नमस्कार दोस्तों आशा करता हूं आप बिल्कुल ठीक होंगे आपका हार्दिक स्वागत है हमारे इस लेख में आज के इस लेख के मदद से हम बुधिया सिंह का जीवन परिचय ( Budhia Singh biography in hindi ) के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं और इसके बारे में जानने भी वाले हैं। आपको तो मालूम ही होगा कि हमारे देश भारत में तरह तरह के लोग रहते है, जिन में कई सारे तरह तरह का टैलेंट होता है।

बच्चों से लेकर बड़ों बुजुर्ग  तक, कई ऐसे टैलेंट है जिन के बारे में हमने TV, समाचार पात्र या न्यूज़ में जरूर सुना या देखा है कभी कोई बच्चा Google boy बन जाता है, जो की जोड़ घटाना के मामले में कैलकुलेटर से भी तेज कर दिखाता है।

तो दोस्तों  ऐसे ही एक अद्भुत talented लड़का है बुधिया सिंह जो कि कुछ सालों पहले आपने talent के बारे में TV में बहुत चर्चित है, ये वही लड़का है जिसने 4 से 5 साल की उम्र में तकरीबन 65 किलोमीटर की marathon race में हिस्सा लेकर लिम्का World Record Book में नाम दर्ज कराया था।

बुधिया सिंह की कहानी किसी film की  स्टोरी से बिल्कुल भी कम नहीं है, जन्म से लेकर अभी तक, उसकी लगभग सब कुछ एक स्टोरी की तरह लगता है । इतना महान तेज धावक बुधिया सिंह का आज कही भी कोई अता पता नहीं है, देश की गन्दी राजनीती और सरकार के मामले में फंसकर बेचारा कही गुम गया है।

मगर कई सारे ऐसे लोग हैं जो बुधिया सिंह के जीवनी के बारे में जानना चाहते हैं इसलिए हमने इस लेख को लिखा है और इस लेख में बुधिया से जुड़ी सभी जानकारी बताने की कोशिश की है।

अगर आप सच में दुधिया सिंह से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से मेरा अनुरोध है कि मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको मेरा या लेख अच्छे से समझ में आएगा तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।

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बुधिया सिंह कौन है ?

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दोस्तों अगर आपके मन में यह ख्याल है कि आखिर बुधिया सिंह कौन है तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बनी रहे क्योंकि हम इस टॉपिक में आपको बताएंगे कि बुधिया सी कौन है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए ।

हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बुधिया सिंह एक धावक है जो कि बेहद कम उम्र में अपना नाम बनाए हुए हैं यह लगभग 19 से 20 वर्ष के हैं और इन्होंने 4 से 5 वर्ष के उम्र में ही 7 घंटे 2 मिंट में उन्होंने  65 किलोमीटर की दूरी तै कर के एक नया और बेमिशाल मैराथन  रिकॉर्ड बना दिया था।

दोस्तों यह तकरीबन 5 से 6 साल पहले पूरे मीडिया में छाए हुए थे क्योंकि इन्होंने बहुत ही कम उम्र में बहुत ही बड़ा काम कर दिया था मैराथन निकाल दिया था जो कि एक आम बचा के लिए बहुत ही बड़ा बात है। लेकिन उस समय का धावक बुधिया इस समय के युग में विलुप्ति के कगार पर है।

तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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बुधिया सिंह के जन्म से जुड़ी बातें।

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दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया सिंह के जन्म से जुड़ी कुछ जरूरी बातें कुछ जानने वाले हैं अगर आप इन में इंटरेस्टेड हैं तो हमारे साथ अंत तक बने रहे तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि बुधिया सिंह का जन्म वर्ष 2002 में उड़ीसा के भुनेस्वर सहर के एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था।

दोस्तों अगर हम बुधिया सिंह के परिवार के बारे में बात करें तो उस के परिवार में उस के तीन भाई बहन है। दोस्तों अगर हम बुधिया के जन्म से जुड़ी बातें करें तो बुधिया जब तकरीबन 2 साल का था तब उस के पिता की मौत किसी कारण वश हो गई थी, जिस से बुधिया की पूरी पालन पोषण की ज़िम्मेदारी उसके माँ के  कंधो पर आ गई था। दोस्तों जैसे कि हमने आपको ऊपर ही बता दिया था कि बुधिया अत्यंत गरीब परिवार से बिलॉन्ग करता है तो इस लिए बुधिया की माँ किसी दूसरों के घर में बर्तन धोने,

झाड़ू-पोछा कर के बुधियाके लिए पैसा कमाती थी और अपने बच्चों को पालती पिसती थी। दोस्तों  एक बार की बात है कि बुधिया की माँ बीमार पड़ गई, और उस के घर में दवाई के लिए कुछ भी पैसे नहीं थे, ऐसे में बुधिया के माँ के लिए घर के चार बच्चों के खाने पीने का इंतजाम करना और जुगाड़ करना तो पहले से ज्यादा और भी मुश्किल था। तब बुधिया की माँ सुकांति ने अपने घर चलाने के लिए पैसों के लिए अपने बेटे बुधिया को किसी एक फेरीवाले से सौदा कर के वर्ष 2004 में तकरीबन 800 रुपय में बेच दिया।

वो फेरीवाला बुधिया को बहुत प्रताड़ित करता था उसे मरता था पिटता था और कई कई बार तो वो  , बिधिया को खाने को भी नहीं देता था। ये सब जब उसकी माँ ने देखा और उनको उस फेरीवाले की बात का पता चला तो उसका कलेजा तड़प उठा, लेकिन उन के माँ के पैसों की तंगी की वजह से वो उसे वापस अप ने पास भी नहीं ला पा रही थी क्योंकि उन्होंने बुधीया को 800 रुपयों के लिए बेचा था तो वो अगर बुढ़िया को मांगने जाती तो बिधिया को लाने के लिए फेरीवाले को 800 रुपयों देने पड़ते।

तभी वो अपने घर के पास के ही अनाथालय में गई, जिसे बिरंची दास नामक ब्यक्ती चलाते थे, और वहां बच्चों को जुडो जैसे खेल की ट्रेनिंग दिया करते थे। बुधिया की माँ ने बिरंची से विनती की कि वो उस के बच्चे को किसी तरह फेरीवाले से वापस ले आये। बिरंची बहुत नेक दिल के मनुष्य थे और दयालु भी थे, उन्होंने फेरीवाले को तकरीबन 800 रुपये दे कर के बुधिया को अपने अनाथालय ले आये, और उसे अपने ही आश्रम में बाकी बच्चों की तरह पनाह दी ।

यहाँ बिरंची के पास बुधिया के साथ साथ ढेर सारे बचो की लीगल कस्टडी थी। तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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बुधिया सिंह करियर (Budhiya singh career in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया सिंह के करियर से जुड़ी सभी जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नन्हे बुधिया सिंह का जीवन अनाथालय में आने के बाद बहुत बदल गया, और फिर उस नन्हे बुधिया सिंह का वापस अपना बचपन मिल गया, जहाँ वो अपने मन की बाते भी कर सकता था, और आने मन के अनुसार खेल-कूद सकता था, उस नन्हे बुधिया सिंह को यहा अनाथालय में भर पेट खाना भी खा सकता था।

क्या आपको मालुम है कि एक बार बिरंची दास अपने किसी काम को ले कर के उस में मशरूफ थे, तभी उस के आस पास बुधिया हल्ला करने लगा और बिरंची दास के साथ साथ छोटे छोटे बच्चों को परेशान करने लगा।

तब उस अनाथालय के मालिक बिरंची दाश ने नन्हे बुधिया सिंह को गुस्से में सजा दी, और कहा फील्ड के दौड़ कर के चक्कर लगाओ जब तक को रुकने को न कहे तब तक रुकना मत। नादान बुधिया अप ने पिता समान गुरु को बहुत ही मान देता था, उस के चक्कर  में नन्हे बुधिया सिंह ने मैदान में दौड़ लगाने शुरू किये और तकरीबन 5 घंटे तक लगातर दौड़ता रहा था । तब उस अनाथालय के मालिक बिरंची दाश ने तो भूल ही गए कि उन्होंने बुधिया को सजा भी दी था।

तकरीबन 5 घंटे के बाद जब वे बाहर निकल कर देखे तब, मैदान में नन्हे बुधिया सिंह तो मैदान के चक्कर लगाते देखा, जिसे बिरंची दाश देख कर वे चौंक ही गए। इस के बाद वे नन्हे बुधिया सिंह की हार्ट बीट और मेडिकल चेक उप भी की गई, तो वह  बिलकुल सामान्य बच्चों की तरह ही थी। यहाँ बिरंची दाश ने बुधिया की इस महान प्रतिभा और उसके कला को पहचान और उस को जान लिया और बोला कि , देश को सबसे छोटा धावक मिल गया है।

बिरंची दास ने नन्हे बुधिया सिंह को अपना शिष्य मान लिया, और  उसकी बेजोड़ प्रतिभा और उसकी साहस को और निखारने के लिये उसे आगे बढ़ने के लिए कड़ी ट्रेनिंग देने लगे। बिरंची दाश उसकी प्रतिभा को सब के सामने लाना चाहते थे, वे चाहते थे की नन्हे बुधिया सिंह देश का नाम रोशन करे। उसकी ट्रेनिंग के लिए बिरंची बुधिया के साथ सुबह  में तकरीबन 4 बजे से दौड़ते थे, और 3 वर्ष का छोटा  बुधिया सिंह सा बालक लगा तार 3 से 4 घंटे बस दौड़ता रहता था। 

इसके बाद नन्हे बुधिया सिंह को शाम को भी उसे ट्रेनिंग दी जाती थी। रोज की 7 से 8 घंटे की बेजोड़  ट्रेनिंग के बाद बुधिया एक अच्छा धावक भी बन गया था। चार साल की उम्र तक बुधिया से 48 मैराथन में बेजोड़ प्रदर्शन कर के हिस्सा लेकर उसे पूरा किया था। तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

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मैराथन बॉय बुधिया (Marathon boy Budhia singh in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया सिंह के मैराथन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि तारिक 2 महीना मई शाल 2006 को उड़ीसा में तकरीबन 65 किलो मीटर की marathon race भी भीषण रुप से आयोजित हुई, जो भुवनेश्वर से पूरी के बीच 65 किलोमीटर की थी।

जिस में बड़े बड़े लोगों ने इस marathon में हिस्सा लिया, लेकिन एक नन्हे 4 वर्षीय बच्चें ने उस समय पूरी लाइमलाइट और लोगो को आकर्षक अपनी ओर कर ली।

बुधिया ने उड़ीसा के भुवनेश्वर शहर से तकरीबन 4 बजे सुबह मैराथन शुरू की, और तकरीबन 7 घंटे 2 min बाद जगन्नाथ पूरी के जगह में समाप्त की थी । 65 KM की इस रेस को पूरा करने वाला ये पहला बच्चा बुधिया सिंह था, जिसका नाम लिम्का Book of World Record में भी दर्ज किया गया। यहाँ बुधिया का जीवन पूरे तरह से बदल गया।

उड़ीसा के छोटे से गाँव के छोटे से बच्चे को पूरी तरह से popularity मिल गया। इस रेस को सभी सभी समाचार पत्र,न्यूज़ चैनल, में दिखाया गया। तो दोस्तों कुछ इस तरह से बुधिया सिंह की मैराथन कहानी समाप्त होती है और यह ही इनको जीरो से हीरो बना देती है।

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बुधिया सिंह कंट्रोवर्सी (Budhia singh controversy in hindi)

दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया सिंह जुड़े कुछ कंट्रोवर्सी के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहे तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Marathon boy बनने के बाद, बुधिया सिंह एक छोटा स्टार भी बन गया।

उसे TV पर बहुत से Ads और film के काम करने के offer भी मिलने लगा। इसके अलावा लोग उसे कई जगह guest यानी कि मेहमान के रूप में बुलाने लगे। काम बढ़ने के कारण बुधिया को पैसा भी बहुत अच्छा खशा मिलने लगा, जिस से उस की तत्कालीन स्थिति  धीरे धीरे सुधर गई ।

इस के बाद सब बुधिया पर अपना मालिकाना हक जताने लगे, उसकी माँ भी इस बात को ले कर के कोर्ट पहुँच गई और उस अनाथालय के मालिक बिरंची दास के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। उस अनाथालय के मालिक बिरंची दास पर आरोप लगा कि उसने अप ने फायदे के लिए नन्हे बुधिया सिंह  का उपयोग किया।

महीना जनवरी में शाल 2006 में भारतीय बाल कल्याण अधिकारियों ने उस अनाथालय के मालिक बिरंची दास पर आरोप लगाये, और छोटे बच्चे से काम कर वाने और बच्चों को सोसित करने का आरोप लगाया, लेकिन इन सभी आरोपों का उस अनाथालय के मालिक बिरंची दास ने खंडन किया। और इन सभी आरोपो को इनकार कर दिया।

बुधिया पर अब तरह तरह की कंट्रोवर्सी गर्माने लगी थी, तत्कालीन सरकार ने बुधिया के कई सारे जांच के आरोप दिए। जांच के बाद कहा गया कि बुधिया शारीरिक रूप से धीरे धीरे कमजोर है, उसके सेहद के लिए इतना दौड़ना ठीक नहीं है। जिस के बाद नन्हे बुधिया सिंह को बिरंची दास के पास से ले कर भुवनेश्वर के किसी सरकारी हॉस्टल में रखा गया। नन्हे बुधिया सिंह की मेडिकल रिपोर्ट कभी भी सरकार ने सामने नहीं लाइ, जिस से इस केस में सन सनी बनी रही।

बुधिया के दौड़ने पर इसी कारण पाबन्दी लगा दी गई, और उसे किसी भी मैराथन में हिस्सा न लेने को कहा गया।

तो दोस्तों कुछ इस तरह से बुधिया सिंह पर कंट्रोवर्सी होने लगी और धीरे-धीरे बुधिया सिंह अपने दौड़ से बिछड़ने लगे और वह दौड़ना बंद कर दिए थे उसी के कारण आज उनका हालत यह है कि वह कुपोषण का शिकार है और वह किसी भी मैराथन दौड़ में भाग नहीं ले सकते हैं। तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

बिरंची दास की हत्या (Biranchi das death in hindi )

दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया की कोच बिरंचि दाश की हत्या से जुड़ी कुछ जानकारी को प्राप्त करने वाले हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ बने रहिए तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि ।

( दोस्तों अगर आप नहीं जानते हैं कि बिरंचि दाश कौन है तो हम आपकी छोटी सी जानकारी के लिए बता दें कि बिरंचि दाश बुधिया के कोच है जिन्होंने  फेरीवाले वाले को पैसा देकर के बुधिया को अपने अनाथालय में बना दी थी और उसे दौड़ की ट्रेनिंग के साथ-साथ उसका मैराथन में हिस्सा भी लिवाया था और उसे एक सफल धावक बनाने की सपत भी ली थी ।

मगर कुछ कारण की वजह से उनका शपथ सफल नहीं हो पाया और वह बुधिया को ओलंपिक में नहीं भेज पाए बुधिया का कोच बिरंचि दाश का यह सपना था कि वह बुधिया को दुनिया का सबसे बड़ा मैराथन ओलंपिक रेस में जीता पाए और बुधिया के वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज करवा पाए)

तारिक 13 महीना अप्रैल वर्ष  2008 को बिरंची दास की उड़ीसा के भुवनेश्वर सहर में कुछ लोगों ने  गोली मार कर के हत्या कर दी और वहा से भाग खड़े हुवे। इस के बाद बुधिया सिंह का पुलिस केस फिर लोगों के सामने आ गया। बिरंची दाश की रहस्यमयी हत्या को बुधिया सिंह केस से सम्पूर्ण तरह सर जोड़ा गया । क्या आपको मालूम है कि पुलिस के अनुसार तारिक 13 अप्रैल को बिरंची दास BJB college  में थे, वे वहां जुडो की जबरदस्त ट्रेनिंग दिया करते थे,

यहाँ राजा आचार्य और उस के कुछ साथियों ने मिल कर के  बिरंचि दाश की गोली मार के मौत के घाट उतार  दीया उनके बारे में कुछ ऐसा भी कहा जाता है कि कहते है बिरंची ने मॉडल लेसली त्रिपाठी का सपोर्ट भी किया, जिसे गैंगस्टर राजा आचार्य  पूरे तरह से परेशान करता था। 

बिरंची दाश की मौत से सरकार भी पूरी तरह से हिल गई, और सियासत को और गरमा दिया। बिरंची दाश के कातिल राजा व चागला की बहुत खोज की गई, इन्हें गिरफ्तार बजी कर तारिक 13 महीना दिसम्बर वर्ष 2010 को Fast Track Court के द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तो दोस्तों कुछ इस तरह से ही बिरंचि दास की हत्या कर दी गई थी और उनके हत्यारे की सजा भी दी गई थी।

क्यूँ नहीं बन पाया बुधिया महान धावक

दोस्तों इस टॉपिक में हम आपको बताएंगे कि नन्हा बुधिया सिंह आखिर क्यों नहीं बन पाया बड़ा धावक क्योंकि उसके पीछे की कहानी बहुत मजेदार है तो चलिए जानते हैं इस टॉपिक के बारे में और शुरू करते हैं इस टॉपिक को हम आपके जानकारी के लिए बता दें कि नन्हे बुधिया की महान धावक नहीं बन पाया, इस का कही न कही  बहुत दोष सरकार के उपर भी जाता है।

जिस उम्र में बुधिया सही को जबरदस्त ट्रेनिंग मिलनी थी, उसे दौड़ने पर सरकार द्वारा पाबन्दी लगा दिया गया । सरकार चाहती तो अपनी देख रेख में उसे किसी उचित व्यक्ति द्वारा ट्रेनिंग दे सकती थी। लेकिन सरकार ने ऐसा नही किया।

कल का बुधिया सिंह जो सूरज की तरह चमक कर के पूरा भारत को रौशन करने वाला था, मगर आज वही बुधिया सिंह किसी अंधकारी गलियों में कही गुमनाम हो गया है।

भुवनेश्वर के sports hostel में रह रहा बुधिया, 14 साल का हो चूका बुधिया अब कुपोषण से ग्रसित है।65 किलोमीटर की मैराथन जीतने वाला नन्हा बुधिया सिंह अब 100 मीटर की स्कूल रेस भी जीत नहीं पाता है।

बिरंची दास ने कहा था कि बुधिया सिंह शाल 2016 में भारत को स्वर्ण पदक दिलाएगा, लेकिन बिरंची की मौत के साथ साथ उनका सपना भी उनकी यादों में दफन हो गया।

दोस्तों यही सब कुछ बेजान कारण है जिनकी वजह से आज बुधिया सिंह  हैं कुपोषण के शिकार हैं और वह एक बड़े धावक भी नहीं बन पाए और उन के कोच बिरंचि दास का सपना भी पूरा नहीं हो पाया और भारत का जीता जागता एक कला को दफन कर दिया गया। तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं। तो चलिए दोस्तों इस टॉपिक को अब हम समाप्त करते हैं और अगली टॉपिक में बुधिया सिंह से जुड़ी कुछ और जानकारी को प्राप्त करते हैं।

बुधिया सिंह बोर्न टू रन मूवी (Budhia singh Born to Run movie in hindi )

Watch Budhia Singh: Born to Run | Prime Video

दोस्तों इस टॉपिक में हम बुधिया सिंह पर बनी फिल्म के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो आप हमारे इस टॉपिक के साथ अंत तक बने रहे तो चलिए शुरू करते हैं टॉपिक को बिना देरी किए हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह बुधिया सिंह के इस कहानी पर और उनकी जीवन पर एक फिल्म बनाई गई है जिसका नाम है बोर्न टू रन मूवी ( Born to run movie) फिल्म में मनोज बाजपेयी कोच बिरंची दास बने है ।

बुधिया सिंह की भूमिका में मास्टर मयूर को फाइनल किया गया है. फिल्म को विदेश में एक कार्यक्रम में दिखाया गया था, जहाँ इसे बहुत पसंद किया गया है। इस फिल्म के द्वारा बुधिया सिंह की कहानी को हम और करीब से जान पायेंगें, और समझ पायेंगें की आखिर गलती किसकी है।

अगर आप ने बुधिया सिंह के इस प्रेन्दनदायक कहानी को पढ़ा होगा तो आको मालूम चला होगा कि बुधिया सिंह का विकास रोकने में कहीं न कहीं हमारी सरकार और लगभग हम भी ज़िम्मेदार है।

जब फिल्म आ रही है, तो इस बच्चे को याद किया जा रहा है, 8 साल से ये कहाँ था, किस हाल में था, इसकी किसी को कोई परवाह नहीं थी. एक न्यूज़ चैनल के अनुसार उन्होंने बुधिया का इंटरव्यू लिया था, जिसमें बुधिया ने बोला है, वो पूरी तरह से स्वस्थ है, और हॉस्टल में रहता है. उसने कहा उसका किडनैप नहीं हुआ है, वो कभी कभी अपनी माँ से मिलता है.

[अंतिम विचार , Conclusion]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख  बुधिया सिंह का जीवन परिचय (Budhia Singh biography in hindi) पर  यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी जानकारी को पूरे विस्तार से प्राप्त कर चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे।

इस लेख में हमने सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको बुधिया सिंह का जीवन परिचय से जूड़ी सभी जानकारी के बारे में स्टेट बाय स्टेट लिख कर के आप को समझाने की कोशिश की है वह तो हमने बताया है कि बुधिया कौन है,  बुधिया कैसे छोटी उम्र में marathon जैसे दौड़ को भी निकाल लेता था ।

बुधिया सिंह के जन्म से जुड़ी बातें,  और बुधिया सिंह करियर और आर्टिकल के अंत में हम लोग बात किए हैं कि बुधिया सिंह कंट्रोवर्सी से जुड़ी कुछ बातें और आपको बताया है कि  क्यूँ नहीं बन पाया बुधिया महान धावक, और बुधिया  के कोच बिरंची दास की हत्या  कैसे हुई उसके बाद हम लोग बुधिया सिंह बोर्न टू रन मूवी के बारे में जाने हैं  दोस्तों अगर आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा ध्यान से पढ़े होंगे तो आपको इन सारी जानकारियों के बारे में जरूर  ज्ञान मिला होगा और आप इन सारी जानकारियों से जुड़ी सारी बातों को जान चुके हो

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं।

हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट बुधिया सिंह का जीवन परिचय (Budhia Singh biography in hindi) के बारे में जानकारी आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे। तो चलिए दोस्तों इसी जानकारी के साथ हम अब इस लेख को समाप्त करते हैं और अगर आपको हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद………

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