नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारा इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम Durga Puja क्या है और Durga Puja क्यो मनाया जाता है के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम जानने भी वाले हैं।

दोस्तो आपको मालूम ही होगा कि भारत में आए दिन नए-नए पर्व त्यौहार आते रहते हैं और उसे विभिन्न विभिन्न धर्म के लोग काफी धूमधाम से मनाते रहते हैं उसी को त्योहार में से एक है दुर्गा पूजा का त्यौहार जिसे कि हिंदू समुदाय के द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। मगर दोस्तों कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर दुर्गा पूजा क्या है ।

और दुर्गा पूजा को क्यों मनाया जाता है और दुर्गा पूजा के पीछे क्या किया ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं और दुर्गा पूजा मनाने की विधि क्या है तो हम सभी ने मिलकर के इन सभी लोगों का इस सवाल का जवाब देने के लिए इस लेख को लिखा है और आपको बताने की कोशिश की है कि दुर्गा पूजा क्या है और पूजा क्यों मनाया जाता है ।

इन सभी के बारे में हमने स्टेप बाइ स्टेप पूरे विस्तार से बता रखा है और अगर आप सच में दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो कृपया करके आप हमारे इस लेख को ध्यान से पूरा अंत तक पानी कभी आपको हमारा अच्छे से समझ में आएगा चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।

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Durga Puja क्या है ?

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दोस्तों अगर आप यह सोच रहे हैं कि आखिर दुर्गा पूजा क्या होता है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक  बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में दुर्गा पूजा क्या है के बारे में विचार विमर्श किया है और हम आपको बताएंगे कि आखिर दुर्गा पूजा क्या होता है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुर्गा पूजा एक त्यौहार है जिसे हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है लगभग यह पूरे भारत में मनाया जाता है।

दोस्तों वैसे तो आपको मालूम ही होगा कि हिंदू धर्म में कई सारे अनेक देवी-देवताओं और भगवान की पूजा अर्चन की जाती है और वो भी अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से सभी देवी देवताओं की पूजा की जाती है और उसे उत्सव के रूप मे बड़े ही धूम धाम से मनाये जाते हैं।

उत्तर भारत में जहां सावन व फाल्गुन के महीने में महाशिवरात्रि और शिवरात्रि  का त्योहार कई दिनों तक चलता रहता है तो भाद्रपद के महीने में महाराष्ट्र के सभी जिले में गणेशोत्सव त्योहार की धूम मची होती है। 

राजस्थान , गुजरात, और लगभग पूरे उत्तरी भारत ( North India )में जहां चैत्र एवं आश्विन के महीने में में नवरात्रि पूजा का भीषण  आयोजन किया जाता है तो वहीं बंगाल के क्षेत्र में आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी से ले कर में दशमी तक दुर्गा पूजा का उत्सव बड़े ही धूम धाम से चलता है।

जिस प्रकार गणेश भगवान की प्रतिमा की स्थापना कर लगभग दस दिनों के पश्चात गणेश भगवान की मूर्ति की विसर्जन किया जाता है ठीक इसी प्रकार माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन भी उनके स्थापित करने के कुछ दिन बाद किया जाता है। दोस्तों वैसे दुर्गा पूजा का यह उत्सव प्रसिद्ध तो , त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में है लेकिन वर्तमान में यह त्योहार लगभग पूरे देश में ही इस उत्सव को बड़े धूमधाम धाम से मनाया जाता है।

पंडित जी की माने तो यह दुर्गा पूजा के त्योहार में बंगाल में हिंदूओं का खास व काफी बड़े स्तर पर और बहुत धूम धाम से मनाया जाने वाला त्योहार है। दुर्गा पूजा की तैयारियां उसके आने से महीने भर पहले से ही शुरु होने लगती हैं और लोग इस पर्व के तैयारी में लग जाते है । इस पावन त्योहार में पंडाल लगा कर उन्हें काफी बेहतर ढंग से सजाया जाता है इसमें मां दुर्गा की मूर्ति भी रखी जाती हैं।

यह सब करने के  बाद पश्चात अलग-अलग पंडालों का आकलन काफी अच्छे ढंग से किया जाता है व सबसे रचनात्मक, सबसे बेहतर, और काफी आकर्षक सजावटी पंडाल को पुरुस्कृत भी किया जाता है। इस अवसर पर कई सारे लोग विभिन्न विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते है, विभिन्न विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और समेलन और प्रोग्राम को आयोजित होती हैं।

इस अवसर पर लगभग हिंदू समुदाय के समस्त महिला और पुरुष अपने पारंप रिक परिधान को पहनते हैं। और ऐतिहासिक मान्यता है कि राजा-महाराजाओं के समय तो यह पूजा और भी बड़े स्तर पर आयोजित की जाती थी और आज भी ऐसा ही किया  जाता है।

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दुर्गा पूजा का इतिहास ( History of durga puja in hindi)

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दोस्तों अगर आप दुर्गा पूजा के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे टॉपिक के साथ बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में दुर्गा पूजा के इतिहास से जुड़ी कुछ बातों पर विचार विमर्श करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि दुर्गा पूजा का इतिहास कई  हजारों साल पुराना ऐतिहासिक और पौराणिक है और उतना ही प्रचलित भी  है।

यह हिन्दू धर्म के लोगो का भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक दुर्गा पूजा यानी की इसे नवरात्रि का इतिहास कई सारे कड़ियों में काफी पुराणिक तरह से बंटा हुआ है, जिसे हम इन पैराग्राफों के जरिए समझने की कोसिसि करेंगे।

पहला:- दोस्तों ऐतिहास के हिसब से ऐसा माना जाता है कि एक असुर था जिसका नाम राजा महिषासुर था और वह उस समय एक राजा रहता था और राज करता था । उसके पास अलग अलग तरह की शक्तिया भी थी और वो बहुत शक्तिशाली भी था, महिषासुर इतना शक्तिशाली था कि स्वर्ग के सभी देवी देवता और भगवान इस राक्षस को हराने मे असमर्थ दिख रहे थे इसके आगे कमजोर पड़ रहे थे। 

देखते-देखते असुर राजा महिषासुर बहुत आक्रामक हो गया था उसके पास उसकी शक्तियों का घमंड हो गया था। तभी ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान ने एक साथ महिषासुर के विनाश के लिए एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया उसे बनाया और उस शक्ति का नाम देवी दुर्गा रखा था ।

ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान के द्वारा उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण करके आंतरिक शक्ति दी गई, फिर मां दुर्गा ने तकरीबन 9 दिनों तक महिषासुर से भीषण युद्ध किया और युद्ध के अंतिम दिन यानी कि दसवीं दिन महिषासुर राक्षस का वध करके विजयी हुई थी और उस दिन महिषासुर मारा गया। उसी दिन को विजयदशमी दशहरा भी कहा जाता है और विजयदशमी दशहरा इस के रूप में भी इसे  मनाया जाता है।

दूसरा :- दोस्तों मां दुर्गा के इतिहास के पीछे लगभग दो ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं जिनमें से हमने आपको ऊपर में पहला बता दिया है और रहा बात दूसरा की तो दूसरा रामायण के ऊपर आधारित है रामायण के अनुसार राम जी ने रावण को मारने के लिए युद्ध से पहले मां दुर्गा की शक्ति प्राप्त करने के लिए उन्होंने मां चंडी की पूजा अर्चन की थी।

फिर भगवान राम ने दुर्गा पूजा के दसवे दिन रावण का  वध किया था और रावण इसी दिन मारा गया था। उस दिन को हम सब विजय दशमी के रुप मे मनाते कुछ इस तरह से भी मनाते हैं। हम इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी मनाते हैं।

दुर्गा पूजा के लास्ट दिन रावण के बड़े पुतले को बना करके राम जी के द्वारा मार दिया जाता है और उस पुतला में आग लग जाता है तो दोस्तों कुछ इस तरह से दुर्गा पूजा मनाया जाता है इसके पीछे का यही सब पौराणिक कथा है।

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दुर्गा पूजा की विधि

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दोस्तों अगर आप दुर्गा पूजा के मनाने के विधि के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि दुर्गा पूजा के विधि क्या-क्या है।

तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुर्गा पूजा त्योहार को लोग निष्ठा और श्रद्धा और भावना  से मनाते हैं  यह तकरीबन 10 दिनों तक चलने वाले यह त्योहार को हर दिन लोग माँ दुर्गा की पूजा के अर्चन को कुछ खास तरह के नियम के साथ करते है तो आइए जानते हैं पूजा की खास विधि के बारे में

क्या आपको पता है कि दुर्गा पूजा का यह पर्व आश्विन के शुक्ल पक्ष से ले कर के दशमी तारिक तक मनाते हैं इस दौरान माँ दुर्गा की 9 दिनों तक उपवास रखकर लोग इनका पूजा करते हैं हालांकि लोग अपने अनुसार इस पर्व में कई दिनो तक भी उपवास रखकर पूजा माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। श्रद्धालु और भक्त इस पर्व के दसवीं के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा को बेहतर तरह से सुहागन की तरह सजाती है।

नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के सामने कुमारी की भी पूजा करते है लोग कुमारी पूजन को बहुत पावन और पवित्र मानते हैं हालांकि आमतौर पर भारत का एक राज्य बंगाल है जहां पर यह त्योहार दुर्गा पूजा को विभिन्न विभिन्न रूपों से बड़े ही धूम धाम से जाती है।

विजयदशमी और दशेरा के त्योहार के दिन लोग अपनी पसंद की वस्तुएं को माँ के चरणों मे अर्पित करती है। उस दिन पूरी रात पूजा,की पंडित जी के द्वरा अखंड पाठ और जाप किया जाता हैं फिर देवी की प्रतिमाओं को सिंगारित यानी कि सजा कर के काफी हर्षोल्लास के साथ माँ दुर्गा की झांकी निकालते हैं और  पूरी धूम धाम के साथ पूरे समाज के चक्कर लगाने के बाद अंत में प्रतिमा को स्वस्थ नदी अथवा तालाब में बड़े ही धूख के विसर्जित करते हैं।

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दोस्तों मां दुर्गा पूजा के पीछे बहुत सारे पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां है तो हम इस टॉपिक में उन्हीं सभी के बारे में जानने वाले हैं

कहानी 1. तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा माना जाता है कि एक असुर था जिसका नाम राजा महिषासुर था और वह उस समय एक राजा रहता था और राज करता था । उसके पास अलग अलग तरह की शक्तिया भी थी और वो बहुत शक्तिशाली भी था, महिषासुर इतना शक्तिशाली था कि स्वर्ग के सभी देवी देवता और भगवान इस राक्षस को हराने मे असमर्थ दिख रहे थे इसके आगे कमजोर पड़ रहे थे।

देखते-देखते असुर राजा महिषासुर बहुत आक्रामक हो गया था उसके पास उसकी शक्तियों का घमंड हो गया था। तभी ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान ने एक साथ महिषासुर के विनाश के लिए एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया उसे बनाया और उस शक्ति का नाम देवी दुर्गा रखा था ।

ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान के द्वारा उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण करके आंतरिक शक्ति दी गई, फिर मां दुर्गा ने तकरीबन 9 दिनों तक महिषासुर से भीषण युद्ध किया और युद्ध के अंतिम दिन यानी कि दसवीं दिन महिषासुर राक्षस का वध करके विजयी हुई थी और उस दिन महिषासुर मारा गया। उसी दिन को विजयदशमी दशहरा भी कहा जाता है और विजयदशमी दशहरा इस के रूप में भी इसे  मनाया जाता है।

कहानी 2. दुर्गा पूजा की एक और किंवदंती और पौराणिक कथा यह भी है कि, रामायण के अनुसार, भगवान राम जी ने लंका के राजा रावण को मारने के लिए देवी माँ दुर्गा जी से आशीर्वाद पाने के लिए उन्हीने माँ चंडी पूजा अर्चन की थी।

इस त्योहार दुर्गा पूजा के दसवें दिन भगवान राम जी ने रावण का वध कर किया था, तभी से उस दिन को विजया दशमी भी कहा जाता है। यह बात तो हमने आपको उर में भी बताया था इसलिए दुर्गा पूजा हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होती है।

कहानी 3. एक बार एक कौस्ता (जो देवदत्त के पुत्र थे ) उन्होंने  ने अपनी शिक्षा को पुर्ण रूप से पूरी करने के बाद अपने  गुरु जिनका नाम था वरतंतु उनको गुरु को अपने शिक्षा के बदले गुरु दक्षिणा देने का फैसला किया। 

हालांकि, आमतौर पर उन्हें 14 करोड़ सोने के सिक्के और जवारत (प्रत्येक 14 से 15 विज्ञान के लिए एक मुद्रा) का भुगतान करने के  लिए उन्होंने अपने गुरु से कहा गया था।  वह इन्हें प्राप्त करने के लिए राजा रघु राज जो कि राम के पूर्वज के पास गया, हालांकि, इन्होंने विश्वजीत के त्याग के कारण वह इसे देने में असमर्थ था। ।

इसलिए, कौस्ता ने भगवान इंद्र के पास जा कर के और उसके बाद वह फिर से भगवान कुबेर जो कि  धन के देवता के पास गए ताकि अयोध्या में “शनु” और “अपती” पेड़ों पर आवश्यक सोने के सिक्कों की बारिश हो सके। 

इस प्रकार, कौस्ता को अपने गुरु को अर्पित करने के लिए मुद्राएँ प्राप्त हुईं।  उस घटना को आज भी “अपाति” वृक्ष की पत्तियों को लूटने की परंपरा के माध्यम से याद किया जाता है। 

इस दिन लोग इन पत्तों को सोने के सिक्के के रूप में एक दूसरे को देते हैं। तो दोस्तों कुछ इस तरह से इसके पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं तो चलिए अब हम दुर्गा पूजा से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है ? ( Why Durga Puja is Celebrated in hindi )

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दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल है कि आखिर दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है तो आप हमारा इस टॉपिक के साथ बने रहिए क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है ।

हम आपके जानकारी के लिए बता दूं कि दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाया जाता है जैसे कि हमने ऊपर टॉपिक में जाना की पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं में भी इसी के बारे में जिक्र किया गया है जैसे कि भगवान राम ने रावण को मार कर के बुराई पर अच्छाई  की जीत दिलाई।

ठीक उसी तरह से मां दुर्गा ने भी राजा महिषासुर को मारकर के बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई और यह त्यौहार बहुत पावन होता है इसमें लोग बहुत ही श्रद्धा और भावना से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं क्योंकि ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग दुर्गा मां की पूजा और दिल से और श्रद्धा से करते हैं उनकी सभी परेशानियों को मां दुर्गा हर लेते हैं और उनके आगे के दिन में सुख और शांति की वरदान देती हैं।

लगभग इस त्यौहार को पूरे भारत में हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा बनाया जाता है हालांकि इसमें लगभग सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं और एकता से मिलकर के सम्मेलन करते हैं और कई बड़े-बड़े जगहों पर इसके कई सारे प्रोग्राम भी होते हैं कई जगह पर उस के अवसर पर मेला भी लगाया जाता है। अगर हम इस को सरल भाषा में समझे तो यह बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए ही इस त्यौहार को मनाया जाता है ।

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[ Conclusion,निष्कर्ष ]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख दुर्गा पूजा क्या है और दुर्गा पूजा क्यो मनाया जाता है आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे। 

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी जानकारी को बताने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर दुर्गा पूजा क्या है और दुर्गा पूजा को क्यों मनाया जाता है और दुर्गा पूजा के पीछे क्या किया ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं और दुर्गा पूजा मनाने की विधि क्या है इन्हीं सभी समस्याओं को हल करने के लिए हमने इस लेख को लिखा था।

और आप सभी पर मेरा संपूर्ण विश्वास है कि आप सभी ने मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट दुर्गा पूजा क्या है और दुर्गा पूजा क्यो मनाया जाता है। दुर्गा पूजा के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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