अंत कर दिया था। देवकी नंदन श्री  कृष्ण कन्हैया ने नरकासूर अशूर को दीपावली के पावन दिन को ही मारा था जिस से एक दिन पहले यह कारनामा को किया था। जिसके बाद इस त्योहार को नरकासूर के वध के साथ बड़े ही धूमधाम से मनाया गया था।

दोस्तों जैसे कि हमने आपको ऊपर के टॉपिक में भी बताया था कि भगवान श्री राम और उनके भाई और माता सीता के 14 वर्ष के वनवास को पूरा कर के अपने नगरी अयोध्या लौटने पर उनके स्वागत के लिए उनके प्रिय प्रजा ने घी के दिए अपने घर में जलाए और तरह तरह का पकवान बना कर के उनका स्वागत भी किया और इस दिन का दीपावली के नाम दिया। लगभग उसी वक्त से सभी लोग इसे आज तक उसी पुरानी रीति रिवाजों के साथ मनाते आ रहे है।

फसलों का  त्योहार खरीफ फसल के समय ही ये पर्व आता है और कई सारे किसानों के लिए ये त्योहार समृद्धी और उनके खुशियों की आने का संकेत होता है और इस त्योहार को किसान उत्साह के साथ मजे ले कर के मनाते हैं।

हिंदू नव वर्ष का दिन दीपावली के साथ ही हिंदू व्यवसायी का नया साल की भी शुरूआत हो जाता है और व्यवसायी इस दिन अपने खातों की नई किताबें शुरू करते हैं, और नए साल को शुरू करने के पहले अपने सभी लोनों का भुगतान करते हैं। तो चलिए दोस्तों अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और दीपावली से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं

दीपावली मनाने के पिछे का इतिहास और पौराणिक कथा

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दोस्तों अगर आप दीपावली मनाने की इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत  तक बने रहे क्योंकि हम आपको इस टॉपिक में बताएंगे कि दीपावली का इतिहास कह रहा है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किये हुए। हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपावली लगभग ढेर सारे धर्म द्वारा मनाया जाता है मगर इनमें सभी धर्म के अलग-अलग ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं तो इसमें हम सबसे प्रसिद्ध कथाएं के बारे में बात करने वाले हैं।

दोस्तों दीपावली का ऐतिहासिक और पौराणिक कथा यह भी है कि कई वर्षों पहले अयोध्या में राजा दशरथ नाम का राजा रहते थे और उन्होंने तीन विवाह किया था जिन में से पहले पत्नी का नाम कौशल्या और दूसरी पत्नी का नाम केकई और तीसरी पत्नी का नाम सुमित्रा था और यह तीनों पत्नियों के चार पुत्र थे जिनमें से पहले पत्नी से  कौशल्या के एक पुत्र थे जिनका नाम श्री राम था और दूसरी पत्नी केकई के भी एक पुत्र थे जिनका नाम भरत था और तीसरी पत्नी सुमित्रा के दो पुत्र थे जिनका नाम लक्ष्मण और शत्रुघ्न था।

यह चारों राजकुमार बड़े ही नेक दिल के थे और यह हमेशा सच्चाई की राह पर चलते थे। और इन चारों राजकुमार में साहस और शक्ति कूट-कूट कर भरी थी। दोस्तों कुछ दिन बाद इन चारों राजकुमार की शादी हो जाती है और चारों राजकुमार में से सबसे बड़े थे राम और इनके शादी के कुछ समय बीतते ही राजा दशरथ बीमार हो जाते हैं ।

और वह अपने राज सिंहासन पर अपने बेटे राम को बैठाने के बारे में सोचते हैं मगर उनकी मझली पत्नी जिसका नाम के कई था। उन्होंने अपने दासी मंथरा के बहकावे में आकर के राजा से अपने पुराने दो वचन मांगने की बात की और फिर राजा दशरथ ने बोला कि आप जो वचन मांगे कि मैं उन्हें आपको दे दूंगा।

तभी माता केकई मंत्रा के बहकावे में आकर के वह राजा दशरथ से पहले वचन में मांगती है कि राम और सीता को लगभग 14 वर्ष का वनवास कर दिया जाए और उनके पुत्र भरत को राजा बना दिया जाए।इस बात को सुनते ही राजा दशरथ का हिर्दय बिल्कुल पानी पानी हो जाता है और वह अंदर से पूरी तरह से टूट जाते हैं।  राजा दशरथ को ना चाहते हुए भी भरत को राजा बनाना पड़ता है और राम और सीता को वनवास भेजना पड़ता है।

इस वचन के बारे में प्रजा जान जाती है और प्रजा भी इस वचन से निराश होती है और दोनों पत्नियां भी इस वचन से निराश होती है मगर राम अपने पिता के वचन का पालन करने के लिए बड़े ही आदर और स्वभाव से बिना कुछ बोले 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल जाते हैं जब वह निकल रहे होते हैं तब लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की बात करते हैं ना चाहते हुए भी राम जी को लक्ष्मण जी को साथ ले जाना पड़ा। फिर राम जी और उनकी पत्नी सीता जी और उनका भी लक्ष्मण जी वनवास के लिए चले जाते है।

जब वन में राम और सीता और लक्ष्मण जी के कुछ दिन में बीतते हैं तो एक रावण जोकि बहुत अहंकारी राजा हुआ करता था वह सीता जी की खूबसूरती को देखकर के उन को हरण करने का मन बना लेता है और और एक हिरण का झांसा देकर के राम और लक्ष्मण जी को भगा देता है और जब राम और लक्ष्मण जी उसे हिरण के पीछे जाते हैं तो अब वह दुराचारी राजा रावण, माता सीता जी का हरण कर लेता है। और उनको लंका में ले जा कर छोड़ देता है।

राम और लक्ष्मण जब जानते हैं कि माता सीता का हरण हो गया तब वह माता सीता को खोजने के लिए वन में निकल जाते हैं और बहुत दिनों के बाद मालूम चलता है कि माता सीता को हरण करके रावण ने उनको लंका में रखा है राम और रावण के बीच युद्ध होता है। और उस भीषण युद्ध में राम जी के हाथों से रावण मारा जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत हो जाती है।

वह जब 14 वर्ष के लंबे वनवास में रावण का वध कर देते हैं और वध करने के बाद जब उनका 14 वर्ष का वनवास पूरा हो जाता है तब वह अपने नगर अपने मातृभूमि अयोध्या के लिए लौटते हैं और जब वह अपनी पहली कदम अयोध्या में रखते हैं। अयोध्या नगरी की सभी प्रजा बहुत ही खुश होती है और उनका स्वागत करने के लिए अपने घर और महल में घी के दीए जलाकर के उनका स्वागत करती है।

दोस्तों मेरे हिसाब से यह प्रसिद्ध कथा हिंदू धर्म के लोगों के लिए ही है क्योंकि जो लोग अलग-अलग धर्म के होते हैं और दिवाली को मनाते हैं उनके इतिहास भी अलग-अलग होते हैं जो कि उनके धर्म से जुड़े होते हैं और उनकी पूर्वजों की तरह उनका ऐतिहास भी अलग अलग है।

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दीपावली कैसे मनाया जाता है ?

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दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं कि दीपावली किस तरह से मनाया जाता है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहिए क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि दीपावली किस तरह से मनाया जाता है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपावली मनाने के तौर-तरीके भी काफी अलग-अलग है जैसे कि हमारे देश भारत में अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं उसी तरह से इसकी इतिहासिक कथाएं भी अलग अलग है और इनके मनाने का ढंग भी अलग-अलग है तो चलिए हम जानते हैं बनाने के कुछ प्रसिद्ध तौर तरीके के बारे में।

दोस्तों कई सारे लोग दीपावली त्यौहार आने से कुछ दिन पहले ही अपने घर की सफाई संपूर्ण तरह से कर लेते हैं और अपने घर के पुरानी चीज और कूड़े कचरे को घर से साफ कर देते हैं और घर बिल्कुल चमकने लगता है दोस्तों इसके बाद वह अपने घर में तरह तरह के पकवान बनाते हैं और जिन लोगों का दुकान है वह लोग अपने दुकान का पूजा करवाते हैं और उसमें लक्ष्मी जी का या अपने धर्म के अनुसार अपने भगवान की पूजा करते है। और अपने भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वह हमेशा उन्हें खुश रखें और उनके सभी विघ्न और बाधाएं को उन तक न पहुचने दे।

और दीपावली के शाम में लोग एक साथ मिल जुल कर के दिए जलाते हैं और अपने दिए के प्रकाश से अंधेरे को दूर भगाते हैं। और कई सारे लोग तो बड़े-बड़े पटाखा भी जलाते हैं और अपनी खुशी को एक दूसरे के साथ व्यक्त करते हैं और काफी हर्ष और उल्लास और धूमधाम के साथ ही इस दीपावली त्योहार को मनाते हैं।

तो दोस्तों अगर आप दीपावली को मनाना चाहते हैं तो हमारे इस तरीके का भी उपयोग करके दीपावली को अच्छी तरह से मना सकते हैं और खुशियां एक साथ बाट सकते हैं क्या आपको मालूम है कि कई सारे लोग इस दीपावली के पावन अवसर पर अपने आस-पड़ोस में मिठाई भी बाटते हैं और एक दूसरे को गिफ्ट भी देते हैं।

दीपावली मनाने के लाभ

दोस्तों यह टॉपिक आपको थोड़ा बहुत अजीब जरूर लगा होगा कि आखिर दीपावली मनाने के लाभ क्या क्या हो सकते हैं तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपावली के कई सारे अनेक लाभ होते हैं जैसे कि अगर कोई बंदा दीपावली की तैयारी करता है और अपने घर द्वार और दुकान की सफाई करता है ।

तो इससे बड़ा फायदा क्या हो सकता है कि वह घर खुद से साफ कर रहा है और घर की सारी गंदगी को घर से बाहर निकाल रहा है फिर जब दीपावली में लोग दीपावली को मना रहे होते हैं तो उनके बीच आपसी संबंध भी बढ़ते हैं और लोग एक दूसरे से प्रेम करते हैं और एक दूसरे के बीच प्रेम की भावना उत्पन्न होती है इससे लोग के एक साथ एकजुट हो कर रहने की क्षमता मिलती है और लोग आपस में लड़ते झगड़ते नहीं है।

दोस्तों दीपावली मनाने का एक बड़ा फायदा यह भी होता है कि इस दिन बहुत सारे बाजार में सामान की खरीददारी भी होती है जिसकी वजह से हमारे देश के जीडीपी में भी काफी उछाल आता है और यह देश के लिए काफी लाभदायक साबित होता है। घर मोहल्लों की सफाई वातावरण की शुद्धि, आपसी सद्भाव की भावना का विकास तथा नए कार्य एवं नई योजनाओं को प्रारंभ करने की प्रेरणा के साथ साथ दीपावली हमें अंधेरे से, अज्ञानता से, असत्यता से लड़ने का भी संदेश देती है।

[ Conclusion, निष्कर्ष ]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख Diwali क्या है और Diwali क्यो मनाया जाता है आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख की मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से जान चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको दीपावली से जुड़ी सभी जानकारी को देने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर दीपावली क्या है और दीपावली को क्यों मनाया जाता है और दीपावली के पीछे इतिहास क्या रहा है और दीपावली के लाभ क्या क्या है।

इन सभी जानकारी को देने के लिए हमने इस लेख को लिखा था और आप पर मेरा संपूर्ण विश्वास है कि आप सभी मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और दीपावली से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट Diwali क्या है और Diwali क्यो मनाया जाता है के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा  ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे। तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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