नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आज के इस आर्टिकल के मदद से हम Rath Yatra क्या है और Rath Yatra कैसे मनाया जाता है के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में जानने भी वाले हैं।

आपको मालूम ही होगा कि हमारे देश भारत में कई सारे त्योहार दिन पर दिन आते रहते हैं और जाते रहते हैं और उन त्योहारों में से एक त्यौहार रथ यात्रा भी है। मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि Rath Yatra एक ऐसा अनोखा त्योहार है।

जो कि बाकी त्योहारों से काफी हटकर मनाया जाता है क्योंकि आपने देखा होगा कि लगभग सभी हिंदू धर्म के पर्व को घर पर या मंदिर में पूजा पाठ करके मनाया जाता है मगर इस त्योहार को सभी लोग एक जगह पर इकट्ठा होकर के रोड पर रथ को खींचकर मनाते हैं। मगर आज भी कई सारे लोग ऐसे हैं जो रथ यात्रा के बारे में जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें यह भी नहीं मालूम होता है कि आखिर रथ यात्रा होता क्या है। 

रथयात्रा को कैसे मनाया जाता है और रथयात्रा के पीछे क्या इतिहास रहा है और रथ यात्रा को मनाने का उद्देश्य क्या है। इन सभी लोगों की इस सवाल का जवाब देने के लिए हम लोगों ने इस लेख को लिखा है और इस लेख में रथयात्रा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी को पूरे विस्तार से स्टेप बाय स्टेप करके बताया है।

अगर आपको सच में रथयात्रा से जुड़ी जानकारी को प्राप्त करना है तो कृपया करके आप हमारे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको हमारा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए

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Rath Yatra क्या है ? 

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दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल चल रहा है कि आखिर Rath Yatra क्या है तो आप बिल्कुल भी ना घबराए क्योंकि हम इस टॉपिक में इसी के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले हैं और आप Rath Yatra को जानने के लिए हमारे इस टोपीक के साथ बने रहे तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को।

Rath Yatra यह एक ऐसा पर्व है जिसे मुख्यतः हिन्दू धर्म के ढेर सारे लोगो के द्वारा हर शाल में एक बार काफी धूम धाम से मनाया जाता है। यह पर्व या कहे की त्योहार बाकी हिन्दू त्योहार से थोड़ा बहुत अलग तरह से  माना जाता है क्योंकि यदि आप हिन्दू होंगे तो मालूम ही होगा कि बाकी हिन्दू पर्व मुख्यतः अपने घरों अथवा मंदिरों में पूजा पाठ या किसी तरह का व्रत रखकर मनाया जाता हैं। 

मगर यह त्योहार उन सभी त्योहार से अलग है क्योंकि इस पर्व को सभी लोग एक जगह पर इकट्ठे होकर इसे मानते मनाते है। इस पर्व में लगभग पुरी शहर में rath Yatra निकाला जाता है और इसे मनाया जाता है। इस पर्व को लगभग 8 से 10 दिनों तक बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।

यह शहर भारत के उड़ीसा राज्य में भी स्थित है जिसे  श्रीक्षेत्र,शंख क्षेत्र, पुरूषोत्तम पुरी इत्यादि के नामों से भी जाना जाता है । इस शहर के लोग काफी प्रसिद्ध देवता भगवान श्री जगन्नाथ ( Jagarnnath ) को ही मानते हैं और पुरूषोत्तम पुरी को भगवान जगन्नाथ ( Jagarnnath ) जी की मुख्य लीला भूमि भी माना जाता है। यह आमतौर पर यहां का मुख्य पर्व भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ही है।

Rath Yatra पर्व बड़ी ही धूम धाम के साथ और काफी आनंद के साथ भी मनाया जाता है। Rath Yatra के दर्शन लाभ के लिए देश विदेश से लाखों के कदात में भक्त आते हैं।

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दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर के टॉपिक में आपको बताया कि Rath Yatra क्या होता है तो यह जानने के बाद जाहिर सी बात है कि आपके दिमाग में ख्याल जरूर चल रहा होगा कि आखिर Rath Yatra को क्यों मनाया जाता है तो दोस्तों आप हमारे इस topic के साथ बने रहिए हम इस टॉपिक में इसी पर विचार विमर्श करने वाले हैं और आपको बताने वाले हैं कि Rath Yatra क्यों मनाई जाती है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को

हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि Hindu पंचाग अनुसार आषाढ़ के महीने के लगभग शुक्ल पक्ष की दूसरे तिथि को Rath Yatra का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार की उत्पत्ति को लेकर कई सारी ऐतहासिक और पौराणिक मान्यताएं तथा कथाएं  और ढेर सारे कहानी भी प्रचलित है। गाइस एक कहानी के अनुसार अगर हम इसके बारे में समझे तो राजा इंद्रद्युम्न अपने पूरे परिवार सहित नीलांचल सागर यानी कि वो अभी उसे (वर्तमान में उड़ीसा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है ) वो इसी के पास रहते थे।

एक बार की बात है कि समुद्र में उन्हें एक बहुत बड़ी लकड़ी तैरती हुई नजर आई । फिर यह खबर राजा के पास पहुची तो राजा ने उस बड़ी लकड़ी को समुद्र से बाहर निकलवाया और  वो लकड़ी वाकई में काफी बड़ी और सुंदर भी थी तो राजा ने उस की सुंदरता देखकर एक बेहतर तरह का  विचार किया की इस विशाल लकड़ी से जगदीश की बड़ी और खूबसूरत मूर्ति बनायी जाएगी। वह इस बात पर  थोड़ा बहुत विचार ही कर रहे थे कि तभी वहां एक बूढ़े और कमजोर बढ़ई के रुप में देवों के शिल्पी यानी कि भगवान विश्वकर्मा प्रकट हो गये।

भगवान जगदीश की बड़ी और खूबसूरत मूर्ति बनाने के लिए बूढ़े बढ़ई के रूप में वहाँ पर प्रकट हुए विश्वकर्मा जी ने  कहा कि मैं ये काम कर सकता हु मैने कई तरह के विशाल और खूबसूरत मूर्तियों को बनाया है फिर राजा ने उस बूढ़े से मूर्ति बनाने की कीमत की बारे के बात करी तब उसने कीमत के बारे में बात नही किया लेकिन उस बढ़ई ने राजा से एक शर्त रखी और राजा से बोला कि मैं जबतक कमरे में उस लकड़ी की मूर्ति बनाऊंगा तब तक उस कमरे में कोई नही आएगा ।

राजा ने उनकी इस शर्त को बिना किसी दिक्कत की मान लिया। दोस्तों आज के समय में जहा पर  भगवान श्रीजगन्नाथ जी का मंदिर है,  ठीक उसी जगह पर वह बूढ़ा बढ़ई मूर्ति निर्माण के काम में लग गया।

यह काफी मजेदार की बात थी कि राजा और उसके पूरे परिवार वालो को यह बिलकुल भी मालूम नही था कि बूढ़े बढ़ई के रूप में यह स्वंय भगवान विश्वकर्मा जी है तो लगभग कई दिन बीत जाने के पश्चात राजा के पत्नी यानी कि महारानी को ऐसा लगने लगा कि कही वह मूर्ति बनाने वाला बूढ़ा बढ़ई अपने कमरे में इतने दिनों तक भूखे प्यासे रहने के कारण  काही वो मर तो नही गया। 

महारानी अपनी इस शंका को ले कर के अपने महाराजा से भी इस बात को बताया और फिर महाराजा ने इस बात पर गौर किया और उसने यह आदेश दिया कि उस बढ़ई के कमरे को खुलवाया जाए।

फिर महाराजा के आदेश का पालन करते हुवे उस कमरे का दरवाजा खोला गया और उस कमरे में बूढ़ा बढ़ई को ढूंढा गया तो पता चला कि वह बूढ़ा बढ़ई वहाँ पर है ही नही उसको उस पर कमरे  के अंदर ढूंढने पर वह कही नही मिला, लेकिन उसके द्वारा बेहतर तरह की बनाई हुई  सुभद्रा तथा बलराम,श्री जगन्नाथ, की मूर्तिया वहां पर काफी आकर्षक रूप से मौजूद मिली।

और उस घटना से माहराजा और महारानी काफी दुखी हो उठे। लेकिन उसी कमरे के अंदर कुछ समय बिलकुल चमात्कारित रुप से वहां एक आकाशवाणी हुई कि और ऊपर से आवज आई कि ‘व्यर्थ दु:खी मत हो, हम अब इसी रूप में रहना चाहते हैं और इन सभी मूर्तियों को द्रव्य आदि से पूजा करा कर पूरे तरह से पवित्र कर इन्हें आप किसी जगह पर स्थापित करवा दे ।

दोस्तों आज भी वही सारी अर्धनिर्मित मूर्तियां जगन्नाथपुरी जगह पर मंदिर में पहले के ही तरह विराजमान हैं। जिनकी आज भी सभी भक्त इतनी श्रद्धा और ममता से पूजा-अर्चना करते हैं और यही सभी मूर्तियां को रथ यात्रा में भी शामिल होती हैं।

दोस्तों क्या आपको मालूम है कि Rath yatra माता सुभद्रा के द्वारिका घूमने की इच्छा को अच्छे से पूरा करने के उद्देश्य से  बलराम और श्रीकृष्ण ने अलग रथों में बैठकर ही Rath yatra करवाई थी। माता सुभद्रा की नगर को घूमने की स्मृति में ही रथयात्रा का ही यह कार्यक्रम हरवर्ष पुरी में इतने धूम-धाम  और खुशी के साथ ही इसे आयोजित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस रथ यात्रा में हिस्सा लेकर रथ खिचने वाले सभी श्रद्धालु और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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Rath Yatra का पर्व मनाने की शुरुआत के दिनों में जगन्नाथ पुरी से ही हुई है। इसके बाद यह पर्व लगभग पूरे भारत भर में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाने लगा है । जगन्नाथ Rath Yatra आरंभ होने की शुरुआत में पुराने जवाने के राजाओं के वशंज और उनके पारंपरिक और पौराणिक ढंग से सोने के हत्थे के बने झाड़ू से वो लोग भगवान श्री जगन्नाथ के रथ के सामने उनके आगे झाड़ु लगाते हैं और इसके बाद ऋषि मुनियों के मंत्रोच्चार के साथ ही उनके Rath Yatra की शुरु होती थी।

Rath Yatra के शुरु होने के साथ ही कई सारे तरह तरह के पारंपरिक वाद्ययंत्र और बाजे भी बजाये जाते हैं और इसकी ध्वनि के बीच सैकड़ो के कदात में भक्त लोग मोटे-मोटे रस्सों के सहारे वो रथ को खींचते है।

इस Rath Yatra में सबसे आगे बलभद्र यानी की बलराम जी का रथ होता है और इस रथ को लोग आगे घीचते है । इसके थोड़ी दूरी के बाद माता सुभद्रा जी का रथ भी चलना शुरु होती है इस रथ को बलिराम जी के रथ के पीछे रखा जाता है । और दोस्तों उस Rath Yatra के सबसे अंत में लोग भगवान श्री जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक ढेर सारे भक्त मिलकर खींचते है। Rath Yatra को लेकर यह भी एक मान्यता है कि इस दिन रथ को खींचने में सहयोग करने से उन सभी भक्तों को मोक्ष और शांति की प्राप्ति होती है।

यही कारण इस दिन भक्त माता सुभद्रा जी, भगवान बलभद्र, और भगवान जगन्नाथ का Rath Yatra में रथ खींचने के लिए ललायित रहते हैं। भगवान जगन्नाथ जी की यह Rath Yatra गुंदेचा मंदिर पहुंचकर पूरी होती है। यह वही स्थान है जहा विश्वकर्मा जी ने तीनों देव मूर्तियों का निर्माण किया था उन्हें बनाया था ।

दोस्तों क्या आपको मालूम है कि इस जगह को भगवान की मौसी का घर भी माना जाता है। क्या आपको मालूम है कि यदि सूर्यास्त तक कोई भी रथ गुंदेचा मंदिर तक नहीं पहुंच पाता है तो वह अगले दिन उस पूरे यात्रा को पूरी करता है। ऐसा भी माना जाता है इस स्थान पर भगवान एक सप्ताह तक प्रवास करते हैं और यहीं उनकी पूजा-पढ़ भी की जाती है। गाइस आषाढ़ के शुक्ल के दशमी को भगवान श्री जगन्नाथ जी की वापसी Rath Yatra को भी शुरु होती है। इस Rath Yatra को बहुड़ा यात्रा भी कहते हैं।

उस दिन शाम से पूर्व ही उन तानो रथ को जगन्नाथ मंदिर तक भी पहुंच जाते हैं। जहां एक दिन तक उन सभी मूर्तियों के भक्तों के दर्शन के लिए रथ में ही रखी जाती है। अगले दिन फिर से मंत्रोच्चारण के साथ देव प्रतिमाओं को पुनः मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है और इसी के साथ Rath Yatra का यह पूर्ण कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। इस पर्व के दौरान देश भर के कई जगहों पर विशाल मेलों का भी आयोजन किया जाता है।

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रथ यात्रा की आधुनिक परंपरा (Modern Tradition of Rath Yatra in Hindi )

Rath Yatra का यह त्योहार काफी प्राचीन और ऐतिहासिक भी है और इसे काफी समय से लगभग पूरे भारत भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह सदा से ही लोगो की श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक रहा है, यहीं कारण है कि इस दिन कफ भारी संख्या में श्रद्धालु और भक्त भगवान श्री जगन्नाथ जी का Rath Yatra में रथ को खींचने के लिए बहुत दूर-दूर से राज्य उड़ीसा के पुरी जगह में आते है।

आपको तो मालूम ही होगा कि पहले के समय में यातायात की संसाधनों की काफी कमी के कारण आमतौर पर ज्यादेतर जो दूर-दराज के श्रद्धालु और भक्त थे वे इस Rath Yatra के इस पावन त्योहार पर नही पहुंच पाते थे। लेकिन आपको मालूम ही होगा कि अब वर्तमान में Technology के विकास ने इसके स्वरुप को भी बहुत भव्य बना दिया है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इसके कारण कई सारी यातायात दुर्घटनाएं भी देखने को मिल जाती है क्योंकि अब यात्रा के बेहतरीन साधनों के कारण पुरी तक पहुंचना पहले के अपेक्षा काफी आसान हो गया है।

जिससे इस त्योहार के अवसर पर काफी भारी संख्या में श्रद्धालु और भक्त आने लगे है और पहले के अपेक्षा अब अत्यधिक भीड़ में Rath Yatra के  दौरान रथ के रस्सी के पकड़ने के चक्कर में कई सारे श्रद्धालु और भक्त भी घायल हो जाते हैं, और इस लाखो के भीड़ में कुचल दिये जाते हैं।

आपको जान कर हैरानी होगी कि कई बार तो इस Rath Yatra के भगदड़ की स्थिति मचने पर कई श्रद्धालु और भक्त की मृत्यु भी हो जाती है। इस तरह की चीजें भी इस पवित्र त्योहार में नकरात्मकता यानी कि ( negative ) पैदा करने का भी कम  करती है। इसलिए Rath Yatra के इस त्योहार में सुरक्षा के सभी तरह के इंतजामों को और भी बेहतर करने की जरुरत है ताकि आने वाले भविष्य में भी यह श्रद्धालु और भक्त को श्रद्धा और भक्ति का संदेश इसी प्रकार से देता रहे। 

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रथ यात्रा का महत्व (Significance of Rath Yatra in hindi )

Ratha Yatra (Puri) - Wikipedia

दोस्तों हमने ऊपर के टॉपिक में समझा कि आखिर Rath Yatra को कैसे मनाया जाता है हमने ऊपर के टॉपिक में जितने भी Rath Yatra को मनाने के तरीके बताए हुए सभी लगभग पुराने जमाने में मनाए जाते हैं मगर आपको मालूम ही होगा कि इस बढ़ती हुई टेक्नोलॉजी के साथ दुनिया भी आप काफी मॉडर्न हो चुकी है तो आइए देखते हैं इस आधुनिक दुनिया में किस तरह से Rath Yatra को मनाया जाता है

दस दिवसीय Rath Yatra का त्योहार हमारे देश भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसका भारत के इतिहास और पुराणों  में काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पुराणों और धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक कथाओ  के अनुसार यह भगवान श्री कृष्ण के अवतार यानी कि जगन्नाथ की Rath Yatra लगभग सौ यज्ञों के बराबर है माना गया है ।

यहीं कारण है इस Rath Yatra के दौरान हमारे देश भारत के कोने कोने से इस अनोखी Rath Yatra में भारी भरकम संख्या में श्रद्धालु और भक्त उपस्थित होते है और इसके सबसे महत्वपूर्ण और मशहूर स्थान पुरी में तो इन दिनों भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है ।

इस दिन भक्त और श्रद्धालु तमाम कष्टों को सहते हुए भगवान श्री जगन्नाथ के उस प्रसिद्ध रथ की रस्सी को खींचने का प्रयास जरूर करते हैं और भगवान से अपने सभी तरह कब दुखों तथा उनके सभी  कष्टों को उनसे दूर करने की प्रर्थना और दुवा  मांगते हैं। वास्तव में यह त्योहार हमें  श्रद्धा तथा भक्ति के महत्व को समझाने का कार्य भी करता है।

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प्रसिद्ध रथ यात्रा स्थल (Famous Rath Yatra Places in Hindi )

हमने आपको ऊपर के सभी टॉपिक में रथयात्रा से जुड़ी ढेर सारी जानकारी को प्रदान की है आप सभी को उसके पढ़ने के बाद आपके मन में ख्याल जरूर आया होगा कि आखिर किस किस जगह पर Rath Yatra निकाला जाता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है तो हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि 

वैसे तो Rath Yatra के यह कार्यक्रम देश-विदेश के कई स्थानों पर भी काफी धूमधाम से आयोजित किये जाते हैं। लेकिन इनमें से कुछ प्रसिद्ध रथ यात्राएं ऐसी हैं, जो पूरे विश्व भर में काफी मशहूर है।

हमारे देश भारत के यह उड़ीसा राज्य के जगन्नाथपुरी में भी इस त्योहार रथ यात्रा को काफी धूमधाम से आयोजित किया जाता है । 

हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि पश्चिम बंगाल के हुगली में भी इस त्योहार रथ यात्रा को काफी धूमधाम से आयोजित किया जाता है वह भी एक प्रसिद्ध स्थल है।

हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि पश्चिम बंगाल के राजबलहट में भी इस त्योहार रथ यात्रा को काफी धूमधाम से आयोजित किया जाता है वह भी एक प्रसिद्ध स्थल है।

क्या आपको मालूम है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में भी इस त्योहार रथ यात्रा को काफी धूमधाम से आयोजित किया जाता है वह भी एक प्रसिद्ध स्थल है।

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रथ यात्रा का इतिहास (History of Rath Yatra in Hindi )

पूरे भारत भर में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को Rath Yatra का यह पर्व काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसकी शुरुआत कैसे और कब हुई इसके विषय में कोई विशेष जानकारी नही प्राप्त है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि ऐसा माना जाता है कि यह भारत के सबसे प्राचीनतम और ऐतिहासिक त्योहारों में से एक है।

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि को यह लगभग पूरे देश भर में Rath Yatra के त्योहार का आयोजन किया जाता है और इस दौरान विभिन्न विभिन्न स्थलों पर नाटकों और मेलो का भी आयोजन होता है। इनमें से पुरी, हुगली, न्यूयॉर्क जैसे कई सारे प्रसिद्ध स्थानों पर होने वाली रथ यात्राओं में भारी संख्या में श्रद्धालु और भक्त भाग लेते है।

पुरी में रथ यात्रा के इस त्योहार का इतिहास काफी प्राचीन और ऐतिहासिक भी है और इसकी शुरुआत गंगा राजवंश द्वारा लगभग शाल 1150 इस्वी में की गई थी। यह वह त्योहार था, जो लगभग हमारे देश के पूरे भारत भर में पुरी की रथयात्रा के नाम से काफी प्रसिद्ध हुआ।

इसके साथ ही पाश्चात्य जगत में यह पहला ऐसा भारतीय पर्व था, जिसके विषय में विदेशी लोगो को भी इसकी जानकारी प्राप्त हुई। इस पर्व के विषय में मार्को पोलो जैसे  काफी प्रसिद्ध यात्रियों ने भी अपने वृत्तांतों में काफी बेहतर तरह से इसे वर्णन किया है।

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[ Conclusion, निष्कर्ष ]

दोस्तों आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख Rath Yatra क्या है और Rath Yatra कैसे मनाया जाता है आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेकह मदद से और सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको रथयात्रा से जुड़ी सभी जानकारी को स्टेप बाय स्टेप बताने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो रथ यात्रा से जुड़ी जानकारी को तनिक भी नहीं जानते हैं और वह इसके बारे में जानना चाहते हैं कि इसकी इतिहास क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है और इसके मनाने का उद्देश्य क्या है तो हम सभी ने इन सभी लोगों के लिए ही इस लेख को लिखा था।

और मेरा आप पर संपूर्ण विश्वास है कि आप भी मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और रथ यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं। हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट Rath Yatra क्या है और Rath Yatra कैसे मनाया जाता है के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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