नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए आर्टिकल में दोस्तों इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं हिंदू धर्म के एक मशहूर और लोकप्रिय पर्व जन्माष्टमी पर्व Janmashtmi festival के बारे में, हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह जन्माष्टमी पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है ।

मगर आपको जानकर हैरानी होगा कि कई सारे ऐसे लोग हैं जिनको कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में तनिक भी ज्ञान नहीं होता है और वह कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर कृष्ण जन्माष्टमी क्या होता है और जो थोड़े बहुत कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में जानते हैं उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि आखिर कृष्ण जन्माष्टमी को क्यों मनाया जाता है और कृष्ण जन्माष्टमी के मनाने का विधि विधान क्या होता हैं।

इसीलिए हम लोग आज के इस आर्टिकल में कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtmi festival) से जुड़ी  इन सारी जानकारियों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे और जानेंगे कि कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार क्या है और कृष्ण जन्माष्टमी को क्यों मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार का महत्व?, और इस कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार को कैसे मनाया जाता है।

इसके अलावा हम लोग इस आर्टिकल के अंत में कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी और भी कई  जानकारी प्राप्त करेंगे जैसे कृष्ण जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? और कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा तो दोस्तों अगर आप इन सारी जानकारियों के बारे में पूरा विस्तार से जानना चाहते हैं ।

तो हमें आपसे एक अनुरोध है कि आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा अंत आप जरूर पढ़े तभी आपको  कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार से जुड़ी यह सारी जानकारियों मिल पाएगी तो दोस्तों बिना कोई वक्त जाया किए चली अब इस आर्टिकल को शुरू करते हैं और कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtmi festival) के बारे में पूरा विस्तार से जानते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी क्या है? (What is Janmashtmi festival)

Janmashtami special remedies to make god happy कृष्ण जन्माष्टमी : आपकी हर  मनोकामना पूरी करेंगे ये उपाय, होगी बेशुमार बरकत - lifeberrys.com हिंदी

जन्माष्टमी हिंदुओं का एक मशहूर और लोकप्रिय त्यौहार है जो कि अगस्त या सितंबर मनाया जाता है  इस पर्व के रूप में भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को मनाया जाता है।  क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जन्माष्टमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था और इस जन्माष्टमी  त्यौहार की  दिन भगवान  श्री कृष्ण के जन्म का जश्न मनाते हैं। कृष्ण कथा में आठ नंबर का एक और महत्व है कि वह अपनी मां देवकी की आठवीं संतान हैं।

यह अवसर विशेष रूप से वृंदावन और मथुरा में मनाया जाता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म  और पालन-पोषण भी वृंदावन और मथुरा हुआ था इसी की वजह से  जन्माष्टमी की त्यौहार  पूरे भारत समेत वृंदावन और मथुरा धूमधाम से मनाया जाता है भगवान श्री कृष्ण के बचपन और प्रारंभिक युवावस्था के दृश्य . पूर्ववर्ती दिन, भक्त उनके जन्म के पारंपरिक घंटे मध्यरात्रि तक सतर्कता और उपवास रखते हैं।

फिर भगवान श्री कृष्ण की छवि या प्रतिमा को दूध और पानी से नहलाया जाता है, और उसके बाद भगवान श्री कृष्ण को नए कपड़े पहनाए जाते हैं और पूजा की जाती है। और फिर भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों और घरेलू मंदिरों को फूलों और पत्तियों से सजाया जाता है; मिठाइयाँ पहले भगवान श्री कृष्ण को अर्पित की जाती हैं और फिर घर के सभी सदस्यों को प्रसाद भगवान श्री कृष्ण का बचा हुआ प्रसाद , जो उनकी कृपा होती है ने प्रसाद के रूप में वितरित करके ग्रहण किया जाता है।

कृष्ण के भक्त उनके जन्म की घटनाओं को मथुरा, जहां भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, यमुना नदी, जिसके ऊपर उन्हें सुरक्षा के लिए ले जाया गया था, और गोकुल वासी कान्हा के बचपन के दृश्य, छोटे चित्रों का उपयोग करके विस्तृत प्रतिनिधित्व तैयार करके भगवान श्री कृष्ण के पुरानी नटखट कार्य को याद करते हैं। और अन्य प्रतिभागियों, जैसे कि जंगल के जानवरों और पक्षियों भी भगवान कान्हा को याद करते है।

दूध या दही के हड्डी गलियों में ऊंचे खंभों से लटकाए जाते हैं, और पुरुष बर्तन तक पहुंचने और तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं यह सब कार्य भगवान श्री कृष्ण के बचपन के खेल की नकल में चरवाहे लड़कों के साथ होता है, जब वे अपनी माताओं की पहुंच से बाहर लटकाए गए दही को चुरा लेते हैं। त्योहार समूह गायन और नृत्य का भी समय है।

और इस जन्माष्टमी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजा और भजन या नृत्य करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम और नृत्य और संगीत के साथ कृष्ण जन्माष्टमी को इस पावन पर्व के मनाया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत  रखते हैं और भगवान श्री कृष्ण को पूजा करते हैं इस त्यौहार को पूरे भारत देश में मनाया जाता है खासकर वृंदावन और मथुरा में धूमधाम से मनाया जाता है।

Diwali क्या है और Diwali क्यो मनाया जाता है ?

न्माष्टमी त्योहार क्यों मनाते हैं? (Why celebrate janmashtami festival)

दोस्तो आप ये तो जानते ही होंगे सदियों से भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार हम आपको बता दे की बड़े भाई कंस के अत्याचार सहते हुए कारागार में बंद माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की जन्माष्टमी अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ हैं।

जन्माष्टमी का त्योहार के दौरान लोग भगवान श्री कृष्ण की बहुत श्रद्धा से भक्ति करते हैं। और उनका बड़े ही आस्था के साथ पूजा करते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी  की शुरुआत में वैदिक प्रार्थनाओं, भजनों, और हिंदू ग्रंथों और ऐतिहासिक परम्पराओं जैसे गणेश उपनिषद से होती है।

इस जन्माष्टमी त्योहार पे लोग प्रार्थना के बाद जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्री कृष्ण को भोग भी लगाया जाता है जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाने के लिए कई घरों में सूजी का हलवा या धनिये की तो कई घरों में आटे की पंजीरी बनाई जाती है और पूजा के समय कृष्ण भगवान जी को इसका भोग लगाया जाता है ।

दोस्तों हम आपके जानकारी के लिए आपको  बता दें कि पंजीरी श्री कृष्ण का प्रिय भोग है. यही कारण है कि जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाने के लिए इसी चीजा को चुना जाता है।  और बहुत सारे जगह पर जन्माष्टमी के त्यौहार के दिन भगवान श्री कृष्ण जी के भोग में सफेद रसगुल्‍ले का भी भोग लगा सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी के  इस त्यौहार को भगवान बाल श्री कृष्ण जी के इस दिन जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पूरी दुनिया में पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ काफी धूमधाम से  मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि देश-विदेशों मे रहने वाले भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्री कृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं, तो कभी कान्हा के नटखट कान्हा कहा जाता हैं।

कारागार में बंद माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाल श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।  मतलब की यही जन्माष्टमी  के पर्व के दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद के भगवान श्री कृष्ण पक्ष की अष्टमी त्यौहार  को कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता हैं।

जन्माष्टमी त्यौहार का महत्व? (Importance of Janmashtami festival)

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हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्यौहार में कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार भी एक है। या जन्माष्टमी के त्यौहार को हिंदू समाज धर्म में काफी महत्व दिया जाता है और इस त्यौहार को काफी ज्यादा धूमधाम से और उत्साह के साथ मनाया जाता है इस दिन भगवान श्री कृष्ण का पूजा होता है।

जब-जब धरती पर धर्म का पतन होता है। बताया जाता है कि तब-तब भगवान मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। इसी कड़ी में भाद्रपद की श्री कृष्ण जन्माष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी, नक्षत्र में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण रूप में अवतार लिया। इस दिन भगवान पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था इसलिए श्री कृष्णा जन्माष्टमी के निर्धारण में अष्टमी तिथि का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री  कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। यही कारण है कि यह जन्माष्टमी के पर्व हिंदू समाज के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण त्यौहार होता है।

भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए इस दिन लोग उपवास रखने के साथ विधि-विधान से पूजा और भजन या नृत्य करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम और नृत्य और संगीत के साथ कृष्ण जन्माष्टमी को इस पावन पर्व के मनाया जाता है।हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

और भगवान श्री कृष्ण की उन सारी महिलाओं को पूरा करते हैं जो जन्माष्टमी के इस व्रत को करते हैं और जो भगवान से मांगते हैं संतान प्राप्ति,आयु और समृद्धि के लिए जन्माष्टमी पर्व का विशेष महत्व हैं।

सुसज्ज‍ित बांसुरी श्रीकृष्ण को उनकी बांसुरी अत्यंत प्रिय है भगवान श्री कृष्ण जब बांसुरी  बजाते है तो सभी जीव जंतु अति प्रसन्न होते है..  और  कृष्ण जी के भजन और बांसुरी के धुन में  सभी लोग मगन हो जाते हैं भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट मोर पंख का धारण करते हैं। और उनका मुकुट अत्यंत सुंदर लगता हैं। भगवान श्री कृष्ण को मिश्री माखन बहुत दिन प्रिय हैं।

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जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? (Janmashtami festival 2022 date)

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दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? तो हम आपको बता दें कि वर्ष 2022 में कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार 18- Aug -2022 और दही हांडी को 19- Aug -2022  मनाया जाएगा। दोस्तों अगर आप नहीं जानते हैं कि दही हांडी क्या है तो हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि भगवान श्री कृष्ण माखन के बड़े  प्रेमी थे या माखन को बड़ी पसंद करते थे  और उनको दही जहां भी मिल जाती थी वहां से चुरा कर  दही खा जाया करते थे।

इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन बाद दही हंडी मनाया जाता है उस दिन दही हांडी के बड़े ही ऊपर बांधकर लटका दिया जाता है और बच्चे उस दही हांडी को फोड़कर दही खाते हैं और उस पर  रखा उपहार और इनाम को प्राप्त करते हैं। 

जिस तरह से श्रावण मास में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति होती है, उसी तरह से भाद्रपद मास में श्रीकृष्ण की आराधना का महत्व है. कृष्ण जन्माष्टमी पर इस दिन लोग व्रत रखकर और बिना व्रत के भी बड़े उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं. रात के 12 बजे तक भगवान श्री कृष्ण जी का मथुरा-वृंदावन में मुख्य रूप से रास लीला का आयोजन किया जाता है।

रास का अर्थ सौंदर्य, भावना या मिठाई और लीला नाटक या नृत्य या अधिक व्यापक रूप से इसे ईश्वरीय प्रेम का नृत्य कहते है। और उस जन्माष्टमी त्योहार के दिन  बड़े ही धूमधाम से और उत्साह के साथ सभी लोग मिलकर  जागरण भजन, पूजन-अर्चना करते हैं। 

इस वर्ष श्रीकृष्ण का 5248वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा- वृंदावन के ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अवतरण 3229 ईसवी वर्ष पूर्व हुआ था । 3103 ईसवी वर्ष पूर्व  भगवान श्री कृष्ण ने इस धरती लोक को छोड़ भी दिया । विक्रम संवत के अनुसार, कलयुग में उनकी आयु 2079 वर्ष हो चुकी है. अर्थात भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी लोक पर 126 वर्ष 7 महीने और 7 दिन तक रहे थे ।

उसके बाद स्वधाम चले गए. पंचांग के अनुसार, भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 17 अगस्त मंगलवार को रात 11 बजकर 27 मिनट पर होगा । अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात में 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगी । इस हिसाब से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए उदया तिथि को मानते हुए 18 अगस्त को जन्माष्टमी होगी.

कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार व्रत कथा

भगवान श्रीकृष्ण का पर्व रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था, ऐसे में जन्माष्टमी त्योहार के रात के समय को भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है। ग्रंथ और धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से सभी तरह के दुखों का अंत हो जाता है। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना करें। इस दिन उपवास रखा जाता हैं।

भाद्रपद माह के कृष्‍ण पक्ष की कृष्ण जन्माष्टमी  तिथि को अष्टमी यानी कि भगवान श्रीकृष्‍ण जन्‍म की खुशियां मनाई जाती हैं। भक्‍त मध्‍यरात्रि में कन्‍हैया का श्रृंगार करते हैं, उन्‍हें भोग लगाते हैं और पूजा-आराधना करते हैं। इसी के साथ मुरलीधर के जन्‍म की कथा सुनते हैं।

मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्‍ण जी जन्‍म की यह अद्भुत कथा सुनने मात्र से ही समस्‍त पापों का नाश हो जाता है। साथ ही सब कर्मों का पाप धुल जाता हैं। पुराणों में जन्माष्टमी त्योहार के दिन व्रत-उपवास रखने का बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है.कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण के लिए व्रत रखने से बहुत लाभ मिलते हैं।

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जन्माष्टमी त्योहार के पूजा विधि क्या होता है?

Krishna Janmashtami puja today in our house. Jai Shree Krishna : r/hinduism

कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार के बारे में सब जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद दोस्तों अब चलिए जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि क्या होते हैं क्योंकि अगर आप इन कृष्ण जन्माष्टमी  के इस पावन व्रत को करना चाहते हैं ।

तो आपको कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि के बारे में आवश्यक जानकारी होना चाहिए  लेकिन अगर आपको कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो चलिए जानते हैं कि  कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा कैसे किया जाता है और कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि क्या होता है तो दोस्तों हमें आपसे अनुरोध है कि यह सब जाने के लिए आप हमारे ये वाली टॉपिक को पूरा अंत तक और  ध्यान से पढ़ें।

सबसे पहले भगवान श्री कृष्‍ण का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें। ध्यान करने के बाद हाथ जोड़कर इस मंत्र से श्रीकृष्‍ण का आवाह्न करें।

मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार के बारे में पुराणों में लिखा गया है कि जन्माष्टमी का श्रृंगार करने के बाद कान्हा को अष्टगंध चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं लगाया जाता है  इसलिए आप भी पहले भगवान श्री कृष्ण के चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं। उसके बाद आप भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाएं भोग लगाने के लिए आप माखन मिश्री, पंजीरी और अन्य भोग सामग्री अर्पण करें।

उसके बाद आप भगवान श्री कृष्ण के विशेष मंत्रों का जाप करें. बोले भगवान् कृष्ण! उसके बाद फिर आप चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लीजिए। विसर्जन के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर चौकी पर छोड़ें और  उसके बाद कहें : हे भगवान् श्री कृष्ण!,,  तो इन सारी मंत्रों और पूजा विधि के साथ आप जन्माष्टमी त्योहार के दिन भगवान श्री कृष्ण के पूजा कर सकते हैं

 [अंतिम विचार, Conclusion]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा Janmashtmi festival पर यह आर्टिकल   बेहद पसंद आया होगा और आप भी इस Janmashtmi festival के लेख की मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको जन्माष्टमी त्योहार Janmashtmi festival के बारे में संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है ढेर सारे लोग ऐसे हैं जो कि जानना चाहते हैं आखिर जन्माष्टमी त्योहार होता क्या है और जन्माष्टमी त्योहार को क्यों मनाया जाता है और जन्माष्टमी त्योहार के मनाने के विधि विधान क्या है तो हम सभी ने मिलकर इन सभी लोगों के लिए ही इस लेख को विस्तार से लिखा था।

दोस्तो इस लेख में हमने काफी रीसर्च करके इन सभी बातों को इतने आसान भाषा में लिखा है कि कोई भी आसानी से इसे समझ सकता है और सारी जानकारी को प्राप्त कर सकता है। और मेरा आप पर संपूर्ण विश्वास है कि आप मेरे इस लेख को ध्यान से पूरा अंत तक पढ़ चुके होंगे और जन्माष्टमी त्योहार से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट Janmashtmi festival क्या है और Janmashtmi festival को क्यों मनाया जाता है के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

 तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और आपको हमारा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद………

Janmashtmi festival in hindi | Janmashtmi festival को 2022 में कब मनाया जाएगा?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे आज के इस नए आर्टिकल में दोस्तों इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं हिंदू धर्म के एक मशहूर और लोकप्रिय पर्व जन्माष्टमी पर्व Janmashtmi festival के बारे में, हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह जन्माष्टमी पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है ।

मगर आपको जानकर हैरानी होगा कि कई सारे ऐसे लोग हैं जिनको कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में तनिक भी ज्ञान नहीं होता है और वह कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर कृष्ण जन्माष्टमी क्या होता है और जो थोड़े बहुत कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में जानते हैं उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि आखिर कृष्ण जन्माष्टमी को क्यों मनाया जाता है और कृष्ण जन्माष्टमी के मनाने का विधि विधान क्या होता हैं।

इसीलिए हम लोग आज के इस आर्टिकल में कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtmi festival) से जुड़ी  इन सारी जानकारियों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे और जानेंगे कि कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार क्या है और कृष्ण जन्माष्टमी को क्यों मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार का महत्व?, और इस कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार को कैसे मनाया जाता है।

इसके अलावा हम लोग इस आर्टिकल के अंत में कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी और भी कई  जानकारी प्राप्त करेंगे जैसे कृष्ण जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? और कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा तो दोस्तों अगर आप इन सारी जानकारियों के बारे में पूरा विस्तार से जानना चाहते हैं ।

तो हमें आपसे एक अनुरोध है कि आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा अंत आप जरूर पढ़े तभी आपको  कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार से जुड़ी यह सारी जानकारियों मिल पाएगी तो दोस्तों बिना कोई वक्त जाया किए चली अब इस आर्टिकल को शुरू करते हैं और कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtmi festival) के बारे में पूरा विस्तार से जानते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी क्या है? (What is Janmashtmi festival)

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जन्माष्टमी हिंदुओं का एक मशहूर और लोकप्रिय त्यौहार है जो कि अगस्त या सितंबर मनाया जाता है  इस पर्व के रूप में भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को मनाया जाता है।  क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जन्माष्टमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था और इस जन्माष्टमी  त्यौहार की  दिन भगवान  श्री कृष्ण के जन्म का जश्न मनाते हैं। कृष्ण कथा में आठ नंबर का एक और महत्व है कि वह अपनी मां देवकी की आठवीं संतान हैं।

यह अवसर विशेष रूप से वृंदावन और मथुरा में मनाया जाता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म  और पालन-पोषण भी वृंदावन और मथुरा हुआ था इसी की वजह से  जन्माष्टमी की त्यौहार  पूरे भारत समेत वृंदावन और मथुरा धूमधाम से मनाया जाता है भगवान श्री कृष्ण के बचपन और प्रारंभिक युवावस्था के दृश्य . पूर्ववर्ती दिन, भक्त उनके जन्म के पारंपरिक घंटे मध्यरात्रि तक सतर्कता और उपवास रखते हैं।

फिर भगवान श्री कृष्ण की छवि या प्रतिमा को दूध और पानी से नहलाया जाता है, और उसके बाद भगवान श्री कृष्ण को नए कपड़े पहनाए जाते हैं और पूजा की जाती है। और फिर भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों और घरेलू मंदिरों को फूलों और पत्तियों से सजाया जाता है; मिठाइयाँ पहले भगवान श्री कृष्ण को अर्पित की जाती हैं और फिर घर के सभी सदस्यों को प्रसाद भगवान श्री कृष्ण का बचा हुआ प्रसाद , जो उनकी कृपा होती है ने प्रसाद के रूप में वितरित करके ग्रहण किया जाता है।

कृष्ण के भक्त उनके जन्म की घटनाओं को मथुरा, जहां भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, यमुना नदी, जिसके ऊपर उन्हें सुरक्षा के लिए ले जाया गया था, और गोकुल वासी कान्हा के बचपन के दृश्य, छोटे चित्रों का उपयोग करके विस्तृत प्रतिनिधित्व तैयार करके भगवान श्री कृष्ण के पुरानी नटखट कार्य को याद करते हैं। और अन्य प्रतिभागियों, जैसे कि जंगल के जानवरों और पक्षियों भी भगवान कान्हा को याद करते है।

दूध या दही के हड्डी गलियों में ऊंचे खंभों से लटकाए जाते हैं, और पुरुष बर्तन तक पहुंचने और तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं यह सब कार्य भगवान श्री कृष्ण के बचपन के खेल की नकल में चरवाहे लड़कों के साथ होता है, जब वे अपनी माताओं की पहुंच से बाहर लटकाए गए दही को चुरा लेते हैं। त्योहार समूह गायन और नृत्य का भी समय है।

और इस जन्माष्टमी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजा और भजन या नृत्य करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम और नृत्य और संगीत के साथ कृष्ण जन्माष्टमी को इस पावन पर्व के मनाया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत  रखते हैं और भगवान श्री कृष्ण को पूजा करते हैं इस त्यौहार को पूरे भारत देश में मनाया जाता है खासकर वृंदावन और मथुरा में धूमधाम से मनाया जाता है।

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जन्माष्टमी त्योहार क्यों मनाते हैं? (Why celebrate janmashtami festival)

दोस्तो आप ये तो जानते ही होंगे सदियों से भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार हम आपको बता दे की बड़े भाई कंस के अत्याचार सहते हुए कारागार में बंद माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की जन्माष्टमी अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ हैं।

जन्माष्टमी का त्योहार के दौरान लोग भगवान श्री कृष्ण की बहुत श्रद्धा से भक्ति करते हैं। और उनका बड़े ही आस्था के साथ पूजा करते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी  की शुरुआत में वैदिक प्रार्थनाओं, भजनों, और हिंदू ग्रंथों और ऐतिहासिक परम्पराओं जैसे गणेश उपनिषद से होती है।

इस जन्माष्टमी त्योहार पे लोग प्रार्थना के बाद जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्री कृष्ण को भोग भी लगाया जाता है जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाने के लिए कई घरों में सूजी का हलवा या धनिये की तो कई घरों में आटे की पंजीरी बनाई जाती है और पूजा के समय कृष्ण भगवान जी को इसका भोग लगाया जाता है ।

दोस्तों हम आपके जानकारी के लिए आपको  बता दें कि पंजीरी श्री कृष्ण का प्रिय भोग है. यही कारण है कि जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाने के लिए इसी चीजा को चुना जाता है।  और बहुत सारे जगह पर जन्माष्टमी के त्यौहार के दिन भगवान श्री कृष्ण जी के भोग में सफेद रसगुल्‍ले का भी भोग लगा सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी के  इस त्यौहार को भगवान बाल श्री कृष्ण जी के इस दिन जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पूरी दुनिया में पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ काफी धूमधाम से  मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि देश-विदेशों मे रहने वाले भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्री कृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं, तो कभी कान्हा के नटखट कान्हा कहा जाता हैं।

कारागार में बंद माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाल श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।  मतलब की यही जन्माष्टमी  के पर्व के दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद के भगवान श्री कृष्ण पक्ष की अष्टमी त्यौहार  को कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता हैं।

जन्माष्टमी त्यौहार का महत्व? (Importance of Janmashtami festival)

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हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्यौहार में कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार भी एक है। या जन्माष्टमी के त्यौहार को हिंदू समाज धर्म में काफी महत्व दिया जाता है और इस त्यौहार को काफी ज्यादा धूमधाम से और उत्साह के साथ मनाया जाता है इस दिन भगवान श्री कृष्ण का पूजा होता है।

जब-जब धरती पर धर्म का पतन होता है। बताया जाता है कि तब-तब भगवान मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। इसी कड़ी में भाद्रपद की श्री कृष्ण जन्माष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी, नक्षत्र में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण रूप में अवतार लिया। इस दिन भगवान पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था इसलिए श्री कृष्णा जन्माष्टमी के निर्धारण में अष्टमी तिथि का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री  कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। यही कारण है कि यह जन्माष्टमी के पर्व हिंदू समाज के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण त्यौहार होता है।

भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए इस दिन लोग उपवास रखने के साथ विधि-विधान से पूजा और भजन या नृत्य करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम और नृत्य और संगीत के साथ कृष्ण जन्माष्टमी को इस पावन पर्व के मनाया जाता है।हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

और भगवान श्री कृष्ण की उन सारी महिलाओं को पूरा करते हैं जो जन्माष्टमी के इस व्रत को करते हैं और जो भगवान से मांगते हैं संतान प्राप्ति,आयु और समृद्धि के लिए जन्माष्टमी पर्व का विशेष महत्व हैं।

सुसज्ज‍ित बांसुरी श्रीकृष्ण को उनकी बांसुरी अत्यंत प्रिय है भगवान श्री कृष्ण जब बांसुरी  बजाते है तो सभी जीव जंतु अति प्रसन्न होते है..  और  कृष्ण जी के भजन और बांसुरी के धुन में  सभी लोग मगन हो जाते हैं भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट मोर पंख का धारण करते हैं। और उनका मुकुट अत्यंत सुंदर लगता हैं। भगवान श्री कृष्ण को मिश्री माखन बहुत दिन प्रिय हैं।

जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? (Janmashtami festival 2022 date)

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दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी 2022 में कब मनाया जाएगा ? तो हम आपको बता दें कि वर्ष 2022 में कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार 18- Aug -2022 और दही हांडी को 19- Aug -2022  मनाया जाएगा। दोस्तों अगर आप नहीं जानते हैं कि दही हांडी क्या है तो हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि भगवान श्री कृष्ण माखन के बड़े  प्रेमी थे या माखन को बड़ी पसंद करते थे  और उनको दही जहां भी मिल जाती थी वहां से चुरा कर  दही खा जाया करते थे।

इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन बाद दही हंडी मनाया जाता है उस दिन दही हांडी के बड़े ही ऊपर बांधकर लटका दिया जाता है और बच्चे उस दही हांडी को फोड़कर दही खाते हैं और उस पर  रखा उपहार और इनाम को प्राप्त करते हैं। 

जिस तरह से श्रावण मास में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति होती है, उसी तरह से भाद्रपद मास में श्रीकृष्ण की आराधना का महत्व है. कृष्ण जन्माष्टमी पर इस दिन लोग व्रत रखकर और बिना व्रत के भी बड़े उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं. रात के 12 बजे तक भगवान श्री कृष्ण जी का मथुरा-वृंदावन में मुख्य रूप से रास लीला का आयोजन किया जाता है।

रास का अर्थ सौंदर्य, भावना या मिठाई और लीला नाटक या नृत्य या अधिक व्यापक रूप से इसे ईश्वरीय प्रेम का नृत्य कहते है। और उस जन्माष्टमी त्योहार के दिन  बड़े ही धूमधाम से और उत्साह के साथ सभी लोग मिलकर  जागरण भजन, पूजन-अर्चना करते हैं। 

इस वर्ष श्रीकृष्ण का 5248वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा- वृंदावन के ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अवतरण 3229 ईसवी वर्ष पूर्व हुआ था । 3103 ईसवी वर्ष पूर्व  भगवान श्री कृष्ण ने इस धरती लोक को छोड़ भी दिया । विक्रम संवत के अनुसार, कलयुग में उनकी आयु 2079 वर्ष हो चुकी है. अर्थात भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी लोक पर 126 वर्ष 7 महीने और 7 दिन तक रहे थे ।

उसके बाद स्वधाम चले गए. पंचांग के अनुसार, भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 17 अगस्त मंगलवार को रात 11 बजकर 27 मिनट पर होगा । अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात में 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगी । इस हिसाब से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए उदया तिथि को मानते हुए 18 अगस्त को जन्माष्टमी होगी.

कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार व्रत कथा

भगवान श्रीकृष्ण का पर्व रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था, ऐसे में जन्माष्टमी त्योहार के रात के समय को भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है। ग्रंथ और धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से सभी तरह के दुखों का अंत हो जाता है। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना करें। इस दिन उपवास रखा जाता हैं।

भाद्रपद माह के कृष्‍ण पक्ष की कृष्ण जन्माष्टमी  तिथि को अष्टमी यानी कि भगवान श्रीकृष्‍ण जन्‍म की खुशियां मनाई जाती हैं। भक्‍त मध्‍यरात्रि में कन्‍हैया का श्रृंगार करते हैं, उन्‍हें भोग लगाते हैं और पूजा-आराधना करते हैं। इसी के साथ मुरलीधर के जन्‍म की कथा सुनते हैं।

मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्‍ण जी जन्‍म की यह अद्भुत कथा सुनने मात्र से ही समस्‍त पापों का नाश हो जाता है। साथ ही सब कर्मों का पाप धुल जाता हैं। पुराणों में जन्माष्टमी त्योहार के दिन व्रत-उपवास रखने का बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है.कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण के लिए व्रत रखने से बहुत लाभ मिलते हैं।

जन्माष्टमी त्योहार के पूजा विधि क्या होता है?

Krishna Janmashtami puja today in our house. Jai Shree Krishna : r/hinduism

कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार के बारे में सब जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद दोस्तों अब चलिए जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि क्या होते हैं क्योंकि अगर आप इन कृष्ण जन्माष्टमी  के इस पावन व्रत को करना चाहते हैं ।

तो आपको कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि के बारे में आवश्यक जानकारी होना चाहिए  लेकिन अगर आपको कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो चलिए जानते हैं कि  कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा कैसे किया जाता है और कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि क्या होता है तो दोस्तों हमें आपसे अनुरोध है कि यह सब जाने के लिए आप हमारे ये वाली टॉपिक को पूरा अंत तक और  ध्यान से पढ़ें।

सबसे पहले भगवान श्री कृष्‍ण का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें। ध्यान करने के बाद हाथ जोड़कर इस मंत्र से श्रीकृष्‍ण का आवाह्न करें।

मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार के बारे में पुराणों में लिखा गया है कि जन्माष्टमी का श्रृंगार करने के बाद कान्हा को अष्टगंध चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं लगाया जाता है  इसलिए आप भी पहले भगवान श्री कृष्ण के चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं। उसके बाद आप भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाएं भोग लगाने के लिए आप माखन मिश्री, पंजीरी और अन्य भोग सामग्री अर्पण करें।

उसके बाद आप भगवान श्री कृष्ण के विशेष मंत्रों का जाप करें. बोले भगवान् कृष्ण! उसके बाद फिर आप चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लीजिए। विसर्जन के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर चौकी पर छोड़ें और  उसके बाद कहें : हे भगवान् श्री कृष्ण!,,  तो इन सारी मंत्रों और पूजा विधि के साथ आप जन्माष्टमी त्योहार के दिन भगवान श्री कृष्ण के पूजा कर सकते हैं

Ramadan Festival In Hindi | रमज़ान 2022 का महत्व, निबंध, इतिहास

 [अंतिम विचार, Conclusion]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा Janmashtmi festival पर यह आर्टिकल   बेहद पसंद आया होगा और आप भी इस Janmashtmi festival के लेख की मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको जन्माष्टमी त्योहार Janmashtmi festival के बारे में संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है ढेर सारे लोग ऐसे हैं जो कि जानना चाहते हैं आखिर जन्माष्टमी त्योहार होता क्या है और जन्माष्टमी त्योहार को क्यों मनाया जाता है और जन्माष्टमी त्योहार के मनाने के विधि विधान क्या है तो हम सभी ने मिलकर इन सभी लोगों के लिए ही इस लेख को विस्तार से लिखा था।

दोस्तो इस लेख में हमने काफी रीसर्च करके इन सभी बातों को इतने आसान भाषा में लिखा है कि कोई भी आसानी से इसे समझ सकता है और सारी जानकारी को प्राप्त कर सकता है। और मेरा आप पर संपूर्ण विश्वास है कि आप मेरे इस लेख को ध्यान से पूरा अंत तक पढ़ चुके होंगे और जन्माष्टमी त्योहार से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

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 तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और आपको हमारा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद………

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