नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारा इस लेख में आज हम इस लेख के मदद से Mahashivratri क्या है और Mahashivratri को 2022 में कब मनाया जाएगा के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम समझने भी वाले हैं।

आपको मालूम ही होगा कि जब हमारे नए साल की शुरुआत होती है उसके उसके साथ ही कई सारे त्योहार का आगमन भी हो जाता है और उसी  प्रसिद्ध त्योहारों में से एक त्यौहार है Mahashivratri का पर्व।

क्या आपको मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो इस महाशिवरात्रि पर्व के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं और कुछ लोग थोड़ा बहुत जानते भी हैं तो उनको यह नहीं मालूम होता है कि यह पर्व 2022 में कब पड़ने वाला है और यह पर्व को कैसे मनाया जाता है और इस पर्व का ऐतिहासिक और पौराणिक उदेश्य क्या है।

अगर आप इन सभी लोगों में से एक हैं तो आप बिल्कुल भी ना घबराए हम आपको बता दें कि इस आर्टिकल में हम इस त्यौहार पर चर्चा करने वाले हैं और इस पर्व को पूरे विस्तार से जानने वाले हैं अगर आप को इस पर्व के बारे में संपूर्ण जानकारी चाहिए तो कृपया करके आप हमारे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको हमारा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए

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Mahashivratri क्या है।

Festival of Mahashivratri - Mahashivaratri Festival in India - Abhibus  Community

दोस्तों अगर आप सोच रहे हैं कि Mahashivratri क्या है तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि Mahashivratri यह  भारत के एक मशहूर त्यौहार है।  क्या आपको मालूम है कि एक समय ऐसा भी था कि, हमारे देश के संस्कृति में, एक वर्श में लगभग 365 पर्व हुआ करते थे। अगर हम आपको समझने के लिए सरल शब्दों में कहें तो, ये सभी पर्व साल के प्रति दिन, कोई न कोई उत्सव या त्योहार मनाए जाते थे । ये 365 पर्व कई सारे कारणों से हमारे जीवन के कई सारे उद्देश्यों से भी जुड़े थे।

इन्हें सभी तरह के ऐतिहासिक घटनाओं, और विजय श्री तथा हमारे और आपके जीवन की कुछ चीज़ों की अवस्थाओं जैसे की किसी भी किसान के द्वारा फसल की बुआई, और उसके रोपाई से  कटाई आदि कई  सारे से जोड़ा गया था। क्या आपको मालूम है कि हर परिस्थिति और हर अवस्था के लिए हमारे पास उसके कारण से मनाने वाला एक त्योहार था। मगर मैं आपके जानकारी के लिए बता दु की Mahashivratri का महत्व उन सभी पर्वो से हट कर के सबसे अलग है।

क्या आपको पता है कि Mahashivratri एक कुछ  खास तरह का आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों या ऋषि मुनियों के लिए बहुत ही ज्यादा महत्व रखती है। यह उनके लिए भी एक बहुत महत्वपूर्ण है जो कुछ तरह के पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की लगभग सभी  महत्वाकांक्षाओं में यह मग्न हैं।

क्या आपको पता है कि पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग Mahashivratri को भगवान शिव के विवाह के उत्सव की तरह भी मनाते हैं । वही उसी तरह जो लोग सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न होते है वो Mahashivratri त्योहार को, भगवान शिव जी के द्वारा लगभग अपने सभी के शत्रुओं पर विजय पाने के दिन के रूप में भी कफी जोरो शोरो से मनाते हैं।

परंतु, क्या आपको मालूम है कि साधकों के लिए, यह वह दिन है, इसी दिन वे कैलाश पर्वत के चोटी पर भगवान शिव जी एकात्म हो गए थे ( ऐसा पुराणों मेब भी लिखा गया है )। गाइस वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यहले के यौगिक परंपरा में, भगवान शिव को लगभग सभी देवी देवता की तरह ही पूजा जाता है । उन्हें कई लोग शिव गुरु के रूप से भी माने जाता है, ऐसा पहले गुरु, जिनसे ज्ञान को बेहतर तरह से उत्पन्न किया ।

ध्यान की अनेक ऐतिहासिक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूरे तरह से स्थिर हो गए। वही दिन Mahashivratri का था। उनके भीतर की लगभग सभी तरह की गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए कई सारे साधक का कहना है कि Mahashivratri त्योहार को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।

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Mahashivratri क्यों मनाई जाती है ?

दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर के टॉपिक में जाना कि Mahashivratri क्या है उसी तरह से वह जानने के बाद आपके मन में यह ख्याल जरूर आया होगा कि आखिर Mahashivratri त्यौहार को क्यों मनाया जाता है तो आप बने रहिए हमारे इस टॉपिक के साथ हम इस टॉपिक में इसी पर विचार विमर्श करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को

दोस्तों हर चंद्र के महीने का 14 वा दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन shivratri के नाम से भी जाना जाता है। एक कैलेंडर के शाल में आने वाली सभी Mahashivratriyo में से, इस तरह का Mahashivratri, को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है, जो आमतौर पर फरवरी या मार्च के महीने में आती है। आपको शायद ही मालूम होगा कि इस रात को , ग्रह का उत्तर की वो का गोलार्द्ध कुछ इस प्रकार से अवस्थित होता है कि लगभग सभी मनुष्य के भीतर की कुछ खास तरह का ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और धीरे धीरे जाती है।

यह एक ऐसा दिन होता है, जब वातावरण यानी कि प्रकृति मनुष्य को उसके अंदर की सकारात्मक ऊर्जा को आध्यात्मिक शिखर तक जाने में बहुत ज्यादा मदद करती है। इस समय का उपयोग करने के लिए, हम कुछ इस तरह के परंपरा में, हम एक उत्सव को काफी धूम धाम से मनाते हैं, जो लगभग पूरी रात चलता है।

दोस्तों पूरी रात मनाए जाने वाले इस Mahashivratri त्योहार में इस बात का काफी ज्यादा ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने का पूरा बेहतर तरह से अवसर मिले – क्या आपको पता है कि इस रात को आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए – निरंतर जागते रहते हैं और ऊर्जा का प्राप्त भी करते है। तो कुछ इन्ही सभी कारणों के वाजे से यह Mahashivratri त्योहार मनाया जाता है।

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Mahashivratri का महत्व

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दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर के टॉपिक में जाना कि Mahashivratri क्या है और Mahashivratri  क्यों मनाई जाती है उसी तरह से वह जानने के बाद आपके मन में यह ख्याल जरूर आया होगा कि आखिर Mahashivratri त्यौहार का महत्व क्या है तो आप बने रहिए हमारे इस टॉपिक के साथ हम इस टॉपिक में इसी पर विचार विमर्श करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को ।

क्या आपको पता है कि समय आपके मन की एक छोटी सी घटना है। प्रकाश शाश्वत भी नहीं है, यह सदा से एक किसी तरह का सीमित संभावना है क्योंकि यह धीरे धीरे घट कर समाप्त हो जाती है। और आप सब यह भी जानते हैं कि इस ग्रह पर का सूर्य ही प्रकाश का सबसे बड़ा स्त्रोत है। यहाँ तक कि अगर आप चाहे तो अपने हाथ से सूर्य का प्रकाश को काफी आसानी से रोक कर भी, अंधेरे की कुछ जगह पर परछाईं बना सकते हैं। परंतु आपको मालूम ही होगा कि अंधकार सर्वव्यापी है, और यह यह हर जगह उपस्थित है।

संसार के कुछ तरह के मस्तिष्कों ने सदा अंधकार को एक बड़े और दुराचारी शैतान के रूप में भी इसे चित्रित किया है। पर दोस्तों जब आप अपनी दिव्य शक्ति या कैसल को सर्वव्यापी कहते हैं, तो आप बिल्कुल साफ रूप से इसे अंधकार ही कह रहे होते हैं, क्योंकि आपको मालूम ही होगा कि सिर्फ अंधकार ही सर्वव्यापी है।

यह लगभग हर ओर है। और मैं आपके जानकारी के लिए बता दु की  इसे किसी की भी सहारे की कुछ भी आवश्यकता नहीं है। क्या आपको मालूम है कि  प्रकाश सदा किसी ऐसे स्त्रोत से आता है, जो स्वयं को जला रहा हो चाहे वो किसी भी कारण से । और इसका एक जगह से आरंभ व किसी जगह पर अंत जरूर  होता है। और यह हमेशा किसी सीमित स्त्रोत से आता है।

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दोस्तों क्या आपको मालूम है कि अंधकार का कोई भी स्त्रोत नहीं होता है। यह अपने-आप में एक बहुत बड़ा स्त्रोत है यह लगभग सभी जगहों पर सर्वत्र उपस्थित है। तो जब हम भगवान  शिव का नाम ले कर के शिव कहते हैं, तब हमारा इशारा बिलकुल अस्तित्व की उस असीम देवताओं की ओर होता है।

इसी देवताओं की गोद में सारा सृजन यानी कि संसार भी उसके अंदर होते है। देवताओं  और भ्रमण्ड की इसी गोद को हम शिव भी कहते हैं। हमारे देश यानी कि भारतीय संस्कृति में, लगभग सभी प्राचीन प्रार्थनाएँ केवल आपको बचाने या आपकी बेहतरीन तरह के संदर्भ में ही नहीं है।

सारी  ऐतिहासिक प्राचीन प्रार्थनाएँ यह कहती हैं, “हे ईश्वर, यानी कि हे भगवान मुझे नष्ट कर दो ताकि मैं आपके समान हो जाऊँ।“ इसका मतलब कथाओ के अनुसार यह होता है कि भगवान हमे खत्म कर दो ताकि मैं आप मे समा जाऊ और मेरे में आपका वास् हो।  

तो जब हम Shivratri कहते हैं जो कि महीना का सबसे अंधकारपूर्ण दिन भी होता  है जिसे हम अमस्या के नाम से भी जानते है , तो आपको मैं बता दु की  यह एक ऐसा अवसर होता है कि मनुष्य अपनी सीमितता को  पूरे तरह से विसर्जित कर के, और पूरे संसार के उस बेहतर और असीम स्त्रोत का अनुभव करता है, जो प्रत्येक ब्यक्ती में उसकी इच्छा के रूप में उपस्थित है।

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Mahashivratri का आध्यात्मिक महत्व

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Mahashivratri त्यौहार का महत्व के बारे में जब जान ही रहे थे तो मैंने सोचा कि उन्हें इस Mahashivratri पर्व का आध्यात्मिक महत्व भी आपको बता दिया जाए तो चलिए जान लेते हैं थोड़ी बहुत है इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व के बारे में इसके पीछे की ऐतिहासिक कथाओं को आप छोड़ दें,तो आपको पता चलेगा कि यौगिक परंपराओं में इस दिन का काफी ज्यादा विशेष तरह का महत्व इसलिए यह भी है क्योंकि इसमें आपको आध्यात्मिक साधक के लिए  ऐसी कई तरह की संभावनाएँ भी मौजूद होती हैं।

क्या आपको मालूम है कि आधुनिक विज्ञान में इसके अनेक चरणों से होते हुए, आज उस मुद्दा पर आ गया है, जहाँ उन सभी scientist ने आपको पूर्ण रूप से प्रमाण दे दिया है कि आप जिसे भी जीवन यानी कि लाइफ के रूप में जानते हैं, और आप जिसे पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं,जिसे आप तारामंडल और ब्रह्माण्ड के रूप में जानते हैं; वह सब केवल एक positive or negative और कुछ दोनों का मिस्रत ऊर्जा है, जो स्वयं को हजारो-लाखों-करोड़ों रूपों में  अलग अलग तरह से प्रकट करती है। यह scientist के तथ्य को प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से यह बात सत्य भी है।

क्या आपको मालूम है कि  ‘योगी’ शब्द से तात्पर्य उस मनुष्य से होता है, जिसने  अपने अंदर की अस्तित्व की एकात्मकता को अच्छे से जान लिया है। जब आप सब  कहते है , ‘योग’, तो आप किसी विशेष अभ्यास या तंत्र मंत्र की बात बिलकुल भी नहीं कर रहे होते है । इस असीम के साथ पूरे विस्तार को तथा अस्तित्व में एक अच्छे एकात्म भाव को जानने की लगभग सभी चाह, ही योग है। Mahashivratri की रात, व्यक्ति को इसी का अनुभव पाने का अवसर देती है।

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दोस्तों जैसे कि ऊपर के टॉपिक में हमने आपको बताया कि Mahashivratri क्या है और Mahashivratri त्योहार क्यों मनाया जाता है और हमने उसके बाद Mahashivratri महत्व के बारे में भी कुछ चर्चा किया तो आपके मन में यह खयाल  जरूर आया होगा कि आखिर 2022 में इस त्यौहार को कब मनाया जाएगा ।

तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि Mahashivratri त्योहार भारतीय कैलेंडर और हिंदू कैलेंडर के अनुसार पंडित जी के आधार पर , इस त्योहार को माघ यानी कि (फाल्गुन) के महीने में जब  कृष्ण पक्ष लगता है उसके के दौरान चतुर्दशी  के दीन को Mahashivratri 2022 मनाई जाएगी।

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दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर के सभी टॉपिक में इस त्यौहार से जुड़ी जानकारी को प्राप्त किया और इसके बारे में जाना और समझा तो आपके मन में यह ख्याल जरूर आया होगा कि इस दिन को इतना अंधकार क्यों होता है क्योंकि हमने ऊपर भी इसके बारे में थोड़ा बहुत विचार-विमर्श किया है तो अब हम इस टॉपिक में जानेंगे कि आखिर इस दिन इतना अंधकार क्यों होता है और इस अंधकार का आनंद लोग किस तरह से उठाते हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को

Shivratri माह का सबसे अंधकार पूर्ण दिवस भी होता है। दोस्तों क्या आपको प्रत्येक माह Shivratri का उत्सव तथा Mahashivratri का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो हम किसी अंधकार का त्योहार मना रहे हों।  दोस्तों हमने आपको ऊपर भी अच्छे से बताया था कि जब सूर्य इस दिन ग्रहण की और आगे बढ़ता है तो अब इस दिनों काफी ज्यादा अंधकार छा जाता है मतलब रात में आप सोच सकते हैं कि इतना अंधकार होता है कि लोग इस रात को अंधकार  की तरह इस रात को गुजरते है।

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 लोग गांवों और नगरों और के मिलकर के एक जगह पर इकट्ठा होते हैं जहां पर शिवलिंग होता है और उस शिवलिंग को रात में पूजा भी की जाती है और रात भर तकरीबन हॉकितन यानी लोग शिव का भजन गा कर के  आनंद भी लिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि कई जगह ऐसे भी हैं जहां Mahashivratri के दिन बड़े बड़े मेलों का आयोजन भी किया जाता है और इस दिन लगभग सभी लोग बड़ी धूम-धाम से इस त्योहार को मनाते  हैं।

तो दोस्तों यही कुछ कारण है जिसके वजह से इस दिन इतना अंधकार होता है मगर आपको मालूम ही होगा कि  जहां अंधकार होता है वहां प्रकाश भी जरूर होता है शायद इसीलिए इस दिन शिव के इस पर्व महाशिवरात्रि को लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं क्योंकि हमने ऊपर भी आपको बताया था कि  आज ही के दिन भगवान शिव ने अपने पूरे शत्रुओं पर विजय पाए थे और सभी को नष्ट कर दिया था और इस दिन अपने सकारात्मक और सच्चाई की लहर को पूरे संसार में फैलाया था।

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Mahashivratri  त्योहार को कैसे मनाया जाता है।

हमने जब ऊपर के सभी टॉपिक को जांच करना शुरू किया तो पता लगा कि हमने आपको इस त्यौहार से जुड़ी सभी जानकारी को पूरे विस्तार से बता दिया है मगर इसमें हमारा मेन टॉपिक ही छूट रहा था जो कि इस Mahashivratri  त्योहार को कैसे मनाया जाता है आपके मन में भी यह ख्याल जरूर आया होगा तो आप इस टॉपिक के साथ पूरे अंत तक बने रहिए क्योंकि हम इस टॉपिक में जानने वाले हैं कि आखिर इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस टॉपिक को ।

दोस्तों अगर आपने ऊपर के टॉपिक को पूरे विस्तार से पढ़ा होगा तो आपको मालूम लग चुका होगा कि यह त्यौहार आमतौर पर शिव भगवान का त्यौहार होता है। और जाहिर सी बात है कि जब शिव भगवान का यह त्यौहार है तो शिव भगवान की जरूर पूजा की जाएगी। 

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मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि इस त्यौहार के दिन सबसे पहले लोग शिव की आराधना करके उनकी पूजा करते हैं और शिव की पूजा करने के बाद लोग थोड़े इस पर्व का आनंद भी लेते हैं अब आप सोच रहे होंगे कि इस पर्व का आनंद लोग कैसे लेते हैं तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि कई ऐसे  मशहूर और बड़े बड़े जगहों पर इस दिन बड़े मेला का आयोजन भी किया जाता है और उस मेले में लगभग सभी चीज को उपस्थित भी करवाया जाता है और लोग इसी मेला का आनंद भी लेते है।

और कुछ इस तरह से आनंद लेते हुए इस त्यौहार को दिन में मना लिया जाता है और रहा बात रात को तो रात को हमने आपको बताया था कि काफी ज्यादा अंधेरा होता है तो लोग शिवलिंग के पास टेंट और लाइटिंग लगाकर के गांव के और नगर के सभी लोग मिलकर के शिव का भजन मिलजुलकर गाते हैं और इनकी आराधना करते हैं।

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Mahashivratri पर्व को कैसे पूजा किया जाता  है ?

दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर के टॉपिक में जाना कि इस Mahashivratri पर्व को कब और किस महीने में मनाया जाता है तो आपके मन में यह ख्याल जरूर आया होगा कि आखिर इस Mahashivratri पर्व के दिन पूजा कैसे किया जाता है तो हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि यह यह बहुत महत्वपूर्ण तत्व हैं। हमने आपके लिए कुछ ऐसे ऐतिहासिक और पुरानी परंपराओं को आपको बताया है जिसका आप उपयोग Mahashivratri त्योहार में पूजा को करते समय इन्हें अवश्य किया जाना चाहिए और इन मे प्रत्येक एक विशेष अर्थ का प्रतीक है।

जब आप महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पूजा करने जाएं तो सबसे पहले आप स्नान करके जाएं। और पूजा के सभी सामग्री के साथ एक छोटे लोटे में दूध भी अवश्य ले लें हमारे बताए गए सभी सामग्री को लेने के बाद आपको अब शिवलिंग के पास जाकर के शिवलिंग को दूध और पानी से स्नान करना है। पानी और दूध से शिवलिंग को स्नान कराने के बाद अब आप उस पर बेल के पत्ते चढ़ा कर के शिवलिंग के तीन चार फेरे अवश्य लगाएं।

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अब आपके मन में यह ख्याल जरूर आया होगा कि ऐसा करने से हमें क्या मिलता है दोस्तों मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ऐसा पुराणों और ग्रंथों में लिखा गया है कि इस तरह से शिवलिंग का पूजा करने से हमारी आत्माओं को शांति मिलती है और शुद्धता प्राप्त होती है और ऐसा लोग सदियों से करते आ रहे हैं। और आप पूजा करते समय दीपक को जरूर जलाए ऐसा करने से  ज्ञान और बुद्धिमानी की प्राप्ति भी होती।

और जब आप शिवलिंग के स्नान कराने के बाद बेल के पत्ते को चढ़ा ले उसके बाद उस पर थोड़ा सा सिंदूर अवश्य लगाएं ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। और आप पान का पत्ता भी जरूर चढ़ाए ऐसा करने से यह हमार सांसारिक इच्छाओं से संतुष्टि दर्शाते हैं।

पूजा करते समय चढ़ाए गए फल इच्छाओं और दीर्घायु की पूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

दोस्तों पूजा के अंत में आप अगरबत्ती जरूर जलाएं क्योंकि ऐसा करने से धन का प्रतीक भी माना गया है ऐसा ऐतिहासिक पुराणों और ग्रंथों में लिखा गया है।

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[ Conclusion,निष्कर्ष ]

मित्रों हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह लेख  पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से  Mahashivratri त्यौहार  के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे दोस्तों हम लोगों ने पूरा प्रयास किया है कि आपको Mahashivratri त्यौहार से जुड़ी सारी बातें समझाएं  इसलिए इस आर्टिकल में हमने बताया है कि Mahashivratri  क्या है और Mahashivratri कैसे मनाया जाता है।

इसके अलावा हम लोग यह भी जाने हैं कि Mahashivratri त्यौहार कब मनाया जाता है।  दोस्तों यह सब जानने के बाद हमें उम्मीद है कि आप को Mahashivratri के बारे में सारी जानकारी मिल गई होगी तो दोस्तों अगर आपको इस लेख की मदद से  कोई भी जानकारी प्राप्त हुआ है तो आप हमारे इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के पास  शेयर जरूर करें जिन लोगों को Mahashivratri त्यौहार के बारे में कुछ भी पता नहीं है ।

लेकिन दोस्तों अगर आपको हमारा यह लेख को पढ़ने में कोई भी दिक्कत या कोई भी परेशानी हुई है तो आप हमारे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं  हमारी टीम आपकी कमेंट को पड़ेगी और  हो सके तो आपको वापस  से समझाने की  प्रयास करेगी…  दोस्तों आपको हमारा यह लेख पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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