नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारे इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम Gangaur Festival in Hindi | गणगौर त्यौहार 2022 का महत्त्व, पूजा विधि, कथा व गीत के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं ।

दोस्तों आपको तो मालूम ही होगा कि भारत में कई सारे पर्व त्यौहार आते रहते हैं और जाते रहते हैं और कई ऐसे बड़े-बड़े मशहूर त्यौहार है जिन्हें बड़े ही धूमधाम से लोग मनाते हैं उसी में से एक त्यौहार गणगौर भी है जिसे हिंदू समुदाय के महिलाएं द्वारा बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मगर कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो इस पर्व के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानते हैं और वह जानना चाहते हैं कि आखिर गणगौर त्यौहार क्या होता है और गणगौर त्यौहार को कैसे मनाया जाता है और गणगौर त्यौहार के पीछे इतिहास क्या रहा है और गणगौर त्यौहार में किस किस तरह का गीत गाया जाता है ।

और गणगौर त्यौहार की ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं कौन-कौन सी है हमने आपकी इन्हीं सभी सवालों को जवाब देने के लिए इस लेख को लिखा है और इसलिए तो मैं स्टेप बाई स्टेप लिख कर के गणगौर त्यौहार से जुड़ी सभी जानकारी को देने की कोशिश की है।

अगर आप सच में गणगौर त्यौहार से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से मेरा अनुरोध है कि मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पड़े तभी आपको मेरा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।

गणगौर पूजा क्या है?

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दोस्तों अगर आपके मन में क्या ख्याल है कि आखिर गणगौर पूजा क्या है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बन रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में बात करेंगे गणगौर पूजा के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं ।

इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि गणगौर पूजा एक त्योहार है जो प्रेम एवं पारिवारिक और ऐतिहासिक सौहार्द का एक बहुत ही पावन त्योहार के रूप में माना जाता है। गणगौर पूजा को हमारे देश भारत के ढेर सारे विभिन्न राज्यों के सभी लोगों द्वारा मनाया जाता है।

दोस्तों अगर हम गणगौर का संधि विच्छेद करें तो हमारे सामने लगभग दो शब्द आते हैं, एक तो है ‘गण’ और दूसरा शब्द आता है ‘गौर’। अगर हम इन दोनों शब्दों के अलग-अलग शाबदार्थ के बारे मेब बात करे तो गण शब्द का अर्थ साफ साफ भगवान शिव जी से मिलता है। अर्थात इस गण शब्द का प्रयोग भगवान शंकर जी के लिए ही किया जाता है।

यही इस के विपरीत यदि हम गौर शब्द का अर्थ समझने की कोसिसि करे तो गौर शब्द का अर्थ माता पार्वती यानी कि भगवान शिव जी की पत्नी से होता है।

अगर हम गणगौर पूजा को देखे तो आमतौर पर यह राजस्थान के अन्य कई सारे त्योहार में से सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। गणगौर पर्व को न केवल राजस्थानी मनाते है बल्कि इस त्योहार को पूरे भारत के अन्य राज्यों में भी बड़े धूम धाम से  मनाया जाता है। राजस्थान में इस त्यौहार की काफी ऐतिहासिक और पारंपरिक मान्यता है।

राजस्थान राज्य में गणगौर पूजा को आस्था के साथ साथ श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है और हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि गणगौर व्रत के दिन भगवान शिव जी यानी कि शंकर जी और माता पार्वती का पूजा पाठ भी किया जाता है।

गाइस हम आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे कि सभी महिलाएँ और नारियां इस दिन भगवान शिव जी और पार्वती जी का पूजन सच्चे मन के साथ करते हैं। राजस्थानी लोगों की यह मान्यता है कि  माता पार्वती और भगवान शंकर से संबंध में इस गणगौर त्योहार को मनाया जाता है।

यही एक कारण है कि गणगौर पूजा की हिंदू समुदाय के लोगों में एक अलग मान्यता को दर्शाता है। गणगौर पूजा के पीछे हिंदू धर्म देव महादेव ( शंकर जी ) और माता पार्वती के कई सारे संबंध में एक बहुत ही विशेष और एक अलग प्रकार के रहस्य है।

गणगौर त्योहार के अन्य नाम

दोस्तों इस टॉपिक में हम जानेंगे कि इस गणगौर त्योहार को और किस किस नाम से जाना जाता है क्योंकि हमारे देश भारत में लगभग कुछ ही दूर जाने के बाद भाषा में बदलाव आपको देखने को मिल जाएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि हमारे देश भारत के राजस्थान राज्य में इस त्यौहार को गणगौर पूजन के नाम से जाना जाता है और यह काफी प्रसिद्ध भी है।

और क्या आपको मालूम है कि गणगौर पूजन को भारत के अन्य कई सारे राज्यों जैसे कि यूपी, बिहार, जैसे कई सारे राज्यों में यह त्योहार तीज के त्यौहार के रूप में भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है।

भारतीय ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार तीज का त्यौहार केवल पतिव्रता महिला ही मनाती है। भारत के अन्य कई सारे राज्यों में तो यह पर्व केवल एक दिन के लिए ही मनाया जाता है, परंतु हम आपके जानकारी के लिए बता दे की राजस्थान  राज्य में इस त्यौहार को महिलाएं को एक सामूहिक रूप से 16 दिनों तक मनाती है।

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गणगौर पूजन का महत्व

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दोस्तों इस टॉपिक में हमें इस गणगौर पूजन के महत्व के बारे में जानने वाले हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहिए तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि गणगौर एक ऐसा त्योहार है जिसे, हर एक स्त्री के द्वारा बड़े ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

इस त्योहार में कुवारी कन्या से ले कर,के  विवाहित महिला लगभग दोनों ही, इस त्योहार के पूरी विधी-विधान से गणगौर जिस मे, भगवान शंकर जी और उनकी धर्म पत्नी ( माता पार्वती ) जी का पूजन करती है।  इस त्योहार का महत्व कुवारी कन्या के लिये , अच्छे दूल्हा यानी कि पति की कामना को ले कर के रहता है जब कि, विवाहित महिलाओं के अपने पति यानी कि स्वामी की दीर्घायु के लिये होता है।

जिस मे कुवारी कन्या पूरी तरह से सज धज कर के तैयार हो कर और, विवाहित स्त्री अपनी सोलह श्रंगार कर के पुरे, सोलह दिन तक इस त्योहार विधी-विधान से पूजन करती है। तो दोस्तों इस गणगौर त्यौहार का कुछ यही महत्वपूर्ण महत्व है जिसके वजह से लोग इसे मनाते हैं।

गणगौर पूजन सामग्री (Poojan Items in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक में हम जानेंगे कि आखिर इस गणगौर त्यौहार को मनाने में किस-किस चीजों की सामग्री की जरूरत पड़ती है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि जिस तरह, इस पूजन का बहुत महत्व है उसी तरह,  पूजा सामग्री का भी पूर्ण होना आवश्यक है.

  • लकड़ी की चौकी/बाजोट/पाटा
  • घी
  • फूल,दुब,आम के पत्ते
  • पानी से भरा कलश
  • पान के पत्ते
  • नारियल
  • सुपारी
  • काली मिट्टी/होली की राख़
  • दो मिट्टी के कुंडे/गमले
  • मिट्टी का दीपक
  • गणगौर के कपडे
  • गेहू
  • बॉस की टोकनी
  • चुनरी का कपड़ा
  • ताम्बे का कलश
  • कुमकुम, चावल, हल्दी, मेहन्दी, गुलाल, अबीर, काजल

यही कुछ महत्वपूर्ण सामग्री है जिनका उपयोग इस त्योहार को मनाते वक्त किया जाता है।

गणगौर पूजन की विधि क्या है (Gangaur Poojan Vidhi)

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दोस्तों इस टॉपिक में हम जाने वाले हैं कि आखिर इस गणगौर त्यौहार की विधि किस तरह से की जाती है और इसके इतिहास में विधि-विधान क्या है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि

मारवाड़ी की जितने भी स्त्रियाँ होती है वो सोलह दिन की गणगौर पर्व को पूजती है। जिस मे मुख्य रूप से,  जो भी विवाहित कन्या होती है वो शादी के बाद की सबसे पहली होली पर, अपने पिता माता के साथ घर या सुसराल मे, लगभग  सोलह दिन की गणगौर बिठाती है और पूजा भी करती है।

क्या आपको पता है कि यह गणगौर अकेली नही, बल्कि जोड़े के साथ एक साथ ही पूजी जाती है। अप ने साथ अन्य सोलह कुवारी कन्याओ या बच्चीयों को भी, पूजन के लिये बुलाया जाता है और पूजा की सुपारी देकर के उनको निमंत्रण भी देती है।

सोलह दिन गणगौर  पर्व को धूम-धाम से मनाती है और उस के अंत मे,  इस को उद्यापन कर गणगौर को एक साथ नदी या तलब में विसर्जित कर देती है। फाल्गुन महीने की पूर्णिमा,यानी कि जिस दिन होलिका का दहन मनाया जाता है उस के दूसरे दिन, पड़वा पड़ता है यानी की जिस दिन हम होली खेली जाती है उस दिन से, गणगौर की पूजा एक नई रंग सर प्रारंभ होती है।

ऐसी स्त्री जिस के विवाह के बाद कि, पहली होली है उनके घर पर गणगौर का अच्छी तरह से  पाटा/चौकी लगा कर, लगभग पूरे सोलह दिन उन्ही के घर गणगौर का पूजन किया जाता है।

इस  गणगौर पूजा की सबसे पहली विधि है कि चौकी लगा कर, उस पर लगभग दो साथिया बना कर, के श्रद्धा और भक्ति से पूजन किया जाता है। जिस के उपरान्त पानी से भरा एक कलश, और उस कलश पर तकरीबन पाच पान के पत्ते, के ऊपर उस पर नारियल रखते है। कुछ इस तरह से कर के कलश चौकी के, दाहिनी साइड रखते है।

अब चौकी पर तकरीबन सवा रूपया या कितने भी रुपये का सिक्का रखे और, इसके साथ साथ सुपारी (गणेशजी स्वरूप) रख कर पूजा अर्चन करते है।

ये सब करने के बाद फिर चौकी पर, आपको होली की राख या कही से काली मिट्टी से, तकरीबन सोलह छोटी-छोटी पिंडी के आकार बना कर उसे, पाटे/चौकी के उपर रखा जाता है। उस के बाद उस पिंडे पर पानी से हल्का, छीटे देकर कुम कुम-चावल से, उसकी पूजा अर्चन की जाती है।

दीवार पर एक पेपर लगा कर के , उन सभी कुवारी कन्या आठ-आठ और विवाहिता सोलह-सोलह टिक्की क्रमशः कुमकुम, काजल ,हल्दी, मेहन्दी, की लगाती है.

उसके बाद गणगौर के तरह तरह के ढेर सारे गीत गाये जाते है, और पानी का कलश अपने साथ रख करके, और हाथ मे दुब ले कर, जोड़े से सोलह बार, गणगौर के गीत के साथ पूजा अर्चन करती है।

 दोस्तों उसके बाद तदुपरान्त गणगौर, कहानी गणेश जी की, कथा कहती है। उस के बाद पाटे के गीत एक साथ गा कर, उसे प्रणाम कर भगवान सूर्यनारायण को, जल चड़ा कर के उनको अर्ग देती है।

 दोस्तों कुछ इस तरह से पूजा वैसे तो उन्हें, पूरे लगभग सोलह दिन करते है परन्तु, शुरू के 7 से 8 दिन ऐसे, पूजा के बाद सातवे दिन सीतला सप्तमी के दिन शाम मे, गाजे-बाजे के साथ गणगौर भगवान व दो मिट्टी के, छोटे छोटे कुंडे कुमार के यहा से लाते है।

 और लास्ट में आ जाता है अष्टमी और अष्टमी से गणगौर की तीज तक, प्रत्येक सुबह बिजोरा जो की फूलो का बनता है। उस की और जो दो कुंडे है उसमे, गेहू डालकर ज्वारे बोये जाते है। गणगौर की जिस मे ईसर जी यानी कि (भगवान शिव) – गणगौर माता यानी कि (पार्वती माता) के , मालन, माली ऐसे दो जोड़े और एक विमलदास जी ऐसी कुल पांच मूर्तिया होती है। इन सभी का पूजन होता है , प्रतिदिन, और गणगौर की तीज को उद्यापन होता है और सभी चीज़ विसर्जित होती है।

तो दोस्तों कुछ इस तरह से हैं इस गणगौर त्यौहार का विधि विधान होता है और इसी के साथ पूजा को भी समाप्त कर दिया जाता है।

गणगौर माता की कथा / कहानी (Gangaur Katha)

Why and how is the Gangaur festival celebrated? - Quora

दोस्तों इस टॉपिक में हम इस त्यौहार के ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पौराणिक कथानुसार चैत्र महीना के शुक्ल पक्ष की तीसरे तिथि के दिन एक बार भगवान शिव शिव जी और उनकी धर्म पत्नी माता पार्वती भ्रमण के लिए धरती पर आएं, उन के साथ में देवर्षि नारद मुनि भगवान  भी थे।

धरती पर चलते-चलते एक छोटे से गांव में पहुंच गए। उन के आने की खबर सुन कर के लगभग सभी गांव वासी उनकी स्वागत करने की तैयारियां कर ने में लग गए । एक ओर कुलीन के घरों से अत्यंत स्वादिष्ट भोजन पकने की खुशबू पूरे गांव में आने लगी। लेकिन कुलीन स्त्रियां स्वादिष्ट पकवान ले कर पंहुचती उससे पहले ही कुछ गरीब परिवारों की महिलाएं अप ने श्रद्धा और भक्ति और सुमन ले कर के भगवान के पास पंहुच गई।

माता पार्वती जी ने उनकी भक्ति और श्रद्धा को देखते हुए सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। जब कुलीन घरों महिलाएं तरह-तरह के पकवान, मिष्ठान ले कर पहुंची तो माता पार्वती जी के पास उन्हें देने के लिये अब कुछ नहीं बचा था ।

तब ऐसा देख कर भगवान शिव जी ने माता पार्वती जी कहा, आपने तो अपना सारा आशीर्वाद तो उन गरीब महिलाओं को दे दिया अब इन्हें आप क्या देंगी? माता पार्वती जी ने कहा इनमें से जो भी सच्ची श्रद्धा और भक्ति लेकर यहां आयी है उस पर ही इस विशेष प्रकार का सुहाग रस के छींटे पड़ेंगे और वह सौभाग्यशालिनी और सुखी महिलाएं होगी।

तब माता पार्वती  जी ने ने अपने रक्त के छींटे पूरे औरतों पर बिखेरे जो उचित पात्र में लगभग ढेर सारी स्त्रियों पर पड़े और वे धन्य हो गई। लेकिन जो महिलाएं लोभ-लालच और अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने पहुंची सभी महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। तो दोस्तों उसी दिन से इस त्यौहार का पूजा किया जाता है और कुछ इस तरह से इस गणगौर त्यौहार का कथा है।

गणगौर क्यों मनाई जाती है?

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गाइस क्या आपको मालूम है कि गणगौर त्योहार को ले कर के बहुत से लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर यह गणगौर त्योहार मनाया क्यों जाता है तो उन सभी लोगों के इस सवालों का जवाब हम यहां पर पूरे विस्तार से समझने की कोसिसि करेंगे गणगौर त्योहार के पीछे एक अलग ही ऐतिहासिक मान्यता है।

यह एक ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस दिन  शादीशुदा महिलाएं और लड़कियां  भगवान शिव और उनकी धर्म पत्नी माता पार्वती के कई सारे समृद्ध रूप को गणगौर  कहते हैं, जो कि सब महिला उन का पूजन करती हैं।

क्या आपको मालूम है कि गणगौर का त्योहार कुंवारी बच्चीया क्यो मनाती है तो मैं आपके जानकारी के लिए बता दु की वो इसीलिए पूजा करती  हैं ताकि उन्हें उन का मनचाहा पति प्राप्त हो सके और इस त्यौहार को विवाहित लड़कियां इसीलिए पूजती हैं ताकि उन के वर यानी कि पति को लंबी उम्र की प्राप्ति हो सके और भगवान उनकी रक्षा करे और उन्हें सदैव उन के पति का प्रेम मिलता रहे। इस त्यौहार को हमारे देश भारत के राज्य  राजस्थान में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

क्या आपको पता है कि गणगौर पूजा को लेकर के राजस्थान में एक बहुत ही फेमस की कहावत है “तीज तिवारा बावड़ी ले डूबी गणगौर।” इस कहावत को अगर हम समझने की कोसिसि करे तो इसका मतलब होता है कि सावन की तीज यानी कि से पर्व का आगमन शुरू हो जाता है और गणगौर के विसर्जन के साथ ही इस त्यौहार का समापन होता है यानी कि खत्म हो जाता है ।

2022 में गणगौर कब मनाया जाता है और 2022 में गणगौर कब मनाया जयगा ?

दोस्तों इस टॉपिक में हम जानने वाले हैं कि यह गणगौर त्यौहार कब मनाया जाता है और इस गणगौर त्योहार को 2022 में कब मनाया जाएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान में इस त्योहार को लगभग 1 से ले कर के 16 दिनों तक लगातार बिना रुके मनाया जाता है और इसे स्त्रियों के सामूहिक दल यानी कि ग्रुप के रूप में एक साथ मनाया जाता है।

इस पर्व को ले कर ऐसा कहा जाता है कि गणगौर की पूजा होली के दूसरे दिन से ही शुरू हो कर के और इसके उपरांत होली के पूरी तरह से समापन के लगभग  16 सोलहवाँ दिनों तक लगातार चलती।

इस पर्व को लगा तार मनाया जाता ही है, इस के साथ-साथ इस त्यौहार को बड़ी ही श्रद्धा भाव और धूमधाम से मनाया जाता है। अगर हम इसे हिंदी कैलेंडर के अनुसार देखे तो गणगौर का पूजन चैत्र पक्ष की तीसरे को आरंभ होता है।

और ऐतिहासिक पुराणों के अनुसार इसे हम देखे तो गणगौर पूजन का आरंभ पौराणिक काल से ही चलता आ रहा है, उसी समय से इस त्योहार को प्रत्येक शाल बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

गणगौर त्योहार वर्ष 2022 में तारिक 18 मार्च से शुरू होकर तकरीबन 4 अप्रैल तक 15 दिनों तक चलेगा. इस दिन भगवान शिव जी ने अपनी अरद्धागिनी पार्वती को तथा माता पार्वती ने तमाम स्त्रियों को सौभाग्य का वरदान दिया था।

गणगौर पूजते समय का गीत (Gangaur Geet)

दोस्तों जब इस त्यौहार को शुरू में पूजा जाता है तब कुछ गीत गाए जाते हैं और वह गीत हमने आपको नीचे आ स्टेप बाय स्टेप लिखकर बताया है।

प्रारंभ का गीत –

गोर रे, गणगौर माता खोल ये , किवाड़ी

बाहर उबी थारी पूजन वाली,

पूजो ये, पुजारन माता कायर मांगू

अन्न मांगू धन मांगू , लाज मांगू लक्ष्मी मांगू

राई सी भोजाई मंगू.

कान कुवर सो, बीरो मांगू इतनो परिवार मांगू..

उसके बाद सोलह बार गणगौर के गीत से गणगौर पूजी जाती है.

सोलह बार पूजन का गीत –

दोस्तों जब आप सोलहवाँ बार पूजा करते है तब इस गीत को गाया जाता है तो आप इस गीत को ज्ञान कर ले।

गौर-गौर गणपति ईसर पूजे, पार्वती

पार्वती का आला टीला, गोर का सोना का टीला.

टीला दे, टमका दे, राजा रानी बरत करे.

करता करता, आस आयो मास

आयो, खेरे खांडे लाडू लायो,

लाडू ले बीरा ने दियो, बीरों ले गटकायों.

साडी मे सिंगोड़ा, बाड़ी मे बिजोरा,

सान मान सोला, ईसर गोरजा.

दोनों को जोड़ा ,रानी पूजे राज मे,

दोनों का सुहाग मे.

रानी को राज घटतो जाय, म्हारों सुहाग बढ़तों जाय

किडी किडी किडो दे,

किडी थारी जात दे,

जात पड़ी गुजरात दे,

गुजरात थारो पानी आयो,

दे दे खंबा पानी आयो,

आखा फूल कमल की डाली,

मालीजी दुब दो, दुब की डाल दो

डाल की किरण, दो किरण मन्जे

एक,दो,तीन,चार,पांच,छ:,सात,आठ,नौ,दस,ग्यारह,बारह,

तेरह, चौदह,पंद्रह,सोलह.

सोलह बार पूरी गणगौर पूजने के बाद पाटे के गीत गाते है

पाटा धोने का गीत –

दोस्तों जब इसे त्यौहार में पाटा धोने का काम किया जाता है तो अब इस गीत को गाया जाता है तो आप इस गीत को पढ़कर के याद कर ले ताकि जब आप पाटा धोने का समय आएगा तो आप उसमें इस गीत को का सकेंगे

पाटो धोय पाटो धोय, बीरा की बहन पाटो धो,

पाटो ऊपर पीलो पान, म्हे जास्या बीरा की जान.

जान जास्या, पान जास्या, बीरा ने परवान जास्या

अली गली मे, साप जाये, भाभी तेरो बाप जाये.

अली गली गाय जाये, भाभी तेरी माय जाये.

दूध मे डोरों , म्हारों भाई गोरो

खाट पे खाजा , म्हारों भाई राजा

थाली मे जीरा म्हारों भाई हीरा

थाली मे है, पताशा बीरा करे तमाशा

ओखली मे धानी छोरिया की सासु कानी..

ओडो खोडो का गीत –

ओडो छे खोडो छे घुघराए , रानियारे माथे मोर.

ईसरदास जी, गोरा छे घुघराए रानियारे माथे मोर..

(इसी तरह अपने घर वालो के नाम लेना है )

कार्तिक माक की शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन गाय की पूजा की जाती हैं जिसे गोपाष्टमी कहा जाता है.

गणगौर अरग के गीत

हमारे बताने के बाद उस तरह से पूजन करने  के बाद, सुरजनारायण भगवान को जल चड़ाया जाता है तो उस समय एक एक गीत गाया जाता है। जो ने आपको नीचे में बताया है।

अरग का गीत –

अलखल-अलखल नदिया बहे छे

यो पानी कहा जायेगो

आधा ईसर न्हायेगो

सात की सुई पचास का धागा

सीदे रे दरजी का बेटा

ईसरजी का बागा

सिमता सिमता दस दिन लग्या

ईसरजी थे घरा पधारों गोरा जायो,

बेटो अरदा तानु परदा

हरिया गोबर की गोली देसु

मोतिया चौक पुरासू

एक,दो,तीन,चार,पांच,छ:,सात,आठ,नौ,दस,ग्यारह,बारह,

तेरह, चौदह,पंद्रह,सोलह.

ज्येष्ठ माह की एकादशी के दिन पांडू पुत्र भीम ने रखा था निर्जला उपवास, इसलिए इसे भीमसेन एकादशी कहा जाता है.

गणगौर को पानी पिलाने का गीत

सप्तमी से, गणगौर आने के बाद प्रतिदिन तीज तक (अमावस्या छोड़ कर) शाम मे, गणगौर घुमाने ले जाते है. पानी पिलाते और गीत गाते हुए, मुहावरे व दोहे सुनाते है.

पानी पिलाने का गीत –

गणगौर त्यौहार में गणगौर पूजा करते  है तो उस समय पानी पिलाने का भी एक विधि होता है तो जब आप पानी पिलाएंगे तो उस समय एक गीत गाया जाता है और उस गीत को हमने नीचे में लिखकर बताया है

म्हारी गोर तिसाई ओ राज घाटारी मुकुट करो

बिरमादासजी राइसरदास ओ राज घाटारी मुकुट करो

म्हारी गोर तिसाई ओर राज

बिरमादासजी रा कानीरामजी ओ राज घाटारी

मुकुट करो म्हारी गोर तिसाई ओ राज

म्हारी गोर ने ठंडो सो पानी तो प्यावो ओ राज घाटारी मुकुट करो

[ Conclusion, निष्कर्ष ]

दोस्तों आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख गणगौर त्यौहार 2022 का महत्त्व, पूजा विधि, कथा व गीत | Gangaur Festival in Hindi आपको  बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी चीजों के बारे में पूरे विस्तार से जान चुके होंगे जिस के लिए आप हमारी वेबसाइट पर आए थे। 

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आप को गणगौर त्यौहार से जुड़ी सभी जानकारी देने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि आज भी कई सारे लोग ऐसे हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर गणगौर त्यौहार क्या होता है और गणगौर त्यौहार को कैसे मनाया जाता है और गणगौर त्यौहार के पीछे इतिहास क्या रहा है ।

और गणगौर त्यौहार में किस किस तरह का गीत गाया जाता है और गणगौर त्यौहार की ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं कौन-कौन सी है हमने आपकी इन्हीं सभी सवालों को जवाब देने के लिए इस लेख को लिखा था ।

आप सभी पर मेरा संपूर्ण विश्वास है कि आप सभी मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और गणगौर त्यौहार से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट गणगौर त्यौहार के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा  ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे। तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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