नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपको हमारा इस लेख में हम आज के इस लेख के मदद से Makar sankranti क्या है और Makar sankranti को कैसे मनाया जाता है के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम समझने भी वाले हैं।

आपको तो मालूम ही होगा कि हमारे देश भारत में कई सारे पर्व आते रहते हैं और उसी पर्व में से एक है Makar sankranti पर्व। क्या आपको मालूम है कि यह त्यौहार जनवरी महीने में ही पड़ता है और इसको काफी धूमधाम से मनाया जाता है। अगर आपको Makar sankranti के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है और अगर आप Makar sankranti के बारे में थोड़ी बहुत जानते हैं पर आपको यह मालूम नहीं है कि Makar sankranti त्यौहार को कैसे मनाया जाता है। 

तो आप बिल्कुल भी ना घबराए हम इस लेख में इसी पर विचार विमर्श करने वाले है। हमने इस लेख में विस्तार से बताया है कि Makar sankranti क्या है और Makar sankranti को कैसे मनाया जाता है और Makar sankranti क्यों मनाया जाता है।

अगर आप सच में इस Makar sankranti त्यौहार के बारे में पूरा विस्तार से जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो आप कृपया करके हमारे लेट के साथ पूरे अंत तक बने रहे तभी आपको हमारा या लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।

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Makar sankranti क्या है ?

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अगर आप Makar sankranti के बारे में जानना चाहते है कि Makar sankranti क्या है तो मैं आपके जानकारी के लिए बता दु की Makar sankranti एक त्योहार है। अगर हम ज्योतिष के अनुसार इस Makar sankranti त्योहार को देखे तो इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में  शुरू से प्रवेश करता है। क्या आपको पता है कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को ही हम Makar sankranti कहते हैं।

Makar sankranti में ‘मकर’ शब्द मकर राशि को इंगित यानी दर्शाता है, और उसी तरह से ‘संक्रांति’ शब्द का अर्थ संक्रमण यानी कि प्रवेश करना होता है। क्योंकि दोस्तों जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इसलिए इस समय को ही ‘ Makar sankranti ’ कहा जाता है ।

Makar sankranti त्यौहार को कहीं-कहीं अलग अलग जगहों तो उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है। क्या आपको पता है कि इस दिन ढेर सारे लोग  गंगा नदी में स्नान कर के व्रत भी करते है, दान भी करते है , पंडित जी से कथा भी करवाते है और भगवान सूर्यदेव की उपासना करके व्रत भी करते है ऐसा करने का विशेष महत्त्व भी होता है।

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क्या आपको पता है कि जब सूर्यदेव अपने पुत्र यानी कि शनि की राशि जिसका नाम ( मकर ) में जब प्रवेश करते है, तब उसे ‘Makar sankranti’ ही कहा जाता है। जब सूर्य की गति उनके पहले के गति से उत्तरायण होती है, तो इसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि उस समय से सूर्य की चमकीली किरणों के अंदर से अमृत की बरसात होने लगती है। दोस्तों यह  हर वर्ष इसे जनवरी के महीने में मनाया जाता है। 

इसकी मान्यता यह है, कि इस दिन यमुना-सरस्वती-गंगा के संगम धारा में से सभी देवी-देवता और भगवान अपना स्वरूप बदलकर इनकी संगम धारा में स्नान करने आते है। इसलिए इस अवसर पर कई सारे लोग गंगा स्नान व दान-पुण्य के उद्देश्य से गंगा नदी के घाट पर जाते है।

इस Makar sankranti के त्यौहार का निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार से ही होता है और क्या आप जानते है कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के कारण ही इस त्योहार ‘Makar sankranti’ को पुराणों में ‘देवदान त्योहार’ के नाम से इसकव दर्जा भी दिया गया  है।

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Makar sankranti क्यो मनाया जाता है?

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Makar sankranti किसानों के लिए बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण त्योहार होता है, इसी दिन लगभग सभी किसान अपनी फसल को थोड़ा बहुत जरूर काटते है। Makar sankranti हमारे देश भारत का सिर्फ एक ऐसा त्यौहार है जो हर साल महीना जानवरी तारिक 14 या 15  को ही यह त्योहार मनाया जाता है।  Makar sankranti का पर्व पौष महीना के शुक्ल पक्ष में ही इसे मनाया जाता है।

हमने आपको ऊपर भी बताया था कि इस दिन सूर्य धनु राशि से हो कर के मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण यानी कि (उत्तर की और तेज़ गति से चलना) हो जाता है।

कई सारे शास्त्रों में उत्तारायण की अवधि को देवी-देवताओं यानी कि भगवान का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की पूरे रात के रूप में भी इसे माना गया है। क्या आप जानते है कि Makar sankranti के दिन तप, जप, स्नान, दान, श्राद्ध तथा उपासना और  अनुष्ठान आदि का बहुत अत्यधिक महत्व भी माना गया है क्योंकि हमने आपको ऊपर भी बताया था कि ( इस दिन यमुना-सरस्वती-गंगा के संगम धारा में से सभी देवी-देवता और भगवान अपना स्वरूप बदलकर इनकी संगम धारा में स्नान करने आते है ) । 

शास्त्रों के अनुसार इस अवसर पर किया गया किसी भी चीज़ का दान, जो दान करता है उसे सौ गुना होकर प्राप्त होता है। क्या आपको पता है कि Makar sankranti के दिन घी और कंबल के दान का भी विशेष महत्व होता है यह बात पहले के ऋषि मुनि का कहना है। दोस्तों इस Makar sankranti त्योहार का संबंध केवल धर्मिक पुराणों और ग्रंथो से ही नहीं बल्कि इसका संबंध हमारे पर्यावरण मौसम परिवर्तन और कृषि से भी है। क्या आपको पहले पता था कि इस दिन का ( दिन एंव रात ) दोनों बराबर होते है।

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Makar Sankranti का वैज्ञानिक महत्व (Scientific Significance Of Makar Sankranti in hindi )

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हमने ऊपर के टॉपिक में जाना कि Makar sankranti क्या है और उसके बाद जाना कि इस Makar sankranti त्यौहार को क्यों मनाया जाता है तो अब हम इस टॉपिक में जानने वाले हैं कि Makar sankranti का सेंटिफिक रूप से इसका क्या महत्व है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुवे

ऐसा भी कहा जाता है, कि जब सूर्य मकर राशि में पूरे तरह से प्रवेश करता है तब जा कर के Makar sankranti का योग बनता है, क्या आपको पता है कि इसके अलावा भी इसमे कई सारे अलग अलग बदलाव आते हैं।

और Makar sankranti का संबंध केवल धर्म पुराण और ग्रंथो से ही नहीं है बल्कि इसका संबंध अन्य कई सारे चीजों से है भी जुड़ा होता है, जिसमें वैज्ञानिक के भी बहुत तरह से जुड़ाव के साथ-साथ कृषि के भी बहुत सारे तरह तरह के जुड़ाव रहता है। आपको मालूम ही होगा कि सूर्य को सभी ग्रहों का भगवान भी माना जाता है।

सूर्य सभी लगभग 12 राशियों को अकेले ही प्रभावित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते है कि मकर और कर्क राशियों में सूर्य का प्रवेश काफी फायदेमंद माना जाता है। आपके जानकारी के लिए मैं बता दु की प्राचीनकाल से ही Makar sankranti के दिन को काफी शुभ माना जाता है। इस दिन से सभी शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।

Makar sankranti के वैज्ञानिक महत्व की बारे में बात करें तो इस अवधि में सभी नदियों और झरनों और तालाब में एक खास तरह का वाष्पन क्रिया होती है। क्या आपको पता है कि इस क्रिया को अनेक तरह के बीमारियों और रोगों और हमारी शरीर की नकारात्मक ऊर्जा यानी कि negative energy को दूर करने में बहुत ही सहायक माना जाता है।

इस बात को पुराण में लिखा गया है कि इस दिन नदियों में स्नान आदि करने से हमारी शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा यानी कि positive energy भी मिलती है इसी लिए आपको इस दिन नदियों में स्नान करने के लिए बोला जाता है , ताकि आप अपने शारीरिक के रोगों से दूर रहे अथवा आपके शारीरिक रूप से आपकी दुर्बलता को जड़ से समाप्त हो जाये।

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दोस्तों जैसे कि हमने आपको ऊपर भी बताया था कि Makar sankranti प्रति शाल  जनवरी के महीने में तारिक 14 या 15  को ही मनाया जाता है। इस साल Makar sankranti तारिक 14 महीना जनवरी को ही मनाई जाएगी।

और अगर हम बात करे इसकी शुभ मुहूर्त की तो यह पुण्य काल के लिए बेहतर शुभ मुहूर्त दोपहर के लगभग 02:43 PM  बजे से  ले कर के 05:45 PM बजे तक है, अगर हम इसीकी कुल बीच की समय निकले तो लगभग 3 घंटे और 02 मिनिट हो रहे है।

इसके अलावा अगर हम इसके महा पूण्य काल के शुभ मुहूर्त  के बारे में बात करे तो यह दोपहर 02:43 PM बजे से ले कर के 04:28 PM बजे तक के बीच है अगर हम इसीकी कुल बीच की समय निकले तो लगभग 1 घंटे 45 मिनिट के लिए यह  पूण्य काल के शुभ मुहूर्त है।

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Makar Sankranti पूजा से होने वाले लाभ (Makar Sankranti Puja Benefits)

अगर हम Makar Sankranti पूजा के लाभ के बारे में बात करे तो इससे ब्रह्मांडीय बुद्धि और चेतन के कई तरह के स्तरों तक काफी बढ़ जाती है, इसलिए Makar Sankranti का पूजा करते हुए आप उच्च चेतना के लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

यदि आप Makar Sankranti की पूजा करते है तो आपके शारिर के अंदर अध्यात्मिक भावना भी बढ़ाती है और आपके शरीर को पहले के अपेक्षा शुद्ध करती है।

आपको शायद ही मालूम होगा कि इस अवधि के दौरान किये गए लगभग सभी कामों में  आपको सफल परिणाम भी प्राप्त होते है।

समाज में अच्छे से धर्म और आध्यात्मिकता को पूरे विस्तार से फ़ैलाने का यह मेरे हिसब से बेहतर धार्मिक समय होता है।

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Makar Sankranti को मनाने का तरीका (Makar Sankranti celebration in hindi )

हमारे बताए गए Makar Sankranti त्योहार के सभी जानकारी को प्राप्त करने के बाद आपके मन में अब यह सवाल जरूर मचल रहा होगा कि इस Makar Sankranti त्योहार को कैसे मनाया जाता है और इस Makar Sankranti पर्व को हम कैसे मना सकते हैं तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस टॉपिक को हमने इस टॉपिक पर उसी पर विचार विमर्श किया है।

Makar Sankranti के शुभ मुहूर्त में गंगा नदी में स्नान, व पूण्य, दान का काफी विशेष महत्व है। क्या आपको पता है कि इस दिन कई सारे लोग गुड़ व तिल लगाकर किसी आस पास के पावन नदी में स्नान करते है।

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इसके बाद भगवान् सूर्य देव की ओर जल अर्पित करने के बाद थोड़ी देर मन में उनकी जाप करने के बाद उनका पूजा की जाती हैं और उनसे अपने आगे के अच्छे भविष्य के लिए निवेदन या कह सकते है कि प्रार्थना की जाती है। इसके पश्चात् गुड़, फल, तिल, कम्बल, आदि का दान किसी ब्राह्मण को किया जाता है। इस दिन कई सारे जगह पर  ढेर सारे लोग पतंग बाजी भी करते है और इस त्योहार का आनंद लेते है।

साथ ही इस दिन को तीली से बने स्वादिष्ट व्यंजन जैसे कि तिलकुट, तिलई, और आदि का सेवन किया जाता है। क्या आपको मालूम है कि इस दिन कई सारे लोग खिचड़ी बनाकर के सूर्यदेव भगवान को भोग लगाते हैं, और उस खिचड़ी का दान तो विशेष रूप से करते ही है और इसका प्रशाद भी बाटते है ।

जिस कारण यह त्योहार को ढेर सारे जगहों खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा इस दिन को अलग अलग शहरो और राज्यो  में अपने हिसाब से अलग अलग तौर तरीकों से मनाया जाता है और इस दिन कई सारे किसान भाई के द्वारा उनका फसल भी काटी जाती हैं। 

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भारत में Makar Sankranti त्यौहार और संस्कृति (Makar Sankranti in Different Parts of India)

भारत देश में Makar Sankranti हर अलग अलग जगहों में बहुत उत्साह और खुशी से यह त्योहार मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इसे सभी अलग अलग जगह पर इसका अलग नाम और कुछ अलग परंपरा से भी मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश :  अगर हम बात करे उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार की तो इन दोनों जगहों पर इस Makar Sankranti त्योहार को खिचड़ी का पर्व भी कहते है। इस दिन में लोग  पवित्र नदियों जैसे कि गंगा में डुबकी लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। 

इस अवसर में ही प्रयाग यानि की इलाहाबाद में एक बड़ा और भीषण माघ मेला भी शुरू होता है जो कि तकरीबन एक महीने तक चलता हौ यह मेला। क्या आपको मालूम है कि त्रिवेणी के अलावा, भी  उत्तर प्रदेश के हरिद्वार पर  मुक्तेश्वर गढ़ और बिहार में पटना जैसे कई सारे पावन जगहों पर भी कई सारे लोग धार्मिक स्नान करने जाते  हैं।

पश्चिम बंगाल :  बंगाल राज्य में हर साल  गंगा सागर  के किनारे एक बहुत बड़ा मेला का आयोजन किया जाता है और वहां माना जाता है कि राजा भागीरथ के साठ हजार पूर्वजों को  त्याग दिया गया था। और गंगा नदी के नीचे के किनारे क्षेत्र में डुबकी लगाई गई था। इस मेला में देश-विदेश में बहुत सारे तीर्थ यात्री भाग लेते हैं। और इस मेला को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आया करते हैं। यह मेला काफी धूमधाम से मनाया जाता है और यहां पर काफी ज्यादा भीड़ लगता है। 

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तमिलनाडु : तमिलनाडु में इस Makar Sankranti पर्व को पोंगल त्यौहार के नाम से  मनाया जाता है, जोकि  किसानों का फसल  कटनी का टाइम होता है  इस पर के समय हर किसान  अपने खेतों में फसल काटते है इन दिनों में इस पर्व की शुरुआत होती है और इस पर्व  को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। 

आंध्रप्रदेश : कर्नाटक और आंधप्रदेश में Makar Sankranti पर्व को मकर संक्रमामा नाम से  मनाया जाता है. जिसे यहाँ 3 दिन का त्यौहार पोंगल के रूप में मनाते हैं. यह आंध्रप्रदेश के लोगों के लिए  एक बहुत बड़ा पर्व होता है. तेलुगू मे इस Makar Sankranti पर्व को  ‘पेंडा पाँदुगा’ कहते है जिसका मतलब या अर्थ होता है, बहुत बड़ा उत्सव, कर्नाटक  यह  त्यौहार में  पतंग उड़ाई जाते हैं और मिठाई भी खाया जाता है। 

गुजरात और राजस्थान : इस Makar Sankranti  पर्व को गुजरात और राजस्थान राज्य  में उत्तरायण नाम से मनाया जाता है. इस दिन गुजरात में पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता रखी जाती है,  जिसमें बहुत सारे लोग भाग लेते हैं और सभी लोग इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाते हैं और साथ ही साथ  सभी लोग मिल जुल कर पतंग उड़ाते हैं। और इस Makar Sankranti पर्व के दौरान गुजरात और राजस्थान मे 2 दिन का राष्ट्रीय अवकाश भी होता है। 

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बुंदेलखंड :  इस पर्व को बुंदेलखंड में विशेष कर मध्यप्रदेश राज्य  में Makar Sankranti के पर्व को सकरात नाम से जाना जाता है. यह त्यौहार मध्यप्रदेश  राज्य के साथ ही अन्य राज्य में भी मनाया जाता है उनमें से  कुछ राज्य हैं जैसे बिहार, झारखंड, सिक्किम, और छत्तीसगढ़,  इत्यादि इन सारे राज्यों में इस पर्व को काफी धूमधाम से मनाया जाता है और इस पर्व के दिन  मिठाइयों के साथ  इस पर्व को मनाया जाता है और पतंग भी उड़ाई जाता है  और साथ ही साथ इस दिन घर-घर अलग-अलग पकवान पकाए जाते हैं।

महाराष्ट्र : Makar Sankranti के दिनों में महाराष्ट्र राज्य में गुड़ और तिल से बने स्वादिष्ट व्यंजन का अपने लोगो को आदान प्रदान किया जाता है, लोग तिल के लड्डू या तिलकुट, या तिलई देते हुए एक – दूसरे से “ गोड गोड बोला , टिल-गुल घ्या,” भी बोलते है। क्या आपको मालूम है कि यह महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए काफी विशेष और शुभ दिन होता है। जब विवाहित महिलाएं “ कुमकुम हल्दी ” से उनका नाम  लिख कर  लगभग सभी मेहमानों को  आमंत्रित करती है और उन्हें भेंट में कुछ  अच्छे तरह का बर्तन देती हैं।

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केरल : केरल में इस दिन लोग बड़े त्यौहार के रूप में इसे लगभग 30 से 40 दिनों तक का काफी बेहतर अनुष्ठान करते है, जोकि सबरीमाला में पूरे तरह से समाप्त होता है.

उड़ीसा : हमारे देश भारत ऐसे आदिवासी मगही नाम से के दिन अपने नए साल की शुरुआत बहु करते हैं। सभी एक साथ मिल झूल कर नृत्य और एक साथ मिल कर भोजन भी करते है। उड़ीसा के जितने भी भूया आदिवासियों है उन में उनके माघ यात्रा भी शामिल है, जिसमे घरों में बनी बेहतर तरह के वस्तुओं को बिक्री करने के लिए भी रखा जाता है।

हरियाणा : क्या आपको मालूम है कि Makar Sankranti त्योहार को हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में यह मगही के नाम से भी मनाया जाता है।

पंजाब : पंजाब में इस Makar Sankranti त्योहार को लोहड़ी नाम से भी मनाया जाता है, जो की लगभग सभी पंजाबी के लिए बहुत ज्यदा महत्व रखता है, इस दिन से सभी किसान अपनी फसल को काटना शुरू करते है और उसकी पूजा भी करते है।

असम : असम में Makar Sankranti त्योहार को माघ बिहू नाम से  गाँव में मनाया जाता है।

कश्मीर : कश्मीर Makar Sankranti त्योहार को  शिशुर सेंक्रांत के नाम से जानते है।

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 [ Conclusion,निष्कर्ष ]

मित्रों हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह लेख  पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से  Makar Sankranti त्यौहार  के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे दोस्तों हम लोगों ने पूरा प्रयास किया है कि आपको Makar Sankranti त्यौहार से जुड़ी सारी बातें समझाएं  इसलिए इस आर्टिकल में हमने बताया है कि मकर संक्रांति  क्या है और Makar Sankranti कैसे मनाया जाता है।

इसके अलावा हम लोग यह भी जाने हैं कि Makar Sankranti त्यौहार कब मनाया जाता है।  दोस्तों यह सब जानने के बाद हमें उम्मीद है कि आप को मकर संक्रांति के बारे में सारी जानकारी मिल गई होगी तो दोस्तों अगर आपको इस लेख की मदद से  कोई भी जानकारी प्राप्त हुआ है तो आप हमारे इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के पास  शेयर जरूर करें जिन लोगों को Makar Sankranti त्यौहार के बारे में कुछ भी पता नहीं है ।

लेकिन दोस्तों अगर आपको हमारा यह लेख को पढ़ने में कोई भी दिक्कत या कोई भी परेशानी हुई है तो आप हमारे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं  हमारी टीम आपकी कमेंट को पड़ेगी और  हो सके तो आपको वापस  से समझाने की  प्रयास करेगी…  दोस्तों आपको हमारा यह लेख पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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