Mahatma Gandhi biography in Hindi

दोस्तों आज के इस आर्टिकल के मदद से हमें Mahatma Gandhi biography in Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं। दोस्तों बहुत सारे लोग महात्मा गांधी को अच्छी तरह से जानते हैं 

पर उनके जीवनी और उनके निजी जीवन के बारे में ज्यदा कुछ नही मालूम होता है और उनके बारे में पूरे विस्तार से उन्हें बिल्कुल भी मालूम नहीं होता है। उनको यह तो मालूम होता है कि महात्मा गांधी बड़े ही स्वाभाविक नेता रह चुके हैं और वह संघर्षशील इंसान भी रह चुके हैं। 

और लेकिन वह कैसे संघर्षशील बने इनके बारे में ढेर सारे लोगी को कुछ भी नहीं मालूम होता है। दोस्तों इसीलिए हमने इस लेख में उन सभी लोगों के समस्याओं को दूर करने के लिए महात्मा गांधी के सभी जीवनी से लेकर के उनके मृत्यु तक की कहानी को सरल से सरल भाषा में लिख कर के समझाया है।

 अगर आप सच में महात्मा गांधी जी के जीवनी के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो आप कृपया करके इस पोस्ट को पूरे ध्यान से अंत तक पढ़े तभी आप महात्मा गांधी जी के बारे में पूरे अंत तक विस्तार से समझ पाएंगे। तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए  हुए और जानते हैं संपूर्ण जानकारी महात्मा गांधी के जीवनी के बारे में

महात्मा गांधी कौन थे ? 

दोस्तो अगर आपको मालूम नही है कि महात्मा गांधी कौन थे तो मैं आप सरल सब्दो में बता दु की महात्मा गांधी  ब्रिटिश शासन “जिन लोगो ने हमारे देश को गुलाम बनाया था ” वो उनके  के खिलाफ भारत के एक बहुत बड़ा अहिंसक के साथ साथ संघर्ष शील स्वतंत्रता आंदोलन के नेता थे।

 उन्होंने लगभग पूरे दक्षिण अफ्रीका में जिन्होंने हमारे सभी भारतीयों के नागरिक अधिकारों की बेहतरीन तरह से वकालत की थी। थोड़ा सा उनके बारे में अगर बख़्या करे तो वो भारत के पोरबंदर के एक मुहल्ले में जन्मे, महात्मा गांधी जी  ने अपना कानून का अध्ययन बेहतरीन तरीके से किया और सविनय अवज्ञा के सभी शांतिपूर्ण रूपों में ब्रिटिश की संस्थानों के खिलाफ काफी जोड़ो सोरो से बहिष्कार का आयोजन किया। 1948 के अंतराल में एक कट्टरपंथी ने उनकी  हत्या गोली मार कर रास्ते मे कर दी थी।

महात्मा गांधी प्रारंभिक दिन के बारे में।

क्या आप जानते है कि मोहन दास करम चंद गांधी, जी को जिन्हें हम आज महात्मा गांधी के नाम से भी ढेर सारे लोगो द्वारा जाना जाता है, आपको मालूम नही है तो मैं बता दु की महात्मा गांधी जी  का जन्म लगभग 1869 में 2 अक्टूबर को लगभग को गुजरात के की किसी  पोरबंदर के छोटे से मुहल्ले में किसी मध्यम वर्ग के वैश्य परिवार में हुआ था। क्या आपको पता है कि वह पुतलीबाई और करमचंद के पुत्र थे ये इनके माता पिता का नाम है ।

 उन्होंने  पोरबंदर के  कसी प्राथमिक विद्यालय में में लगभग छः से सात साल  की उम्र तक और यहाँ पर अपना पढ़ाई को पूरा करने के बाद में अपना बचा खुचा पढ़ाई राजकोट में की। पढ़ाई करने के बाद  उनका विवाह किसी कस्तूरबा नाम के महिला  से लगभग तेरह से चौदह वर्ष की आयु में जब वो हाई स्कूल में रहते हुए कर दिया गया था।

क्या आपको पता है कि उन्होंने गुजरात के किसी भावनगर के समलादास  नामक किसी कॉलेज से अपना  मैट्रिक की पढ़ाई किया और परीक्षा दिया फिर उन्होंने लगभग 1888 के अंतराल  में कानून की पढ़ाई के लिए भारत से  इंग्लैंड चले गए। हालाँकि मैं आपको एक जानकारी दे दु की 

 उनकी माँ ने इस यात्रा के बिलकुल अपनी ओर से पूरी तरह से विरोध किया था, लेकिन महात्मा गांधी जी द्वारा विदेश में नही किसी  महिलाओं, मांस और शराब और थोड़ी बहुत चीज़ों  को न छूने की एकदम सख्त प्रतिज्ञा से विरोध पर बेहतरीन तरीके से काबू पा लिया गया था। उन्होंने लगभग 1891 के अंतराल  में अपनी परीक्षा उत्तीर्ण की और  12 तारिक के जून महीना में 1891 को भारत वापस लौट गए।

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महात्मा गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका में (1893-1914) के बारे में

दोस्तो क्या आपको पता है कि महात्मा गाँधी जी लगभग 24 साल की ही उम्र में दक्षिण अफ्रीका देश मे पहुंचे थे। आपको शायद ही मालूम होगा कि वह प्रिटोरिया कसी जगह पे स्थित जमरे देश के कुछ  भारतीय व्यापारियों के ओर से न्यायिक सलाहकार के तौर पर दक्षिण अफ्रीका गए थे। क्या आपको मालूम है कि उन्होंने अपने जीवन के 20 से 21 साल के लमसम में दक्षिण अफ्रीका में बिताये जहाँ उन्होंने अपने तरह तरह के राजनैतिक विचार और बेहतर तरह के नेतृत्व में काफी सारे कौशल का विकास किया ।

गाइस दक्षिण अफ्रीका में उनको गंभीर समस्याओं जो कि नस्ली भेदभाव का सामना काजी मस्कत से  करना पड़ा। क्या आप जानते है कि एक बार दक्षिण अफ्रीका के किसी ट्रेन में प्रथम श्रेणी कोच की वैध टिकट होने के बाद भी उन्हें तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने से बिल्कुल तरह से इन्कार करने के कारण उन्हें चलती हुई ट्रेन से झट से बाहर फेंक दिया गया।

गाइस ये सारी घटनाएँ उनके के जीवन में काफी जयदा महत्वपूर्ण के साथ साथ संगर्ष शील मोड़ बन गईं और ढेर  सारे मौजूदा तरह तरह के सामाजिक और राजनैतिक अन्याय के प्रति काफी ज्यदा  जागरुकता  का बेहतर कारण बनीं। दक्षिण अफ्रीका में ढेर सारे भारतीयों जो हमारे देश भारत से गये थे उनके उपर हो रहे तरह तरह के अन्याय को देखते हुए उनके मन में ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत लगभग सारी भारतियों के सम्मान तथा स्वयं अपनी पहचान से सम्बंधित प्रश्न उठने की कोसीसी की और करने  लगे।

दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी जी ने लगभग पूरे भारतियों को अपने लगभग सारे राजनैतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए एक काफी बेहतर तरीके से संघर्ष करने के लिए उन सभी को अपनी ओर से बहुत ज्यादा प्रेरित किया। उन्होंने भारतियों की नागरिकता सम्बंधित लगभग सभी मुद्दे को भी दक्षिण अफ़्रीकी सरकार और वहाँ के नेता के सामने अपने सभी प्रश्नो को उठाया और सन 1906 के अंतराल में ज़ुलु युद्ध में भारतीयों को काफी हद तक भर्ती करने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों को बेहतरीन तरह से सक्रिय रूप से प्रेरित किया। 

गाइस हमे महात्मा गाँधी के अनुसार अपनी किसी भी जगह के  नागरिकता के दावों को कानूनी के तौर पर अच्छे से जामा पहनाने के लिए लगभग सभी भारतीयों  को एक जुट हो कर के ब्रिटिश युद्ध प्रयासों में सहयोग देना चाहिए।

महात्मा गांधी जी का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष  के बारे में।

दोस्तो क्या आपको मालूम है कि वर्ष 1914 के बीच के महीनों में महात्मा गांधी जी ने देश दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौट आये थे। आने के कुछ समय तक महात्मा गांधी जी  एक बेहतर और बढ़िया राष्ट्रवादी नेता के साथ साथ  संयोजक के रूप में बेहतरीन तरह से प्रतिष्ठित हो चुके थे। 

वह सभी उदारवादी जो कि उस समय के कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले के साफ साफ कहने पर वह भारत में वापस  आये थे और आपको शायद ही मालूम होगा कि शुरूआती दौर में गाँधी के लगभग सभी विचार बहुत हद तक गोखले के विचारों से  बेहतरीन तरह से प्रभावित थे। शुरुआती में महात्मा गांधी जी ने अपने देश के विभिन्न भागों का दौरा काफी अच्छे तरीके से  किया और सामाजिक,राजनैतिक, आर्थिक और कई सारे मुद्दों को समझने की कोशिश की।

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महात्मा गांधी जी का चम्पारण और खेड़ा सत्याग्रह में योगदान।

दोस्तो क्या आप जानते है कि बिहार के कसी चम्पारण और गुजरात नामक के खेड़ा में हुए लगभग सभी तरह के  आंदोलनों ने महात्मा गांधी जी को भारत में पहली राजनैतिक सफलता थोड़ी बहोत मस्कत के बाद दिलाई। चंपारण नामक जिले में ढेर सारे ब्रिटिश ज़मींदार ने किसानों को तरह तरह के  खाद्य फसलों की बजाए  उन्हें जबरन नील की खेती करने के लिए ढेर सारे तौर तरीके लगा कर मजबूर करते थे और उनके उपजाए हुए खाद्य फसलों को उनके लागत से भी  सस्ते मूल्य पर उनका सारा फसल खरीदते थे जिससे किसानों की स्थिति काफी जयदा  बद से बेतर होती जा रही थी। 

 इस कारण हमारे देश के किशान भाई काफी अत्यधिक गरीबी से घिर गए। और ये एक विनाश कारी अकाल के बाद ब्रिटिश  सरकार ने उनकी सभी दमनकारी पर किसी तरह का कर लगा दिए जिनका बोझ हमारे सभी किसानों के ऊपर धीरे धीरे दिन प्रतिदिन बढता ही जा रही थी । 

कुल मिलाकर हम अगर इस बात ले विचार विमर्श करे तो  स्थिति बहुत निराशा जनक धीरे धीरे  थी। महात्मा गांधीजी ने  ने उस समय के लगभग सभी जमींदारों के खिलाफ़ एक काफी तगड़ा  विरोध प्रदर्शन के साथ साथ अलग अलग तरह के  हड़तालों का नेतृत्व किया आंदोलन किया जिसके बाद सभी गरीब मजदूर और हमारे किसानों की मांगों को काफी हद तक माना गया।

सन 1918 इ° के अंतराल  में गुजरात में स्थित  सूखे और खेड़ा बाढ़ की चपेट में लगभग पूरी तरह से आ गया था जिसके कारण उस समय के लगभग सभी  किसान भइयो और  मजदूर , गरीबों  की स्थिति बद् से बत्ततर हो गयी और लोग गोहर लगा कर तरह तरह के तरीको का इस्तेमाल कर के कर माफ़ी की मांग करने लगे। खेड़ा में महात्मा गाँधी जी के बताये गए सभी तथ के  मार्गदर्शन में सरदार पटेल ने अंग्रेजों के साथ इस समस्या पर काफी जोरो सोरों से विचार विमर्श के लिए किसानों और गरीबी मजदूर का नेतृत्व किया। 

इसके बाद ब्रिटिश के सरकार  ने राजस्व संग्रहण से बहुत मस्कत के बाद  मुक्ति देकर सभी तरह के कैदियों को कारागार से रिहा कर दिया। दोस्तो कुछ इस प्रकार से  इस प्रकार खेड़ा और  चंपारण के बाद गांधी की बेहतरीन ख्याति हमारे पूरे देश भर में फैल गई और वह  हम सभी के बीच स्वतंत्रता आन्दोलन के एक काफी ज्यादा महत्वपूर्ण नेता के साथ साथ संघर्ष शील मनुष्य बनकर उभरे।

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खिलाफत आन्दोलन में महत्मा गांधी जी का योगदान

दोस्तो आपको शायद ही मालूम होगा कि कांग्रेस पार्टी के अन्दर और मुस्लिमों के बीच अपनी एक तरह का खास लोकप्रियता बढ़ाने का बेहतरीन से बेहतरीन मौका महात्मा गाँधी जी को खिलाफत आन्दोलन के दौरान अच्छी तरह से मिला। गाइस क्या आप को मालूम तहस की खिलाफत एक विश्वव्यापी के रूप का आन्दोलन था जिसके द्वारा काफी ज्यादा खलीफा के गिरते हुवे कई तरह के प्रभुत्व का विरोध लगभग पूरे दुनिया के मुसलमानों के  द्वारा एक जुट हो कर किया जा रहा था। उस समय प्रथम विश्व युद्ध में पूरे तरह से पराजित होने के बाद उन्होंने ओटोमन साम्राज्य को अलग अलग भागो में बेहतर तरीके से  विखंडित कर दिया गया था।

दोस्तो इसी के  कारण मुसलमानों को अपने धर्म और लगभग सभी धार्मिक स्थलों, जगहों के सुरक्षा को लेकर के काफी ज्यादा चिंता का माहौल बनी हुई थी। भारत में इस खिलाफत आंदोलन  का नेतृत्व में लगभग पूरे  ‘आल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस’ के द्वारा इसको सभी जगह पर किया जा रहा था। धीरे-धीरे महात्मा गाँधी जी ने इसके मुख्य प्रवक्ता बन गए। भारतीय सभी मुसलमानों के साथ मिलकर एक जुटता व्यक्त करने के लिए उन्होंने सभी  अंग्रेजों यानी ब्रिटिश द्वारा दिए सम्मान और मैडल फिर से वापस कर दिया। इसके बाद महात्मा गाँधी जी ने सिर्फ कांग्रेस पार्टी के साथ साथ बल्कि देश के एकमात्र ऐसे नेता बन गए जिसका प्रभाव काफी सारे विभिन्न विभिन्न समुदायों के लोगों पर था।

हरिजन आंदोलन में महात्मा गाँधी जी का योगदान।

दोस्तो सभी दलित के जाने माने नेता भीम  आर अम्बेडकर की कोशिशों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश के सरकार ने लगभग सभी अछूतों के लिए कसी एक नए संविधान या नई नियम के अंतर्गत पृथक निर्वाचन जैसे चीज़ों को मंजूर कर दिया था।

क्या आपको पता था कि इस समय पर येरवडा जेल में  महत्मा गांधी जी बंद होने के भाव जुड़ भी उन्हों ने इसके आंदोलन के विरोध में  सितंबर महिमा 1932 के अंतराल में लगभग छ: से सात दिन का निर्जल  उपवास किया और सरकार को एक काजी महत्वपूर्ण समान व्यवस्था (पूना पैक्ट) अपनाने पर पर काफी ज्यादा मस्कत के बाद  मजबूर किया। अछूतों के जीवन को फिर से काफी हद तक सुधारने के लिए महात्मा गांधी जी के द्वारा चलाए गए बेहतर तरीके के अभियान की यह तो सिर्फ शुरूआत थी। 

 मई महीना के लगभग 8 तारिक को  1933 के अंतराल में महत्मा गांधी जी ने फिर से आत्म-शुद्धि के लिए  लगभग  20 से 21 दिन तक का उपवास किया और बहुत सारे तौर तरीके का इस्तेमाल कर के हरिजन आंदोलन को पहले के अपेक्षा आगे बढ़ाने के लिए एक बेहतर तरह के -वर्षीय अभियान की शुरुआत की। मैं आपको बता दु की अमबेडकर जैसे काफी बेहतर दलित नेता इस आन्दोलन से बिलकुल भी प्रसन्न नहीं थे और गाइस महत्मा गांधी जी के द्वारा दलितों के लिए हरिजन शब्द का बेहतर तरीका से उपयोग करने की काफी ज्यादा  निंदा की।

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स्वराज और नमक सत्याग्रह में महत्मा गांधी जी का योगदान

दोस्तो क्या आप को इस बात की जानकारी है कि असहयोग आन्दोलन के दौरान जब  गिरफ़्तारी के बाद महत्मा गांधी जी फरवरी 1924 के अंतराल में जेल  में से रिहा हुए और तकरीबन सन 1928 तक यानी लगभग 4 साल से 5 साल तक सक्रिय राजनीति से बिलकुल दूर ही रहे। इस दौरान वह किसी बेहतर तरह के स्वराज पार्टी और कांग्रेस पार्टी  के बीच किसी तरह का मन मुटाव को उनके बीच कम करने में लगे रहे और इसके अतिरिक्त अज्ञानता,अस्पृश्यता, शराब, और गरीबी जैसे कई सारे  के खिलाफ भी  जोरो सोरो से लड़ते रहे।

दोस्तो इसी समय के बीच ब्रिटिश की सरकार ने जिसके हेड सर् जॉन साइमन थे उन के नेतृत्व में हमारे देश भारत के लिए एक बेहतरीन तरह से नया संवेधानिक सुधार जैसे किसी खास तरह आयोग बनाया गया पर उसका अपसोस इस बात का था कि  उसका  एक भी सदस्य हमारे देश के भारतीय नहीं थे जिसके कारण भारतीय राजनैतिक दलों ने इसका काफी जोरो सोरो से  बहिष्कार किया।

 गाइस इसके बाद में दिसम्बर महीना 1928 शाल हमारे देश भारत  के कलकत्ता राज्य के अधिवेशन में महात्मा गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार की हुकुमत को लगभग पूरे भारतीय साम्राज्य को सत्ता प्रदान करने के लिए कहा गया था और दोस्तो ऐसा न करने पर हमारे  देश भारत की आजादी के लिए किसी तरह का असहयोग आंदोलन का बेहतरीन रूप से सामना करने के लिए हमे पूर्ण रूप से तैयार रहने के लिए भी कहा। ब्रिटिश के ससको द्वारा किसी भी तरह का जवाब नहीं मिलने पर लगभग 31 तारिक दिसम्बर 1929 शाल  को लाहौर में भारत का झंडा सम्पूर्ण रूप से फहराया गया और कांग्रेस ने  तारिक 26 महीना जनवरी लगभग 1930 का दिन भारतीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया।

दोस्तो इसके ही पश्चात महत्मा गांधी जी ने किसी सरकार द्वारा खाने के  नमक पर काफी ज्यादा  कर लगाए जाने के वाजे से उसके विरोध में नमक का सत्याग्रह चलाया गया । गाइस  जिसके अंतर्गत उन्होंने लगभग 12 तारिक  मार्च महीना  से ले कर के  6 तारिक  अप्रेल महीना तक  उन्होंने अपने दम पे तकरीबन अहमदाबाद से  दांडी, यात्रा को शुरू कर के  गुजरात, तक लगभग यानी लगभग 380 से  390 किलोमीटर  की अंतराल में काफी बड़ी यात्रा की। 

दोस्तो इस यात्रा का उद्देश्य आमतौर पर यह था कि स्वयं खाने का नमक उत्पन्न करना था। आपको जान के हैरानी होगी कि इस यात्रा में लाखो  हजारों की  अंतराल  में बहुत ज्यादा भारतीयों ने  इस डंडी यात्रा में जोरो सोरो से भाग लिया और अंग्रेजों के सरकार  को विचलित करने में बहुत अच्छे तरह से सफल रहे। इस डंडी यात्रा के दौरान ब्रिटिश सरकार ने  60 हज़ार के लमसम से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें कारागार में डाल दिया गया था।

इसके बाद दोस्तो बिर्टिश सरकार के लार्ड इरविन के साथ एक जुट हो कर किसी प्रतिनिधित्व वाली सरकार से महत्मा गांधी जी के साथ आराम से बैठ कर विचार-विमर्श करने का निर्णय दोनी पक्षो के मन मुताबिक से लिया गया। जिसके फलस्वरूप गांधी-इरविन के संधि पर मार्च महीना के सन 1931 के अंतराल में उसी पर इनकी हस्ताक्षर हुए। गांधी-इरविन संधि के तहत अंग्रेजी सरकार ने भी लगभग सभी  तरह के राजनैतिक कैदियों को रिहा करने के लिए बिल पास कराया गया है उन्होंने सहमति दे दी। 

गाइस इन सभी  समझौते के  बेहतर से बेहतर परिणामस्वरूप महात्मा गांधी जी ने कांग्रेस के एकमात्र बेहतर से बेहतर प्रतिनिधि के रूप में विदेश लंदन में किसी खास आयोजित गोलमेज सम्मेलन में पूरे तैयारी के साथ बेहतरीन ढंग से भाग लिया परन्तु इस तरह के सम्मेलन में कांग्रेस और हमारे  दूसरे राष्ट्रवादियों के लिए काफी ज्यादा विशेष रूप से  निराशा जनक रहा। ये सब होने के बाद महात्मा गांधी जी  फिर से एक बार  गिरफ्तार कर लिए गया  और उस समय की ब्रिटिश सरकार ने  हमारी गांधी जी के द्वारा की गई राष्ट्रवादी आन्दोलन को कुचलने की  पूर्ण रूप से कोशिश की। लेकिन सन 1934 के अंतराल में  महत्मा गांधी जी  ने कांग्रेस की सदस्यता से  अपनी मर्जी से पुर्ण रूप से इस्तीफ़ा दे दिया।

उन्होंने तरह तरह के ढेर सारे राजनीतिक गतिविधियों के अलग अलग स्थान पर अब ‘रचनात्मक  तरीके से सभी कार्यक्रमों’ के माध्यम के द्वारा ‘सबसे छोटे  स्तर यानी सबसे निचले पोस्ट से’ राष्ट्र के निर्माण और विकड पर अपना ध्यान को अच्छे से एकत्रित कर के लगाया। उन्होंने ग्रामीण  भारत को काफी हद तक शिक्षित करने के साथ साथ छुआछूत के ख़िलाफ़ तरह तरह के आन्दोलन जारी रखने और उसके साथ ,बुनाई , कताई और अन्य ढेर सारे तरह तरह के प्रकार कुटीर उद्योगों को काफी ज्यादा बढ़ावा देने और लोगों की कई सारे  आवश्यकताओं के  अनुसार उनका अनुकूल शिक्षा प्रणाली बनाने का काम  बिलकुल शुरू से किया।

ARYAN KHAN BIOGRAPHY

महात्मा गांधी जी के बारे में।

दोस्तो आपको तो पता ही होगा कि महात्मा गांधी जी  को हमारा देश पूरे भारत के एक बहुत ज्यादा महान राजनीतिक के साथ साथ उन्हें आध्यात्मिक नेता के रूप में भी याद करता है। क्या आपको मालूम है कि सविनय अवज्ञा के अपने सभी तरह तरह के अहिंसक अभियानों के लिए प्रसिद्ध, लगभग पूरे दुनिया भर के आदमी से ले कर के छोटे बच्चों से ले कर के

 बूढ़े जवान महिलाये उनके इस बेहतरीन  करिश्मे, और बहादुर की साहस और लोगों के विवेक को बेहतर प्रभावित करने की क्षमता से भी वो प्रभावित थे। दोस्तो महत्मा गांधी जी पर अल्बर्ट आइंस्टीन की टिप्पणी या उनका विचार विमर्श: ” गाइस  मेरा हिसाब से यह मानना ​​​​है कि गांधी के विचार हमारे समय के लगभग सभी राजनीतिक पुरुषों में  काफी अधिक प्रबुद्ध थे।

हम लोगों को उनकी इस बेहतरीन भावना में चीजों को उनके जैसा कुछ करने का प्रयास हमे भी करना चाहिए: हम सभी लोगो के कारण के लिए लड़ने में हिंसा का उपयोग बिलकुल भी नहीं करना, बल्कि उन्होंने  गैर-भागीदारी के मदद से  जो कुछ भी आप सभी को मानते हो वह बुरा है।” महत्मा गांधी जी के इस निर्मल उदय ने लगभग पूरे भारत को भारतीय राष्ट्रवाद के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय राष्ट्रवाद का विकास लगभग  दो से तीन अलग-अलग चरणों में हुआ।

क्या आपको पता है कि यह हमारे देश मे भारतीय राष्ट्रवाद का तीसरा चरण था।  जिसने हमारे मोहनदास करमचंद गांधी के इस बेहतरीन और संघर्ष शील उदय को  देखा, जिन्होंने पूर्ण रूप से  अहिंसा और किसी खास तरह के सत्याग्रह के प्रमुख सिद्धांतों पर केंद्रित लगभग सभी अपनी उपन्यास पूर्ण रूप से राजनीतिक विचार धाराओं के साथ हमारे  देश भारत को एक बड़े तूफान से घेर लिया। 

इन लगभग वैचारिक और औजारों से लैस गांधी ने उन सभी तरह के सभी महत्वपूर्ण घटनाओं में बेहतरीन तरह से अपनी सारी जिम्मेदारियों को अच्छे ढंग से निभाया जो अंततः जो हमारे देश भारत को स्वतंत्रता के मार्ग पर ले गईं और एक नई रास्ट्र का रूप धारण किया। 

भारतीय राजनीतिक के पूरे  परिदृश्य पर महात्मा गांधी जी का उदय और उनका आदर्श विचार एक अन्य उभरते हुए नए नेता या एक बेहतरीन और स्वभाविक मनुष्य का मात्र उदाहरण नहीं था, बल्कि यह एक बेहतरीन तरह का नए मार्ग दर्शन का उदय था जो हमारे देश भारत को भारतीय मानस के लगभग  हर एक क्षेत्र में व्याप्त था।

देश का विभाजन और आजादी

दोस्तो हमने पहले ही जाना कि कहा जा चुका है, लगभग द्वितीय ( वर्ल्ड वॉर ) यानी विश्व युद्ध के तुरंत ही समाप्त होते-होते अंग्रेजी सरकार ने अपने देश भारत को  सम्पूर्ण रुप से आज़ाद करने का एक छोटा  संकेत दे दिया था। गाइस भारत की आजादी के सभी तरह के आन्दोलन के साथ ही साथ , मोहम्मद अली जिन्ना के भीषण नेतृत्व में एक 

‘अलग अलग मुसलमान को बाहुल्य देश’ (पाकिस्तान) की भी मांग जोरो सोरो तीव्र हो गयी थी और लगभग 40 के दशक ही में इन सभी ताकतों ने एक अलग  तरह का राष्ट्र  ‘पाकिस्तान’ की मांग को वास्तविकता में बदल दिया था। गाँधी जी देश का बंटवारा नहीं चाहते थे क्योंकि यह उनके अलग ही बात था उनका धार्मिक एकता को ले कर के उनके सिद्धांत से बिलकुल आमतौर पर अलग था पर ऐसा हो न पाया और अंग्रेजों ने जाते जाते हमारे देश भारत को लमसम  दो टुकड़ों –  पाकिस्तान और भारत जैसे दो राष्ट्र  – में विभाजित कर दिया।

महात्मा गाँधी जी की हत्या किसने की और कैसे हुई?

गाइस क्या आपको मालूम है कि उस दिन क्या हुआ था। तारीख था 30 और महीना था जनवरी  और रहा बात साल का तो वो इज 1948  उसी दिन को हमारे  राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की दिल्ली के कसी जगह पे एस्थित  ‘बिरला हाउस’ में शाम 5 बजे के अंतराल पर हमारे राष्ट्रपति महात्मा गाँधी जी हत्या कर दी गयी। क्या आपको मालूम है।

 कि उस दी महात्मा गाँधी जी एक प्रार्थना सभा को अच्छे ढंग से संबोधित करने जा रहे थे तभी उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे ने उनके सीने पे गोली साध कर के उनके साइन  में 3 गोलियां मार दिया । ढेर सारे लोगो के ऐसे माना जाता है की  महात्मा गाँधी जी के मुख से मरते समय ‘हे राम’ उनके मुख से निकले अंतिम शब्द थे। और महात्मा गाँधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और उसके ऊपर  काफी ज्यादा केस मुकदमा चलाया गया और तकरीबन 1949  में उन्हें  फांसी , मौत की सजा सुनाई गयी।

मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना मध्यप्रदेश 2021

    [ Conclusion,निष्कर्ष ]

दोस्तो आशा करता हूं कि आप को मेरा यह लेख Mahatma Gandhi biography in Hindi आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से और सभी चीजों के बारे में विस्तार से समझ गए होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे। दोस्तों हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको बहुत ही बेहतरीन तरीके से 

महात्मा गांधी के जीवनी और उनके संघर्षशील कहानियों, और उनके द्वारा किये गए लगभग सभी आंदोलन  के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी है। और दोस्तों मेरा आप पर संपूर्ण विश्वास है कि आप भी इस लेख को तहे दिल से पूरे अंत तक पढ़कर महात्मा गांधी के बारे में सभी जानकारी को अच्छे से प्राप्त कर चुके होंगे और जान चुके होंगे कि महात्मा गांधी जी

हमारे देश के लिए क्या-क्या कर चुके हैं। अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं। हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

दोस्तो हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से

धन्यवाद………

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