नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप लोग आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारे इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम माउंट एवरेस्ट के बारे में जानकारी | Mount Everest Fact Information in hindi बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में हम समझने भी वाले हैं।

दोस्तों आपने अक्सर माउंट एवरेस्ट का नाम तो जरूर सुना होगा और आपने इसके बारे में बहुत से आर्टिकल और टीवी में न्यूज़ भी देखा होगा कि जो माउंट एवरेस्ट बहुत ऊंचाई पर है और यह भारत सहित कई सारे देशों की सबसे ऊंची चोटी भी मानी जाती है ।

कई सारे लोग तो इस पर चढ़ कर के फतेह भी हासिल किए हैं और कई सारे लोगों की इस विशालकाय पर्वत पर चढ़ने में मौत भी नसीब हो जाती है दोस्तों कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो जानना चाहते हैं।

माउंट एवरेस्ट के बारे में और उनका यह सवाल हमेशा रहता है कि आखिर माउंट एवरेस्ट क्या है और माउंट एवरेस्ट पर विवाद किया क्या है और माउंट एवरेस्ट की विशेषता क्या क्या है और माउंट एवरेस्ट पर लगभग कितने लोग चढ़ चुके हैं और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ते समय कितने लोगों की मौत हुई है और  माउंट एवरेस्ट का इतिहास क्या रहा है और माउंट एवरेस्ट का नाम माउंट एवरेस्ट कैसे पड़ा और माउंट एवरेस्ट की खोज किसने की थी ।

और कैसे किया था तो दोस्तों कुछ इस तरह के सवाल लोग पूछते रहते हैं तो इन सभी सवालों का जवाब देने के लिए हमने इस लेख को लिखा है और इस लेख में माउंट एवरेस्ट से जुड़ी सभी जानकारी को स्टेप बाय स्टेप लिख कर के आप को समझाने की कोशिश की है अगर आप सच में माउंट एवरेस्ट से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं ।

तो आप से मेरा यह अनुरोध है कि मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको मेरा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा और आप माउंट एवरेस्ट के बारे में जान पाएंगे तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए ।


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माउंट एवरेस्ट क्या है (Mount Everest in Hindi)

Mount Everest | Height, Location, Map, Facts, Climbers, & Deaths |  Britannica

दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल है कि माउंट एवरेस्ट क्या है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि माउंट एवरेस्ट आखिर Mount Everest है क्या  चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest एक पहाड़ है जो कि नेपाल सहित कई अलग-अलग देशों में स्थित है Mount Everest हिमालय की सबसे ऊंची चोटी का नाम है।

तो चलिए अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

Mount Everest नाम कैसे पड़ा

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम जानने वाले हैं कि आखिर इस पुराने पहाड़ का नाम माउंट एवरेस्ट कैसे पड़ा तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक और विवाद Everest के ऊपर था वह है नाम को ले कर।

कई तरह के पहाड़ों के सर्वे करने वाले एक अंग्रेज  ने जिसका नाम जॉर्ज एवरेस्ट ( George Everest) था । क्या आपको पता है कि उस ने अपने नाम से ही सिखर नंबर  पंद्रह 15 को अपना नाम Everest दे दिया ।

लेकिन हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि वहां के स्थानीय नेपाली लोग कई पुराने सदियों से उस पहाड़ को गौरीशंकर नाम से जानते और मानते थे। अभी तो उस से नेपाल में सागर माथा के नाम से जाना जाता है और तिब्बत में स्थानीय लोग अपने भाषा में उसे चोमलोंगमा नाम से जाना जाता था। आप लोग यही गौर कीजिए और सोचिए कि यहां के स्थानीय नामों के छोड़ कर के  Everest के नाम से जाना कितना योग्य है ।

 सागरमाथा और चोमलोंग्मा यह दोनों नाम वहां पर रहने वाले लोगों के लिए उनके पुराने और स्थानीय लोगो ने इस नाम को रखा था। और क्या आपको मालूम है कि दुनिया का सबसे ऊंचा शिखर या चोटी भी कह सकते है यह वहां के लोगों के लिए स्थानीय था।

फिर भी वह के स्थानीय लोगों की अबगणना ना कर के इसे British सरकार के एक अंग्रेज officer के नाम दे दिया गया। और एक दिल चर्च और पते की बात है जॉर्ज एवरेस्ट ( George Everest )जब तक जिंदा रहा तब तक उसे यह किताब किसी भी तरह से नहीं मिला।

जब तकरीबन शाल 1866 में (George Everest) जॉर्ज एवरेस्ट की मौत किसी कारण बस हुई तब भी दुनिया की हर नक्शे और सवालों और उनके जवाब  में सबसे ऊंचा शिखर (यानी कि पहाड़ का सबसे ऊपर वाले भाग) गौरी शंकर का नाम उल्लेख होता था।

लेकिन तकरीबन शाल 1930 में कैप्टन बोट (captain boat) नामक एक भौतिक सत्रबिध ज्यादा advance सामग्री के साथ गौरी शंकर की विश्लेषण के लिए और नजदीक गया तो उसे मालूम पड़ा दुनिया के सबसे ऊंची पर्वत से तो गौरी शंकर की चोटी  (यानी कि पहाड़ का सबसे ऊपर वाले भाग) थोड़ी नीची है।

और दोनों पहाड़ों के बीच में तकरीबन  55 किलोमीटर की फासला यानी कि दूरी है । इस से  यह तो साबित हो गया कि गौरी शंकर से ऊंचा और एक पहाड़ धारती पर मौजूद है जो लोग शिखर नंबर 15 के एक ही तराजू में तुले हुए थे । और फिर से इस अलग पहाड़ को Mount Everest नाम दिया गया।

जिसके स्थान एक नाम चोमोलूंगमा सागरमाथा । वास्तव में यह दोनों नाम से किसी एक नाम देने की जरूरत थी। तो दोस्तों कुछ इस तरह से इस पहाड़ का नाम माउंट एवरेस्ट पड़ा तो चलिए अपने टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ और नई जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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माउंट एवरेस्ट की विशेषता (Mount Everest features in hindi)

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दोस्तों इस टॉपिक की मदद से हम जाने वाले हैं माउंट एवरेस्ट के कुछ विशेषताएं के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए इस की कुछ प्रमुख विशेषताएँ step by step कर के हमने नीचे में कुछ इस प्रकार से लिखा है।

दोस्तों क्या आपको मालूम है कि Mount Everest की ऊचाई समुद्र तल यानी कि समुद्र की गहराई से तकरीबन 8848 से 8850 m की दूरी पर है। अगर हम इसे फ़ीट में मापे तो यह तकरीबन 29, 029 से 29030 फीट ऊँचा है।

Mount Everest की पास की पहली चोटी ल्होत्से है जिस की ऊँचाई तकरीबन 8516m है यानी कि 27940 फीट है,  वही अगर हम दूसरी चोटी की बात करे तो उसका नाम है नुपत्से  और इस की ऊँचाई तकरीबन 7855m यानी कि तकरीबन लगभग 27771 फीट है, और अगर हम उसी तीसरी पर्वत चोटी की बात करे तो उस का नाम चंग्त्से है और उस की ऊँचाई तकरीबन 7580 मीटर यानि की तकरीबन 24870 feet ऊँची है।

आपको शायद की मालूम होगा की वैज्ञानिको ने अपने एक शोध  यानी कि experiment में पाया है कि इसकी ऊँचाई हर साल तकरीबन  2 सेंटी मीटर बढ़ती जा रही है।

नेपाल के स्थानीय लोगो द्वारा इस पहाड़ को सागरमाथा के नाम से जाना जाता है और पुकारा भी जाता है इसका नामकरन तकरीबन 1930 में नेपाल के इतिहास कार बाबु राम आचार्य ने दिया इसको एक अच्छा नाम दिया था।

क्या आप जानते है कि चोमोलंगमा के नाम से ज्यादातर इसे तिब्बत के लोगो द्वरा जाना जाता है। क्या आपको मालूम है को सागरमाथा का अर्थ होता है आकाश की देवी और चोमोलंगमा का अर्थ ब्रह्माण्ड की देवी होता है दोनों ही देशों में लोग इस पहाड़ क  ऊची चोटी की पूजा अर्चन करते है।

यह दुनिया के लगभग सात अजूबे में से एक अजूबा है यह Mount Everest।

दोस्तों आपको शायद ही मालूम होगा कि संस्कृत में Everest पहाड़ को देवगिरी कहा जाता है। अपनी विशालता की वजह से इसे विश्व का मुकुट भी कहा जाता है।

दोस्तों कुछ यहीं माउंट एवरेस्ट के बेहतरीन विशेषताएं हैं जिनको जानने के लिए लोग उत्सुक रहते हैं तो चलिए अब अगले टॉपिक की ओर बढ़ते जाएं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नई जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट का इतिहास (Mount Everest history in hindi )

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नई जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं और उसके इतिहास के बारे में जानने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लगभग वर्ष 1802 में ब्रिटिशों यानी कि अंग्रेजों ने दुनिया की सबसे ऊँची शिखर की खोज शुरू की थी।

तो पहले नेपाल, में अंग्रेजों को लगभग शाल 1830 में घुसने देने के लिए तैयार नहीं था। फिर किसी तराई नामक एक स्थान से अंग्रेजों ने अपना खोज शुरू किया, लेकिन उस मौसम में हुवे भारी बारिश की कारण से वहाँ पर मलेरिया नामक बीमारी फैला हुआ था जिस मे तीन सर्वेक्षण वाले बड़े बड़े अधिकारीयों की मौत उसी से हो गई। फिर हिमालय की सबसे ऊँची चोटी जिसको आज लोग  माउन्ट एवरेस्ट ( Mount Everest ) के नाम से जानते है उसे भी ऊँची शिखर से जानते है जिसका नाम है पहले चिम्बोरोजी चोटी था।

अगर हम अपनी आँखों से अंतरिक्ष की ओर देखा जाए तो धरती से सबसे ज्यादा ऊँची चिम्बोरोजी शिखर ही दिखाई देगी। चिम्बोरोजी पहाड़ की ऊंची चोटी Mount Everest चोटी से तकरीबन 15 फीट ऊँचा दिखती है और विसेसगयो के अनुसार है भी, लेकिन वही अगर समुद्र तल से पर्वतों की ऊंचाई और लंबाई मापी जाती है इसलिए Mount Everest को सबसे ऊँची चोटी या शिखर का दर्जा प्राप्त है।

इस विशाल काए पर्वत पर चढ़ने वाले विश्व के इतिहास में प्रसिद्ध यानी कि famous पर्वतारोही अन्द्रेज़ जावदा के अभियान में पहले तकरीबन आठ हजार सिंदर पर कब्ज़ा कर लिया जो पर्वतारोहण के लिए एक नई ही इतिहास बन गई। तो दोस्तों कुछ इस तरह से माउंट एवरेस्ट पर्वत का इतिहास रहा है तो चलिये अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नए जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट पर्वत की खोज (Mount Everest search in hindi)

How Mount Everest helped Britain's post-war bid to burnish global power  credentials

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम जानने वाले हैं कि आखिर किस तरह से माउंट एवरेस्ट का खोज हुआ और किसने इस विशालकाय और सबसे ऊंची चोटी वाली पर्वत की खोज की तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest पर्वत की खोज तकरीबन 18 वी सदी यानी कि वर्ष 1830  से ले कर के वर्ष  1843 में इंग्लैण्ड के सर्वेक्षण वैज्ञानिक जार्ज एवरेस्ट ( George Everest ) के द्वारा खोज सबसे पहले करने की कोशिश की थी और अपने नाम पर इसका नाम भी रखा था ।

बाद में एंड्रयू वॉ ने इंडिया के सबसे ऊंची चोटी यानी कि शिखर के सर्वेक्षण के दौरान इस काम को अच्छे तरह से पूरा किया और उन्होंने जॉर्ज एवरेस्ट (George Everest) के नाम पर ही इस विशाल काय पर्वत का नाम  तकरीबन 1865 में ही Everest पर्वत रखा, हालाँकि हमने उपर के टॉपिक में पूरे विस्तार से बताया था कि नेपाल के स्थानीय लोगों को यह नाम  बिलकुल भी पसंद नहीं था। वे इस खूबसूरत पर्वत का कोई  पुराना और स्थानीय नाम रखना चाहते थे उन्हें यह विदेशी अंग्रेजों द्वरा रखा गया नाम तनिक भी  पसंद नहीं था।

तकरीबन शाल 1885 में अल्पाइन क्लब के अध्यक्ष जिनका नाम क्लिंटन थॉमस डेंट ( Clinton Thomas dent ) था उन्होंने इसी बीच यह सुझाव दिया कि उन की पुस्तक अबोव द स्नो (Above the Snow) लाइन में Everest पर चढ़ाई के लिए संभव सुझाव है।

तकरीबन शाल 1921 में अंग्रेज व्यक्ति  जिसका नाम जॉर्ज मल्लोरी (George mallory) और गाय गाए बुलक नामक ब्यक्ति ने ब्रिटिश रेकांनैस्संस एक्सपीडिशन (British reconnaissance expedition) ऊतरी कोण से इस विशाल काय पर्वत पर चढ़ने का एक बेहतर फैसला किया, और तकरीबन वे 7005 मीटर की यानि की तकरीबन 22982 फिट की उचाई तक चढ़ भी गए।

 तो गाइस कुछ इस तरह वे पहले ऐसे व्यक्ति बन गये जिन्होंने इतनी विशाल काय पहाड़ पर ऊंचाई तक अपना पांव रखा फिर वो अपनी टीम के साथ मिल कर के उतर गये। तो दोस्तों कुछ इस तरह से माउंट एवरेस्ट की खोज की गई थी और तो चलिये अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नए जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट की भौगोलिक स्थिति (Mount Everest geographical features in hindi)

Mount Everest: Overview and Information

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम Mount Everest की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं। इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest तकरीबन 60 मिलियन से भी अद्धिक शालल पुराना है और क्या आपको मालूम है कि यहाँ पर लगभग हर वक्त यहाँ बर्फबारी होते रहती है और यहा की पहाड़ बर्फ की उजली चादर से ढक्की हुई होती है।

 Mount Everest पर्वत का गठन का यह एक प्रमुख कारण है की , जब लोरेशिया का विशालकाय महाद्वीप टुटा तो वह एशिया  के ठीक उत्तर दिशा के तरफ बढ़ते हुए उस से जा टकराया था। हमारी पृथ्वी के भू- पटल की तकरीबन दो प्लेटों के बीच का समुद्र की आखरी तल टूट गया और हमारे देश भारत के थिक उत्तरी किनारों में पूरी तरह से फ़ैल गया, इस तरह से Everest और विशालकाय हिमालय पर्वत की एक ब एक उत्त्पति हुई।

फिर इस विशालकाय पर्वत के पास की कई सारी नदिया है और नदियों के पानी के लिए महत्वपूर्ण स्रोत यह विशालकाय पर्वत है जो की पिघलता हुआ बर्फ है।

 जो वहा के पर्यावरण को मौसम के हिसब से और प्राकृतिक के हिसब से संतुलन को बनाये रखने के लिए बहुत ही आवश्यक है। दोस्तों क्या आपको मालूम है कि Mount Everest विभिन्न तरह के पत्थर होते है जैसे की – संगमरमर, शेल, चुना पत्थर, इत्यदि  से बना है।

Mount Everest पर्वत की ऊँचाई पर की चोटीयॉ सालों साल से बर्फ़ की चादर से ढकी हुई है। यह विशालकाय पर्वत की जलवायु कुछ ऐसी होती है कि वहा कोई भी किसी भी तरह की वनस्पति नहीं पाई जाती है लेकिन वहाँ कुछ तरह के जानवर पाए जाते है जो अद्धिक ठंड में रहना पसंद करते है।

और कोई भी वन्यजीव तकरीबन 20,000 फीट की अधिक ऊँचाई में बिलकुल ही नहीं पाए जाते। क्या आपको मालूम है कि वहा एक कौवा पाया जाता है जिसके पैर लाल होते है वहा गीस भी पाए जाते है. सागरमाथा नेशनल पार्क में वहा पाए जाने वाले कुछ पंछी देखने को मिल जायेंगे। तो दोस्तों कुछ इस तरह से माउंट एवरेस्ट की भौगोलिक स्थिति है तो चलिए अपने टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नई जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट का मौसम (Mount Everest season in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम माउंट एवरेस्ट के मौसम से जुड़ी कुछ जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest की बहुत अधिक ऊँचाई होने की कारण से यहाँ ऑक्सीजन (oxygen) की बहुत कमी रहती है Everest पर लगभग हर शाल बर्फ बारी वाले ठंडी वाले हवाये चलती रहती है।

दोस्तों क्या आपको मालूम है कि वहा का तापमान तकरीबन 80 फारेनहाईट तक चली ही जाती है । हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि वह पर हर साल मई के महीने में ठंडी की वहा तेज गति वाले हवा की धाराएँ चलती है जिसकी कारण से वहा का तापमान थोड़ा बहुत गर्म हो जाता है। परन्तु क्या आप जानते है कि वहाँ की हवा की रफ़्तार तकरीबन 200 मीटर प्रति घंटा की होती है यह हवा की चाल वहा का समान्य चाल है।

Mount Everest की चोटी या उस विशालकाय पर्वत पर चढ़ने के लिए तकरीबन 18 तरफ से अलग अलग जगह के रास्ते है। Everest पर चढ़ाई करने वाले लोगो को पैसे के साथ साथ काफी नाम और सम्मान भी मिलते है, कई सारे लोगों में इस विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई करने का जज्बा हमेशा कायम रहता है। कई सारे लोग यो इस विशालकाय पर्वत पर चढाई करते वक्त अपने जरुरत का लगभग बहुत सामान अपने साथ लेकर चलते है जो उनको चढ़ाई के वक़्त काम आते है।

तकरीबन 40 दिनों तक लगभग 66 % से कम oxygen में रहने के लिए पर्वतारोही की खास तरह के ट्रेनिंग लेनि पड़ती है वो अपने साथ एक अच्छी ढंग की नायलोन की रस्सी भी साथ रखते है, जिसका उपयोग वह गिरने से बचने के लिए काफी बेहतरीन ढंग से करते है वो एक काफी विशेष प्रकार के बूट के जूते पहनते है जिन को क्रेम्पोंस (Crampos) भी कहा जाता है जो उन्हें बर्फ़ पर पैर फिसलने से बहुत ज्यादा बचाता है।

क्या आपको मालूम है कि उन्हें और उनके शरीर को गर्म रखने के लिए भी एक विशेष प्रकार का सूट भी उनके शरीर के ऊपर पहनना पड़ता है, अधिकांशतः विशालकाय पर्वत पर चढ़ने के वक़्त पर्वतारोही खाने के लिए चावल या नुडल्स का सेवन करते है। लगभग सभी विशालकाय पर्वत पर चढ़ने वाले व्यक्ति के पास oxygen की एक खास बोतल जरुर रहती है जिसका उपयोग जब वो तकरीबन 26000 की ऊचाई तक पहुँच जाते है, तब वो लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई करने वालों पर्वतरोहि में अधिकत्तर नेपाल से होते है। क्या आपको मालूम है कि पर्वतारोहियों की मदद वहा के शेरपा करते है। शेरपा का काम है वाहा  विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई करने वालों के लिए  टेंट और खाने पीने को उपलब्ध कराना। प्रबंध करने के लिए वहा पर तकरीबन चार शिविर होते है।

शेरपा व्यक्ति का नाम होता है ज्यादातर ये नेपाल के पश्चिम में निवास करते है या वही पर रहते है। इस काम को करने से उन्हें एक नौकरी मिल जाती है जिससे उनके परिवार का भरण पोषण हो जाता है।

क्या आपको मालूम है कि कुशांग शेरपा ऐसे पर्वत पर उसकी चारों दिशाओं से चढ़ चुके है। वो  विशालकाय पर्वत पर चढ़ने वालों को प्रशिक्षण देते है अर्थात वह एक प्रशिक्षक है। तो दोस्तों कुछ इस तरह से माउंट एवरेस्ट की मौसम होती है और वहां पर पर्वत रोही पर्वत पर चढ़ने जाते हैं तो चली अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नई जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट पर विवाद (Mount Everest controversy in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम माउंट एवरेस्ट पर हुए विवाद से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest की ऊँचाई को  चीन और नेपाल ने काफी अलग अलग बताया जिस के कारण से दोनों देशों के बीच हमेशा बहस और विवाद भी होता रहता है ।

अगर  वर्तमान की बात करे तो वर्तमान में जो पर्वत की ऊँचाई है यह तकरीबन 8 हजार 8 सौ 48 तक कि है वो भारतीय सर्वेक्षण और विसेसगयो द्वारा बताई गई है।

जो कि  तकरीबन शाल 1955 के के विसेसगयो के सर्वेक्षण  में आई और जिसे चीन ने तकरीबन शाल  1975 के अपने सर्वेक्षण में माना भी, तथा इस विशालकाय पर्वत की ऊँचाई की पुष्टि भी की। फिर तकरीबन शाल 2005 में जब चीन ने ऊँचाई को अपने विसेसगयो द्वरा मापवाया तब उसकी ऊँचाई तकरीबन 8844.43 मीटर आई थी,

नेपाल ने इस विशालकाय पर्वत की ऊँचाई को मानने से साफ इंकार करते हुए कहा कि उसे बर्फ की ऊँचाई से फिर से मापा जाना चाहिए जब कि चीन की विसेसगयो ने चट्टान की ऊँचाई से मापना चाहता थे।

इस बात का विवाद दोनों में तकरीबन शाल 2005 से  शाल 2010 तक  तकरीबन 5 साल तक रहा. अंततः एक दूसरे के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने Mount Everest की वर्तमान ऊँचाई को मान लिया।  

तो दोस्तों कुछ यही दीवाने हैं जो माउंट एवरेस्ट पर किया गया था तो चली अब अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और Mount Everest से जुड़ी कुछ नई जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालों में सफल व्यक्ति (Mount Everest successful climbers in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले सफल व्यक्ति के नाम से जुड़ी कुछ जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोस्तों हमने नीचे में Mount Everest पर चढ़ने वाली सभी व्यक्ति का नाम और डेट स्टेप बाय स्टेप कर के लिखा है तो आप इसे जरूर पढ़ें

  • Mount Everest विशालकाय पर्वत पर पहली चढाई  तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलारी ने की थी। एडमंड हेलेरी जो की New Zealand के थे और तेनजिंग नोरगे जो कि Nepal के रहने वाले थे, उन्होंने तकरीबन 29 मई वर्ष 1953 को Mount Everest पर चढ़ कर के फतह हासिल की थी। इनके बाद से तकरीबन 3448 व्यक्ति ने इस विशालकाय पर्वत पर चढ़ चुके है।
  • दोस्तों क्या आपको मालूम है कि mount Everest पर चढ़ाई करने वाली प्रथम भारतीय महिला बछेंद्री पाल बनी थी जिन्होंने विशालकाय पर्वत पर चढ़ कर के फतह हासिल किया था।
  • दूसरी बार Everest विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई जापान के जूनको तबई ने तारीख 16 महीना मई शाल 1975 में की यह Mount Everest पर चढाई करने वाली पहली महिला बनी थी।
  • सबसे ज्यादा बार चढ़ाई करने का रिकॉर्ड नेपाल के अपा शेरपा जो प्रभु ताशी शेरपा के नाम से भी जाने जाते है, ने तकरीबन 11 मई  शाल 2011 से ले कर के तरी 19 महीना  मई शाल  2013 के बीच  तकरीबन 21 बार इस  विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई की है।
  • वर्ष 1963 और वर्ष 1965 में नेपाल के नवांग गोम्बू ने  इस  विशालकाय पर्वत पर तकरीबन दो बार चढने वाले पहले पुरुष बने है।
  • क्या आप जंतर है कि शाल1978 में पहले ऐसे पर्वतारोही जो बिना oxygen की बोतल के साथ चढ़े, वे थे इटालियन नागरिक रेंहोल्ड मेस्सनेर और पीटर हब्लेर.
  • भारत की संतोष यादव ने भी एवरेस्ट विशालकाय पर्वत पर तकरीबन दो बार चढाई की. पहली चढ़ाई उन्होंने 1992 में और दूसरी चढाई 1993 में की.
  • दोस्तों क्या आपको मालूम है कि 23 मई 2013 को जापान के युइचिरो मिउरा ने लगभग 80 साल के उम्र में एवरेस्ट पर्वत पर चढाई की। ये विशालकाय पर्वत पर चढ़ने वाले पुरषों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग व्यक्ति है जिन्होंने पहली बार एवरेस्ट पर्वत चढ़ाई की.
  • 19 मई 2012 में जापान की तामे वतनाबे ने लगभग 73 वर्ष की पुराने बुजुर्ग की उम्र में Mountain Everest पर चढाई करने वाली पहली सबसे ज्यादा बुजुर्ग महिला का ख़िताब अपने नाम किया.
  • क्या आप जानते है कि तारीख 22 मई 2010  को अमेरिका के जॉर्डन रोमेरो ने तकरीबन 13 साल 10 महीने 10 दिन की इस छोटे सर उम्र में Mountain Everest की चढ़ाई कर सबसे युवा पुरुष का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.
  • भारत की मलावाथ पुरना ने तारीख 25 महीना मई शाल 2014 को तकरीबन 13 साल 11 महीने की उम्र में इस  विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई की और सबसे कम उम्र की युवा महिला का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करवाया।
  • क्या आपको मालूम है कि हमारे देश भारत की ताशी और नौग्शी मलिक दो जुड़वां बहनों ने तारीख 19 महीना मई शाल 2013 को पर्वत के ऊपर चढ़ाई करने का रिकॉर्ड भी बनाया है।
  • दोस्तों क्या आपको मालूम है कि नेपाल के  मोनी मुलेपति और पेम दोरजी ने तकरीबन 30 मई  वर्ष 2005 में इस विशालकाय पर्वत पर चढ़ाई कर के वही पर अपनी शादी की और वो पहले ऐसे शादी करने वाले जाबाज जोड़े बन गए जिन्होंने Mount Everest की चोटी पर शादी की है।

तो चलिये अगले टॉपिक की ओर बढ़ते हैं और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी कुछ नए जानकारी को प्राप्त करते हैं।

माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में होने वाली मौतें (Mount Everest deaths in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक के मदद से हम माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली हुई मौत के बारे में कुछ जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mount Everest पर चढ़ाई के दौरान बहुत से पर्वतारोहियों की मौत भी हो जाती है क्या आपको यह सब पता था। हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि सबसे ज्यादा मौत पर्वत की नजदीक वाले लेयर और तल्हाठी के भाग में होती है जिस को पर्वतरोहि के लिए ( death zone) डेथ जोन भी कहा जाता है।

Mount Everest की विशालकाय पर्वत पर चढ़ने के लिए मुख्यतः दो ही रास्तों का लोग उपयोग करते है जिस में से एक है नेपाल की तरफ से और दूसरा रास्ता है तिब्बत की तरफ से।

इस विशालकाय पर्वत पर चढ़ने के रास्ते में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिस मे शामिल है बीमारी, मौसम बदलते ही वहा हवायें तकरीबन 350 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से चलती है, बर्फबारी के साथ ही भूस्खलन। शाल 2016 में  तकरीबन 200 से भी ज्यादा लाशें वहा अभी भी पड़ी हुई है। जिनमे से कुछ की पहचान तो बहुत समय बाद हुई है।

शाल 2016 के आंकड़े बताते है कि तकरीबन 3.7% पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है। तो दोस्तों कुछ इस तरह से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वत रोही की मौत हो जाती है।

  [ Conclusion, निष्कर्ष ]

दोस्तों आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख माउंट एवरेस्ट के बारे में जानकारी | Mount Everest Fact Information in hindi आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से समझ चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे।

दोस्तों हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको माउंट एवरेस्ट से जुड़ी सभी जानकारी देने की कोशिश की है क्योंकि हमें मालूम है कि कई सारे लोग अभी भी ऐसे हैं जो जानना चाहते हैं कि आखिर माउंट एवरेस्ट के बारे में और उनका यह सवाल हमेशा रहता है कि आखिर माउंट एवरेस्ट क्या है और माउंट एवरेस्ट पर विवाद किया क्या है और माउंट एवरेस्ट की विशेषता क्या क्या है और माउंट एवरेस्ट पर लगभग कितने लोग चढ़ चुके हैं और।

 माउंट एवरेस्ट पर चढ़ते समय कितने लोगों की मौत हुई है और  माउंट एवरेस्ट का इतिहास क्या रहा है और माउंट एवरेस्ट का नाम माउंट एवरेस्ट कैसे पड़ा और माउंट एवरेस्ट की खोज किसने की थी और कैसे किया था तो दोस्तों कुछ इस तरह के सवाल लोग पूछते रहते हैं तो इन सभी सवालों का जवाब देने के लिए हमने इस लेख को लिखा है ।

और इस लेख में माउंट एवरेस्ट से जुड़ी सभी जानकारी को स्टेप बाय स्टेप लिख कर के आप को समझाने की कोशिश की है और आप पर मेरा संपूर्ण विश्वास है कि आप सभी मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और माउंट एवरेस्ट से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त कर चुके होंगे।

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि माउंट एवरेस्ट के बारे में जानकारी पर यह पोस्ट लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे। तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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