नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारा इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम Dussehra festival क्या है और Dussehra festival क्यो मनाया जाता है इस बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम जानने भी वाले हैं।

दोस्तो आपको मालूम ही होगा कि भारत में आए दिन नए-नए पर्व त्यौहार आते रहते हैं और उसे विभिन्न विभिन्न धर्म के लोग काफी धूमधाम से मनाते रहते हैं उसी को त्योहार में से एक है Dussehra पूजा का त्यौहार जिसे कि हिंदू समुदाय के द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। मगर दोस्तों कई सारे लोग ऐसे भी हैं जिनकी दुर्गा पूजा बारे में तनिक भी ज्ञान नहीं हैजो जानना चाहते हैं कि आखिर दुर्गा पूजा क्या है ।

और Dussehra festival को क्यों मनाया जाता है और Dussehra festival के पीछे क्या किया ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं और दुर्गा पूजा मनाने की विधि क्या है दुर्गा पूजा का महत्व क्या है  तो हम सभी ने मिलकर के इन सभी लोगों का इस सवाल का जवाब देने के लिए इस लेख को लिखा है और आपको बताने की कोशिश की है कि Dussehra क्या है और Dussehra festival क्यों मनाया जाता है ।

इन सभी के बारे में हमने स्टेप बाइ स्टेप पूरे विस्तार से बता रखा है और अगर आप सच में दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो कृपया करके आप हमारे इस लेख को ध्यान से पूरा अंत ताक देखिए तभी आपको अच्छे से समझ में आएगा चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।

Dussehra Festival

Where to watch Dussehra celebrations in India? | Times of India Travel

दोस्तों अगर आप यह सोच रहे हैं कि आखिर Dussehra festival क्या होता है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में दुर्गा पूजा क्या है  यह जानने के लिए आप हमारे इस टॉपिक को पूरा ध्यान से पढ़े तभी आप को इन सारी जानकारियों के बारे में  पूरा  ज्ञान मिल पाएगा और जान पाएंगे कि कि आखिर दुर्गा पूजा क्या होता है ।

तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दशहरा पूजा एक त्यौहार है जिसे हिंदू धर्म समुदाय के लोगों द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है लगभग यह पूरे भारत में मनाया जाता है।

दोस्तों वैसे तो आपको मालूम ही होगा कि हिंदू धर्म में कई सारे अनेक देवी-देवताओं और भगवान की पूजा अर्चन की जाती है और वो भी अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से सभी देवी देवताओं की पूजा की जाती है और उसे  पर्व के रूप मे बड़े ही धूमधाम से मनाये जाते हैं।

उत्तर भारत में जहां सावन व फागुन के महीने में महाशिवरात्रि और शिवरात्रि का त्योहार कई दिनों तक चलता रहता है तो भाद्रपद के महीने में महाराष्ट्र के सभी जिले में दशहरा पूजा  त्योहार की धूम मची होती है। 

राजस्थान , गुजरात, और लगभग पूरे उत्तरी भारत ( North India )में जहां चैत्र एवं आश्विन के महीने में में नवरात्रि पूजा का भीषण  आयोजन किया जाता है तो वहीं बंगाल के क्षेत्र में आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी से ले कर में दशमी तक दुर्गा पूजा का उत्सव बड़े ही धूम धाम से चलता है।

जिस प्रकार गणेश भगवान की प्रतिमा की स्थापना कर लगभग दस दिनों के पश्चात गणेश भगवान की मूर्ति की विसर्जन किया जाता है ठीक इसी प्रकार माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन भी उनके स्थापित करने के कुछ दिन बाद किया जाता है। दोस्तों वैसे दुर्गा पूजा का यह उत्सव प्रसिद्ध तो, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में है लेकिन वर्तमान में यह त्योहार लगभग पूरे देश में ही इस उत्सव को बड़े धूमधाम धाम से मनाया जाता है।

पंडित जी की माने तो यह दुर्गा पूजा के त्योहार में बंगाल में हिंदूओं का खास व काफी बड़े स्तर पर और बहुत धूम धाम से मनाया जाने वाला त्योहार है। दशहरा पूजा की तैयारियां उसके आने से महीने भर पहले से ही शुरु होने लगती हैं और लोग इस पर्व के तैयारी में लग जाते है। इस पावन त्योहार में पंडाल लगा कर उन्हें काफी बेहतर ढंग से सजाया जाता है इसमें मां दुर्गा की मूर्ति भी रखी जाती हैं।

यह सब करने के बाद पश्चात अलग-अलग पंडालों का आकलन काफी अच्छे ढंग से किया जाता है व सबसे रचनात्मक, सबसे बेहतर, और काफी आकर्षक सजावटी पंडाल को पुरुस्कृत भी किया जाता है। इस अवसर पर कई सारे लोग विभिन्न विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते है, विभिन्न विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और समेलन और प्रोग्राम को आयोजित होती हैं।

इस अवसर पर लगभग हिंदू समुदाय के समस्त महिला और पुरुष अपने पारंप रिक परिधान को पहनते हैं। और ऐतिहासिक मान्यता है कि राजा- महाराजाओं के समय तो यह पूजा और भी बड़े स्तर पर आयोजित की जाती थी और आज भी ऐसा ही किया जाता है।

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Dussehra festival क्यों मनाया जाता है (Why Dussehra festival is Celebrated in hindi) 

दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल है कि आखिर Dussehra festival क्यों मनाया जाता है तो आप हमारा इस टॉपिक के साथ बने रहिए क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि Dussehra festival क्यों मनाया जाता है ।

दोस्तों हम आपके जानकारी के लिए बता दूं कि Dussehra festival बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाया जाता है जैसे कि हमने ऊपर टॉपिक में जाना की पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं में भी इसी के बारे में जिक्र किया गया है जैसे कि भगवान राम ने रावण को मार कर के बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई

। ठीक उसी तरह से मां दुर्गा ने भी राजा महिषासुर को मारकर के बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई  इसीलिए इस त्यौहार को Dussehra festival के रूप में मनाया जाता है 

यह Dussehra festival बहुत पावन होता है इसमें लोग बहुत ही श्रद्धा और भावना से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं क्योंकि ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग दुर्गा मां की पूजा और दिल से और श्रद्धा से करते हैं उनकी सभी परेशानियों को मां दुर्गा हर लेते हैं और उनके आगे के दिन में सुख और शांति की वरदान देती हैं।

लगभग इस Dussehra festival को पूरे भारत में हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा बनाया जाता है हालांकि इसमें लगभग सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं और एकता से मिलकर के सम्मेलन करते हैं और कई बड़े-बड़े जगहों पर इसके कई सारे प्रोग्राम भी होते हैं कई जगह पर उस के अवसर पर मेला भी लगाया जाता है। अगर हम इस को सरल भाषा में समझे तो यह बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए ही इस त्यौहार को मनाया जाता है ।

2022 मे Dussehra festival कब मनाया जाएगा? (Dussehra festival 2022 Date)

 दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं की 2022 मे Dussehra festival कब मनाया जाएगा तो हम आपको बता दें कि 2022 मे बुधवार 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा  दोस्तों जैसा कि हम लोग जानते हैं कि Dussehra festival दस दिन का होता है और इसे दस दिन तक मनाया जाता है ।

तो हम आपको बता दें कि  इस  दशहरा त्यौहार का तैयारी दस दिन पहले से ही शुरू हो जाती है और इस त्यौहार को दस दिन तक पूरे धूमधाम के साथ और उत्साह के साथ मनाया जाता है और इसी तरह इस साल भी इस त्यौहार को 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।

Dussehra festival का इतिहास (History of Dussehra festival in hindi)

Dussehra (Vijaya Dashami, Dasara, or Dashain) 2021 in India - Dates

दोस्तों अगर आप दुर्गा पूजा के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे टॉपिक के साथ बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में दुर्गा पूजा के इतिहास से जुड़ी कुछ बातों पर विचार विमर्श करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि दुर्गा पूजा का इतिहास कई  हजारों साल पुराना ऐतिहासिक और पौराणिक है और उतना ही प्रचलित भी है।

यह हिन्दू धर्म के लोगो का भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक दुर्गा पूजा यानी की इसे नवरात्रि का इतिहास कई सारे कड़ियों में काफी पुराणिक तरह से बंटा हुआ है,  इसे अब हम लोग जानने की कोशिश करेंगे।

पहला ऐतिहासिक कथा :- दोस्तों  एक पौराणिक ऐतिहास के अनुसार यह माना जाता है कि एक असुर था जिसका नाम राजा महिषासुर था और वह उस समय एक राजा रहता था और राज करता था उसके पास अलग अलग तरह की शक्तिया भी थी और वो बहुत शक्तिशाली भी था, महिषासुर इतना शक्तिशाली था कि स्वर्ग के सभी देवी देवता और भगवान इस राक्षस को हराने मे असमर्थ दिख रहे थे इसके आगे कमजोर पड़ रहे थे। देखते-देखते असुर राजा महिषासुर बहुत आक्रामक हो गया था उसके पास उसकी शक्तियों का घमंड हो गया था।

तभी ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान ने एक साथ महिषासुर के विनाश के लिए एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया उसे बनाया और उस शक्ति का नाम देवी दुर्गा रखा था ।

ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान के द्वारा उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण करके आंतरिक शक्ति दी गई, फिर मां दुर्गा ने तकरीबन 9 दिनों तक महिषासुर से भीषण युद्ध किया और युद्ध के अंतिम दिन यानी कि दसवीं दिन महिषासुर राक्षस का वध करके विजयी हुई थी और उस दिन महिषासुर मारा गया। उसी दिन को दुर्गा पूजा  विजयदशमी दशहरा भी कहा जाता है और विजयदशमी दशहरा इस के रूप में भी इसे मनाया जाता है।

दूसरा ऐतिहासिक कथा :- दोस्तों मां दुर्गा के इतिहास के पीछे लगभग दो ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं जिनमें से हमने आपको ऊपर में पहला बता दिया है और रहा बात दूसरा की तो दूसरा रामायण ग्रंथ के ऊपर आधारित है रामायण के अनुसार राम जी ने रावण को मारने के लिए युद्ध से पहले मां दुर्गा की शक्ति प्राप्त करने के लिए उन्होंने मां चंडी की पूजा अर्चन की थी।

फिर भगवान राम ने दुर्गा पूजा के दसवे दिन रावण का वध किया था और रावण इसी दिन मारा गया था। उस दिन को हम सब विजय दशमी के रुप मे मनाते कुछ इस तरह से भी मनाते हैं। हम इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी मनाते हैं। दुर्गा पूजा के लास्ट दिन रावण के बड़े पुतले को बना करके राम जी के द्वारा मार दिया जाता है और उस पुतला में आग लग जाता है तो दोस्तों कुछ इस तरह से दुर्गा पूजा मनाया जाता है इसके पीछे का यही सब पौराणिक कथा है।

दूसरा ऐतिहासिक कथा :- दोस्तों मां दुर्गा के इतिहास के पीछे लगभग दो ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं जिनमें से हमने आपको ऊपर में पहला बता दिया है और रहा बात दूसरा की तो दूसरा रामायण के ऊपर आधारित है रामायण के अनुसार राम जी ने रावण को मारने के लिए युद्ध से पहले मां दुर्गा की शक्ति प्राप्त करने के लिए उन्होंने मां चंडी की पूजा अर्चन की थी।

फिर भगवान राम ने दुर्गा पूजा के दसवे दिन रावण का वध किया था और रावण इसी दिन मारा गया था। उस दिन को हम सब विजय दशमी के रुप मे मनाते कुछ इस तरह से भी मनाते हैं। हम इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी मनाते हैं।

दुर्गा पूजा के लास्ट दिन रावण के बड़े पुतले को बना करके राम जी के द्वारा मार दिया जाता है और उस पुतला में आग लग जाता है तो दोस्तों कुछ इस तरह से दुर्गा पूजा मनाया जाता है इसके पीछे का यही सब पौराणिक कथा है।

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Dussehra festival का महत्व 

Dussehra Meaning | History of Dussehra | Dussehra Celebration | FlowerAura

इस टॉपिक में बताएंगे कि मां दुर्गा की महत्व क्या है और हिंदू धर्म मे इस का कितना महत्वपूर्ण पर्व  है तो चलिए बिना देर किए हुए शुरू करते हैं इस टॉपिक को,

पूजा धार्मिक आध्यात्मिक,सांस्कृतिक और सांसारिक महत्व है। लोग देवी दुर्गा मां की पूजा षष्टि से शूरु करते हैं दुर्गा पूजा  का पर्व हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है देवी दुर्गा की बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। अतः दुर्गा पूजा का पर्व बुराई पर भलाई की विजय के रूप में भी माना जाता

है। यह न केवल सबसे बड़ा हिन्दू उत्सव है बल्कि यह बंगाली हिन्दू समाज में सामाजिक- सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण उत्सव भी है। इस Dussehra festival का महत्व हिंदू धर्म काफी ज्यादा है क्योंकि festival को  भारत के बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश ,  झारखंड जैसे राज्य में काफी ज्यादा धूमधाम से और उत्साह के साथ मनाया जाता है ।

इस त्यौहार के दिन  सभी लोग मां दुर्गा की दर्शन करने जाते हैं और उनसे अपनी मनोकामना मांगते हैं इसके अलावा उस दिन सभी लोग Dussehra का मेला घूमने भी जाते हैं इस दिन दशहरा में बहुत  बड़ा मेला लगता है और बहुत दूर-दूर से लोग इस मेला को देखने आते हैं और घूमने आते हैं

Dussehra festival पूजा की विधि

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दोस्तों अगर आप दुर्गा पूजा के मनाने के विधि के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि Dussehra festival के विधि क्या-क्या है।

तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Dussehra festival त्योहार को लोग निष्ठा और श्रद्धा और भावना से मनाते हैं  यह तकरीबन 10 दिनों तक चलने वाले यह त्योहार को हर दिन लोग माँ दुर्गा की पूजा के अर्चन को कुछ खास तरह के नियम के साथ करते है तो आइए जानते हैं पूजा की खास विधि के बारे में,

क्या आपको पता है कि दुर्गा पूजा का यह पर्व आश्विन के शुक्ल पक्ष से ले कर के दशमी तारिक तक मनाते हैं इस दौरान माँ दुर्गा की 9 दिनों तक उपवास रखकर लोग इनका पूजा करते हैं हालांकि लोग अपने अनुसार इस पर्व में कई दिनो तक भी उपवास रखकर पूजा माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। श्रद्धालु और भक्त इस पर्व के दसवीं के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा को बेहतर तरह से  सिंगर कर के और सुहागन की तरह सजाती है।

नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के सामने कुमारी की भी पूजा करते है लोग कुमारी पूजन को बहुत पावन और पवित्र मानते हैं हालांकि आमतौर पर भारत का एक राज्य बंगाल है जहां पर यह त्योहार दुर्गा पूजा को विभिन्न विभिन्न रूपों से बड़े ही धूम धाम से जाती है। विजयदशमी और दशेरा के त्योहार के दिन लोग अपनी पसंद की वस्तुएं को माँ के चरणों मे अर्पित करती है।

उस दिन पूरी रात पूजा,की पंडित जी के द्वरा अखंड पाठ और जाप किया जाता हैं फिर देवी की प्रतिमाओं को सिंगारित यानी कि सजा कर के काफी हर्षोल्लास के साथ माँ दुर्गा की झांकी निकालते हैं और पूरी धूम धाम के साथ पूरे समाज के चक्कर लगाने के बाद अंत में प्रतिमा को स्वस्थ नदी अथवा तालाब में बड़े ही धूख के विसर्जित करते हैं।

मां देवी दुर्गा की कहानी और किंवदंतियां (Story and legends of Goddess Durga in hindi)

दोस्तों मां दुर्गा पूजा के पीछे बहुत सारे पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां है तो हम इस टॉपिक में उन्हीं सभी के बारे में जानने वाले हैं।

Dashara Puja कहानी 1. तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा माना जाता है कि एक असुर था जिसका नाम राजा महिषासुर था और वह उस समय एक राजा रहता था और राज करता था ।

उसके पास अलग अलग तरह की शक्तिया भी थी और वो बहुत शक्तिशाली भी था, महिषासुर इतना शक्तिशाली था कि स्वर्ग के सभी देवी देवता और भगवान इस राक्षस को हराने मे असमर्थ दिख रहे थे इसके आगे कमजोर पड़ रहे थे।

देखते-देखते असुर राजा महिषासुर बहुत आक्रामक हो गया था उसके पास उसकी शक्तियों का घमंड हो गया था। तभी ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान ने एक साथ महिषासुर के विनाश के लिए एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया उसे बनाया और उस शक्ति का नाम देवी दुर्गा रखा था ।

ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान के द्वारा उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण करके आंतरिक शक्ति दी गई, फिर मां दुर्गा ने तकरीबन 9 दिनों तक महिषासुर से भीषण युद्ध किया और युद्ध के अंतिम दिन यानी कि दसवीं दिन महिषासुर राक्षस का वध करके विजयी हुई थी और उस दिन महिषासुर मारा गया। उसी दिन को विजयदशमी दशहरा भी कहा जाता है और विजयदशमी दशहरा इस के रूप में भी इसे  मनाया जाता है।

Dashara Puja कहानी 2. दुर्गा पूजा की एक और किंवदंती और पौराणिक कथा यह भी है कि, रामायण के अनुसार, भगवान राम जी ने लंका के राजा रावण को मारने के लिए देवी माँ दुर्गा जी से आशीर्वाद पाने के लिए उन्हीने माँ चंडी पूजा अर्चन की थी।

इस त्योहार दुर्गा पूजा के दसवें दिन भगवान राम जी ने रावण का वध कर किया था, तभी से उस दिन को विजया दशमी भी कहा जाता है। यह बात तो हमने आपको उर में भी बताया था इसलिए दुर्गा पूजा हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होती है।

Dashara Puja कहानी 3. एक बार एक कौस्ता (जो देवदत्त के पुत्र थे ) उन्होंने  ने अपनी शिक्षा को पुर्ण रूप से पूरी करने के बाद अपने  गुरु जिनका नाम था वरतंतु उनको गुरु को अपने शिक्षा के बदले गुरु दक्षिणा देने का फैसला किया। 

हालांकि, आमतौर पर उन्हें 14 करोड़ सोने के सिक्के और जवारत (प्रत्येक 14 से 15 विज्ञान के लिए एक मुद्रा) का भुगतान करने के लिए उन्होंने अपने गुरु से कहा गया था। वह इन्हें प्राप्त करने के लिए राजा रघु राज जो कि राम के पूर्वज के पास गया, हालांकि, इन्होंने विश्वजीत के त्याग के कारण वह इसे देने में असमर्थ था।

इसलिए, कौस्ता ने भगवान इंद्र के पास जा कर के और उसके बाद वह फिर से भगवान कुबेर जो कि  धन के देवता के पास गए ताकि अयोध्या में “शनु” और “अपती” पेड़ों पर आवश्यक सोने के सिक्कों की बारिश हो सके। 

इस प्रकार, कौस्ता को अपने गुरु को अर्पित करने के लिए मुद्राएँ प्राप्त हुईं। उस घटना को आज भी “अपाति” वृक्ष की पत्तियों को लूटने की परंपरा के माध्यम से याद किया जाता है।  इस दिन लोग इन पत्तों को सोने के सिक्के के रूप में एक दूसरे को देते हैं। तो दोस्तों कुछ इस तरह से इसके पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं तो चलिए अब हम दुर्गा पूजा से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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[ Conclusion,निष्कर्ष ]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख Dussehra festival क्या है और Dussehra festival क्यो मनाया जाता है आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके Dussehra festival से जुड़ी सभी जानकारी को बताने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर Dussehra  पूजा क्या है और Dussehra पूजा को क्यों मनाया जाता है और Dussehra festival के पीछे क्या किया ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं हैं और दुर्गा पूजा मनाने की विधि क्या है इन्हीं सभी समस्याओं को हल करने के लिए हमने इस लेख को लिखा था।

और आप सभी पर मेरा संपूर्ण विश्वास है कि आप सभी ने मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं। हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट Dussehra festival क्या है और Dussehra festival क्यो मनाया जाता है। के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

 तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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