Aurangzeb biography in Hindi – औरंगजेब की सम्पूर्ण जीवनी 

दोस्तों आज के इस आर्टिकल के मदद से हम Aurangzeb biography in Hindi औरंगजेब की सम्पूर्ण जानकारी  के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरे विस्तार से प्राप्त करने वाले हैं। गाइस अपने इतिहास में औरंगजेब के बारे में जरूर कुछ ना कुछ सुना होगा और इस शासक का नाम पढ़ते समय आपके ख्याल में जरूर आ रहा होगा। 

अगर आप अपने मन में यह सोच रहे हैं कि आखिर औरंगजेब है कौन और औरंगजेब की क्या इतिहास रही है इसने हमारे इतिहास में क्या-क्या भूमिका निभाया है। दोस्तों हम सब ने आपके इस समस्याओं को हल करने के लिए इस लेख में यह बताया है कि औरंगजेब की पूरी जीवनी और उसका पूरा इतिहास के बारे में संपूर्ण जानकारी पूरा विस्तार से दिया हुआ है। 

दोस्तों अगर आप सच में औरंगजेब के पूरे जीवनी और उसके ऐतिहासिक कहानी के बारे में जानना चाहते हैं तो आप कृपया करके इस पोस्ट को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको औरंगजेब के बारे में पूरे अच्छे से समझ में आएगा। तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए और जानते हैं औरंगजेब की जीवनी के बारे में दोस्तों।

औरंगजेब की जीवनी जानने से पहले हमें यह जानना बेहतर रहेगा कि आखिर औरंगजेब है कौन तो चलिए जानते हैं क्या औरंगजेब है कौन

Aurangzeb biography in Hindi।

दोस्तो क्या आपको पता है कि औरंगजेब आमतौर पर चौथे मुगल बादशाह शाहजहाँ का तीसरा बेटा था। क्या आपको पता है कि औरंगजेब का माता जी का नाम मुमताज महल थी उन्होंने ही कुछ बाद में शाहजहां के जीवन में उन्हें काफी ज्यादा प्रसिद्ध ताजमहल बनाने के लिए जोरो सोरो से प्रेरित किया। क्या आपको मालूम है कि औरंगज़ेब का पूरा नाम जो उसके जन्म के बाद रखा गया था वो नाम  मुस अल-दीन मुहम्मद था और उनका जन्म तारिक 3 को महीना नवंबर, के साल 1618 को धोद, मालवा, जगह पे भारत में हुआ था। 

औरंगजेब जैसे जैसे बड़ा होते गया उसके साथ ही साथ ही बहुत गंभीर दिमाग वाला बच्चा भी बनते गया। क्या आपको पता है कि एच एक बेहद वाले समर्पित सुन्नी मुसलमान थे जो बेहतरीन स्वभाव से काफी ज्यादा रूढ़िवादी मनुष्य में से एक थे। उन्होंने अपने जीवन में सबसे पहले, औरंगजेब ने  प्रशासनिक क्षमताओं के साथ साथ सैन्य का विकास बेहतर तरीका से किया। उनके इस बेहतरीन उच्च गुणों की राज्य में कई सारे लोगों ने इसकी काफी काबिले तारीफ की।

 आगर हम औरंगजेब की सत्ता के स्वाद के बारे में बात करे तो वे इन सभी उच्च उच्च गुणों ने उन्हें लगभग पूरे मुगल साम्राज्य के सिंहासन और सत्ता के लिए अपने ही सबसे बड़े भाई के साथ एक बेहतरीन प्रतिद्वंद्विता के रूप में ला दिया। लगभग साल 1657 में जब शाहजहाँ  बड़े ही गंभीर रूप से बीमार हो कर पस्त पड़ गए थे, तो उस समय उनके सिंहासन के बेहतर उत्तराधिकार की होड़ मच गई और दौड़ शुरू हो गई और उस समय मे शाहजहाँ ने अपने सबसे बड़े बेटे जिसका नाम दारा था उसी का का पक्ष लिया, 

लेकिन उस समय के राज्य के कई सारे मंत्रियों और अलग अलग सलाहकारों ने उसे उस पद के लिये अयोग्य के रूप में देखा और बोला कि ये हमारे सिंहासन के बेहतर उत्तराधिकार के योग्य नही है क्योंकि वह बहुत सारी तरह के सांसारिक था। गाइस क्या आपको पता है कि उस समय के अनुसार लोगो का यह मानना है कि औरंगजेब, अपने बड़े भाई की तुलना में बहुत अधिक और बेहतर  प्रतिबद्ध पुत्र था, जिसे लोगों ने अपनी ओर से पसंद किया था। मुगल साम्राज्य के सिंहासन के बेहतर उत्तराधिकार के लिए उन दोनों भाइयों के बीच काफी ज्यादा तनाव बढ़ गया और धीरे धीरे ऐसा लगने लगा कि उनके बीच अब युद्ध अवश्यंभावी है। 

Mahatma Gandhi biography in Hindi

औरंगजेब ने साल 1657 से  ले कर के साल 1659 की इन्ही सभी अवधि के बीच सिंहासन के बेहतर उत्तराधिकार के लिए काफी ज्यादा संघर्ष दिखाया और इस अवधि के दौरान औरंगजेब ने सिंहासन के बेहतर उत्तराधिकार के लिए अपने भाई दारा के खिलाफ काफी भिसड क्रूर दृढ़ संकल्प, प्रसार की बहुत  महान से महान शक्ति और उत्कृष्ट सामरिक और रणनीतिक और सैन्य कौशल को बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित किया । कई सारे अलग अलग यरह के योजना और रणनीति के साथ, उनका औरंगजेब ने महीना मई और साल1658 में समुद्र में अपने बड़े भाई दारा को हराया। 

गाइस जब दो भाइयों के बीच दारा और औरंगजेब के बीच युद्ध चल रहा था, तब तक शाहजहाँ बिलकुल अच्छे यरह से ठीक हो गया और फिर से खुद उसी सिंहासन पर बैठा, लेकिन गाइस  जैसे ही औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा  को समुद्र में हराया, उसने अपने खास पिता को आगरा में अपने महल में ही कसी कारागार में सीमित कर दिया।

 उस समय औरंगजेब के सत्ता में आने के बाद औरंगजेब ने आने एक सबसे छोटे भाई को तुरंत मौत के घाट उतार दिया और अपने परिवार के दो अन्य भाइयों के साथ ही साथ, एक बेटे और एक भतीजे को उसी समय मौत के घाट उतार दिया।

औरंगजेब शासन काल के सम्पूर्ण जानकारी।

 दोस्तो हमने ऊपर जाना कि औरंगजेब कौन था और उसके निजी जीवन के बारे में अब हम जानने वाले है कि औरंगजेब कि शासन काल से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी के बारे में। दोस्तो क्या आपको मालूम है कि औरंगजेब के 49 से 50 साल के बेहतरीन शासनकाल को मैं आपको बता दु की  मुगल साम्राज्य का ये बेहद सुखी और “स्वर्ण युग” कहा जाता है। गाइस  औरंगजेब ने साल 1658 से ले कर के साल 1707 तक पूरे मुगल साम्राज्य पर काफी बेहतरीन तरीका से शासन किया। और उस समय उसका शासन को लगभग एकदम दो  बराबर भागों में  ही बंट दिया गया था। 

दोस्तो उसका पहला भाग लगभग साल 1680 तक चला। जो कि उसमे वह एक बेहतर सम्राट के साथ ही साथ वह एक धार्मिक सुन्नी और एक बेहतर मुसलमान थे, उन्होंने गाइस आम तौर पर उनकी बेहतरीन बेहतरीन तरह के  निर्ममता के लिए उन्हें अब काफी तरीके से नापसंद किया जाने लगा, लेकिन उनके असाधारण सैन्य और उनके बेहतरीन प्रशासनिक और तरह तरह के कौशल के कारण उन्हें काफी ज्यादा इज्जत , डर और सम्मान दिया जाता था। 

औरंगजेब ने अपने शासन के बेहतरीन  शुरुआती दिनों के दौरान उन्हें काफी ज्यादा, उन्होंने फारसियों और ढेर सारे अलग अलग मध्य एशियाई तुर्कों से तकरीबन  उत्तर-पश्चिम की रक्षा की और उनका मराठा प्रमुख लगभग शिवाजी महाराज के साथ भी उनका भीषण रूप से संघर्ष था।

उस समय उसने शाल 1664 में लगभग दो से तीन बार सूरत के सबसे महान और बेहतरीन बंदरगाह और औरंगजेब से शाल 1670 के अंतराल में चोरी की थी। औरंगजेब ने अपने परदादा की विजय की रणनीति को पुनः फिर से उसी तरह से उस का पालन किया जो दुश्मन को काफी बुरे ढंग से हराने, उनके साथ बेहतर तरीके से मेल-मिलाप करने और उन्हें बेहतर से बेहतर शाही सेवा में रखने के लिए ही थी।

और गाइस इसी कारण के लिये शिवाजी उस समय औरंगजेब से जंग हार गए होंगे और उन्हें शाल 1667 में इस पे थोड़ी बहुत विचार विमर्श कर के इस मामले को सुलह के लिए उन्हें बुलाया गया, लेकिन वे उड़ गए और बाद में लगभग शाल 1668 में मराठा साम्राज्य के बेहतर स्वतंत्र शासक के रूप में उनकी मृत्यु उसी समय किसी कारण से हो गई। सन 1680 के बाद पूरे मुगल साम्राज्य के चलने के नजरिए और नीतियों में बदलाव आया। औरंगजेब, एक रूढ़िवादी मुस्लिम शासक रहा है, जिसने मिश्रित राज्य के अनुभवी बयान को बदल दिया। 

पिछले शासकों के शासनकाल के  वक्त हिंदू सहयोगी थे लेकिन अब औरंगजेब के शासन काल के अधीन, वे अधीनस्थ थे। मुगल बादशाह औरंगजेब के राज्य के चलने के तरीके में बदलाव का पहला संकेत वर्ष 1679 में गैर-मुसलमानों पर फिर से चुनाव कर या जजिया लगाना था। अतीत में, मुगल बादशाह अकबर द्वारा कर को समाप्त कर दिया गया था। इससे मुगल राज्य में धार्मिक तनाव पैदा हो गया जिसके कारण कई हिंदुओं समाजा ने सम्राट की सेवा की, लेकिन कभी भी उसके प्रति वफादार नहीं रहे।

इस वजह से वर्ष 1681 में मुगल सम्राट के खिलाफ राजपूत विद्रोह हुआ था। मराठों के साथ युद्ध की शुरुआत वर्ष 1687 में हुआ और  बहुत जल्द ही सम्राट शिवाजी के बेटे संभाजी को पकड़ लिया गया और वर्ष 1689 में उन्हें  जान से मार दिया गया और उनका राज्य भी ले लिया गया। शिवाजी के संभाजी की मृत्यु के बाद, मराठा दक्षिण दिशा की ओर भाग गए और कुछ समय के लिए शांत रहे।  जिसकी वजह से औरंगजेब ने तब जाकर मराठा पहाड़ी देश के किलों पर पूरा कब्जा कर लिया। और अपना शासन जमा लिया 

मुगल बादशाह औरंगजेब ने आगे बढ़कर दक्षिण दिशा और उत्तर दिशा दोनों में मुगल साम्राज्य का विस्तार किया लेकिन उनके सैन्य अभियानों और लोगों के प्रति उनके द्वारा दिखाए गए  दुर्व्यवहार और धार्मिक असहिष्णुता ने उनके कई विषयों को नाराज कर दिया। उसने उत्तर दिशा में प्रशासन का नियंत्रण खोना शुरू कर दिया और सबसे खराब और कठिन  स्थिति के रूप में मुगल साम्राज्य का विस्तार हो गया और मुगल बादशाह औरंगजेब ने युद्धों के लिए भुगतान करने के लिए कृषि भूमि पर उच्च कर या टैक्स  लगाया। 

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सिखों समाज का कृषि विद्रोह शुरू हुआ क्योंकि उन्होंने भूमि पर अतिरिक्त कर लेना शुरू कर दिया था। पंजाब राज्य में बहुत सारे सिखों ने विद्रोह करना शुरू कर दिया  और  वर्ष 1675 में उन्होंने सिख गुरु, तेग बहादुर को मार दीया , जिन्होंने उनके नाम पर काम करने से साफ इनकार कर दिया था। विद्रोह के नए नेता,  सिखों के 10वा गुरु, गुरु गोविंद सिंह,  मुगल सम्राट औरंगजेब के शेष शासनकाल के लिए एक खुला विद्रोह थे। 

सामान्य तौर पर, मुगल बादशाह औरंगजेब को बहुत उग्रवादी, रूढ़िवादी और  क्रूर , सुन्नी मुसलमान माना जाता था। उन्होंने जबरदस्ती अपने विश्वासों और नैतिकता को अपने विषय द्वारा स्वीकार करने की कोशिश की जिसके कारण कई विद्रोह हुए और अंत में उनका मौत हुआ। मुगल बादशाह औरंगजेब ने आधी सदी तक साम्राज्य को बनाए रखा और उसने दक्षिण दीशा में भी क्षेत्र का विस्तार करना शुरू कर दिया और त्रिचिनोपोली  और तंजौर तक आ गया। 

जबकि मुगल बादशाह औरंगजेब दक्षिण दिशा में क्षेत्र का विस्तार करने में व्यस्त था, मराठों ने उत्तर में सभी शाही संसाधनों को समाप्त कर दिया। जाटों और सिखों द्वारा शुरू किए गए विद्रोह ने भी उत्तर दिशा में अतिरिक्त दबाव डाला। मुगल बादशाह औरंगजेब के रूढ़िवादी धार्मिक व्यवहार और हिंदू शासकों के प्रति धार्मिक नीतियों को थोपने से मुगल साम्राज्य की स्थिरता को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा।

औरंगजेब की मृत्यु 

मुगल बादशाह औरंगजेब 88 वर्ष का था जब 3 मार्च, 1707 को मध्य भारत में उसकी मृत्यु हो गई। जब मुगल बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हुई तो मुगल साम्राज्य अपने आखरी चरम पर था क्योंकि मुगल राज्य में कई विद्रोहों  हो रहा था जो औरंगजेब और उसकी मान्यताओं के खिलाफ थे। औरंगजेब बेटे, Bahadur Shah 1 के तहत मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे कम होने लगा और अंत में ब्रिटिश शासन काल के साथ समाप्त हो गया जब वर्ष 1858 में  मुगल राज्य के अंतिम मुगल सम्राट को निर्वासन में भेजा गया था। 

 औरंगजेब की विरासत 

मुगल बादशाह औरंगजेब को माना जाता है ” अंतिम महान मुगल सम्राट ”और उन्होंने 49 वर्षों तक इस पर शासन किया। और कई आलोचकों का कहना है कि उनकी निर्ममता और धार्मिक व्यवहार ने औरंगजेब को अपने साम्राज्य में मिश्रित आबादी पर शासन करने के लिए सबको गुलाम बना दिया। गैर-मुसलमानों पर जजिया  और शरिया धार्मिक कर लगाने और हिंदुओं पर सीमा शुल्क को दोगुना करने और हिंदू मंदिरों के विनाश के कारण उनके खिलाफ एक धार्मिक विद्रोह का छिड़ गया जिससे उनका  मृत्यु  हुआ।

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 [ Conclusion,निष्कर्ष ]

दोस्तो आशा करता हूं कि आपको मेरा यह लेख Aurangzeb biography in Hindi  औरंगजेब के जीवनी से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी आपको बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से वह सभी चीजों के बारे में पूरा विस्तार से जान चुके होंगे जिसके लिए आप हमारे वेबसाइट पर आए थे। गाइस हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको औरंगजेब के बारे में सभी जानकारी को अच्छे से बताया है और 

औरंगजेब की सभी जीवनी और उसके शासन काल के सभी महत्वपूर्ण बातों को अच्छे से मेंशन किया है।दोस्तों मेरा आप पर संपूर्ण विश्वास है कि आप इस लेख को तहे दिल से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और आप औरंगजेब से जुड़ी उसके ऐतिहासिक और उसके निजी जीवन के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे। 

अगर दोस्तों आपको इस पोस्ट में कहीं भी कोई भी किसी भी तरह को,पढ़ने में या किसी भी चीज में कोई भी दिक्कत हुई होगी तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बेझिझक कुछ भी सवाल पूछ सकते हैं। हमारी समूह आपकी मैसेज के रिप्लाई जरूर देगी और आप यह भी कमेंट में जरूर बताएं कि यह पोस्ट आपको कैसा लगा ताकि हम आपके लिए दूसरे पोस्ट ऐसे ही लाते रहे।

दोस्तो हमरा यह पोस्ट को पढ़ने के लिए दिल से

धन्यवाद………

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