मैरी कॉम का जीवन परिचय | Mary Kom Biography in Hindi 

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले हैं मैरी कॉम के जीवन कथा के बारे में क्योंकि मैरी कॉम एक ऐसी मुक्केबाज  खिलाड़ी है  जिसके के बारे में सबको जानना चाहिए। क्योंकि इनकी कहानी एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है। इन्होंने बहुत संघर्ष और मेहनत  करके  मुक्केबाज की क्षेत्र में भारत का नाम पूरे दुनिया में ऊपर किया है दोस्तों अगर आपको पता नहीं है तो हम आपको बता दें कि मेरी कॉम  6 बार की विश्व चैंपियन रह चुकी है। और वह यह कारनामा करने वाली दुनिया की पहली महिला है। इसलिए दोस्तों की आप हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े  क्योंकि इस आर्टिकल में हम लोग मैरी कॉम के जीवन कथा के बारे में पूरा विस्तार से बात करेंगे।  

इसके अलावा और हम लोग बात करेंगे मैरी कॉम की निजी जीवन, मैरी कॉम का करियर, मैरी कॉम के पुरस्कार, मैरी कॉम की संपत्ति और आर्टिकल के अंत में हम लोग बात करेंगे मैरी कॉम के बारे में 10 तथ्य के बारे में जिसके बारे में  आप नहीं जानते होंगे तो दोस्तों बिना टाइम  बर्बाद  हुए चलिए अब इस आर्टिकल को शुरू करते हैं और जानते हैं मैरी कॉम के  प्रेरणादायक जीवन कथा के बारे में

Mary Kom कौन है?

MC मैरी कॉम एक खिलाड़ी है जिसने अपनी शानदार मुक्केबाजी उपलब्धियों से भारत को गौरवान्वित किया है, मैरी कॉम एक महान मुक्केबाज हैं एकमात्र भारतीय महिला मुक्केबाज जो वर्ष 2012 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही, जहां उन्होंने  विश्व मंच पर कांस्य पदक भी जीता और भारत का नाम पूरे दुनिया में ऊपर उठाया। पांच बार की विश्व शौकिया मुक्केबाजी चैंपियन, वह अपनी सभी उपलब्धियों के बारे में आश्चर्यजनक रूप से काफी शांत और दार्शनिक हैं।

जन्म के बाद मेरी ने अपना नाम खुद मेरी चुना था क्योंकि वह चाहती थी कि उनका नाम ऐसा हो कि जो बोलने में काफी आसान हो। मेरी कॉम एक गरीब परिवार में जन्मी उसने बहुत छोटी उम्र में ही गांव के खेतों में काम  करती थी और अपने माता-पिता के काम में मदद  करवाया करती थी। MC मैरी कॉम एक स्कूली छात्रा के रूप में वह कई तरह के खेल खेलती थी जैसे कि फ़ुटबॉल, हॉकी, और एथलेटिक्स- लेकिन यह सोचने वाली बात है कि मेरी कॉम अपने स्कूल में बॉक्सिंग नहीं खेलती थी फिर भी वह बॉक्सिंग में आज विश्व चैंपियन है जब वर्ष 1998 में मणिपुरी मुक्केबाज डिंग्को सिंह ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता, तो लड़की को मुक्केबाजी करने की प्रेरणा मिली।एक विश्व चैंपियन बनना और और खासकर पूरे विश्व में बॉक्सिंग चैंपियन बने एक काफी चुनौतीपूर्ण काम है लेकिन MC मैरी कॉम ने अपने मेहनत और लगन से इस कारनामे को करके दिखाएं और मेरी कॉम एक आदिवासी सामाजिक समाज से तो यह और भी मुश्किल था लेकिन  मैरी कॉम के परिवार ने उनको उनका सपना को साकार करने के लिए पूरा सपोर्ट किया। आज मैरी  कॉम की सफलता को पूरा दुनिया जानती है। और मेरी कॉम फाउंडेशन चलाती है जिसके मदद से छोटे-छोटे बच्चे को मुफ्त में बॉक्सिंग भी सिखाती हैं।

Mary Kom का पूरा नाम चुंगनेईजैंग मैरी कॉम हमंगटे है और का जन्म 1 मार्च  वर्ष 1983 को कांगथी, मणिपुर, भारत में हुआ था। उसने 2021 में अपना 38 वां जन्मदिन मनाया। लेकिन उम्र उनके लिए सिर्फ एक संख्या है क्योंकि  उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों 2018 में सबसे प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने बहुत कम उम्र में मुक्केबाजी में अपना प्रशिक्षण शुरू कर दिया था और तब से उच्चतम स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रशंसा हासिल की है। वह लोकप्रिय रूप से ‘शानदार मैरी’ के रूप में जानी जाती हैं।

Mary Kom का बचपन और प्रारंभिक जीवन 

मैरी कॉम का जन्म कंगथेई, मणिपुर, मे हुआ था  जन्म के समय मैरी कॉम का नाम मांगते चुंगनेइजैंग रखा गया था, लेकिन  नाम का उच्चारण  सही ना होने के कारण उन्होंने अपना नाम बदल के मैरी कॉम रख लिया

Mary Kom चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी  उन्होंने अपने परिवार का पालन पोषण करने  के लिए बहुत कम ही उम्र में काम करने लगी और  हर काम में अपना हाथ बटाने लगी पूजा बहुत छोटी थी तभी से जंगलों में जाकर खाना बनाने के लिए लकड़ी बिन कर लाती थी। मैरी कॉम स्कूल जाने के साथ-साथ अपने छोटे भाई बहनों का भी बहुत ख्याल रखती थी और उनका पालन पोषण  करती थी। मैरी कॉम अपने माता पिता के साथ काम करने भी खेतों में जाया करती थी।  हालांकि मैरी कॉम अपने पढ़ाई पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ दी 

Mary Kom एक छात्र के रूप में भी काफी रुचि दिखाई और उन्होंने फुटबॉल जैसे खेलों में भाग लिया और मजे की बात यह है कि मेरी कॉम ने एक छात्र के रूप में कभी मुक्केबाजी का प्रशिक्षण नहीं लिया 

वर्ष 1998 में  जब मुक्केबाज डिंग्को सिंह ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता और भारत का नाम पूरी दुनिया में गौरवान्वित किया तभी से मैरी  कॉम को  प्रेरणा मिली और उन्होंने मुक्केबाजी करने का फैसला लिया। और इस पल ने उन्हें मुक्केबाजी के तौर पर काफी प्रेरित किया।  हालांकि मुक्केबाजी खेल को खेलना मेरी कॉम के लिए एक बहुत बड़ा चुनौती था क्योंकि जैसा कि सभी लोग कहते हैं  उसी प्रकार उनके  माता पिता का कहना था कि मुक्केबाजी एक युवा लड़की का खेल नहीं है। लेकिन मेरी कॉम ने इस खेल से कभी अपने आपको दूर नहीं रखा है  उन्होंने लगातार  मेहनत किया 

मैरी कॉम ने मणिपुर स्टेट इंफाल की यात्रा की और कोच एम नरजीत सिंह से बॉक्सिंग में प्रशिक्षित करने के लिए काफी अनुरोध किया। मैरी कॉम मुक्केबाजी खेल के प्रति  काफी जुनूनी थी और एक त्वरित शिक्षार्थी थी; दूसरों  खिलाड़ी के जाने के बाद भी वह अक्सर देर रात तक मुक्केबाजी के अभ्यास करती थी। यही कारण है कि मैरी कॉम मुक्केबाजी मे आज विश्व चैंपियन है

मैरी कॉम की निजी जीवन (Mary Kom personal life) 

वर्ष 2001 में जब Mary Kom पंजाब में राष्ट्रीय खेलों के लिए नई दिल्ली में थीं, तब उनकी मुलाकात के ओनलर कॉम से हुई। जिसके साथ उन्होंने शादी कर ली और उन्हें का जीवन साथी बनी । वह युवक मैरी कॉम के महत्वाकांक्षाओं और धैर्य से अत्यधिक प्रभावित हुआ। और फिर वर्ष 2005 में वह दोनों शादी के बंधन में बंधने से पहले इस जोड़े ने चार साल तक एक दूसरों को डेट किया। उनका आज तीन बेटा बेटी है।

मैरी कॉम की सामाजिक जीवन (Mary Kom social life)

दोस्तो क्या आपको पता है कि Mary Kom ने अपने  जीवन में काफी कठिनाई से मेहनत कर के सफलता हासिल की है, गाइस वी  इसे काफी अच्छी तरह से वापस देने में भी विश्वास करती है कि वह किसी की भी काफी बेहतरीन और दयावान बन कर मदद कर सकती है। गाइस कुछ इस तरह से मेरी कॉम ने अपना खुद का एक बेहतरीन तरह का  बॉक्सिंग फाउंडेशन का बजी निर्माण करवाया जहां पर वह  छोटे छोटे बच्चों को एक बेहतरीन तरह के बॉक्सर के रूप में अपना करियर बनाने में बहुत ज्यादा मदद करती है और गाइस उनकी लगभग सभी तरह की पढ़ाई की सभी जरूरतों, ऐसे प्रशिक्षण के किट के सारे खर्चों का भी ध्यान पूर्ण रूप से वे ही रखती है, और क्या आपको पता है कि बॉक्सिंग फाउंडेशन  का कोच का नाम मैरी कॉम फाउंडेशन है।

मैरी कॉम का करियर (Career of Mary Kom) 

उनकी पहली करियर जीत 2000 में हुई जब उन्होंने मणिपुर में महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पहले राज्य स्तरीय आमंत्रण पर सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का पुरस्कार जीता। उसके बाद वह पश्चिम बंगाल में आयोजित सातवीं ईस्ट इंडिया महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के लिए आगे बढ़ी। 

मैरी कॉम वह खिलाड़ी है जिसने खेल के लिए एक अथक जुनून का प्रदर्शन किया, और मैरी कॉम ने  वर्ष 2000 से  वर्ष 2005 तक कुल पांच राष्ट्रीय चैंपियनशिप पुरस्कार  जीतीं। 

वर्ष 2001 और वर्ष 2006 के बीच, उसने 2002, 2005 और 2006 में  पूरे तीन बार एआईबीए विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप जीती थी, और वर्ष 2001 में मैरी कॉम दूसरे स्थान पर रही। 

वर्ष 2008 में, मैरी कॉम भारत में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में भाग लिया जहाँ उसने काफी अच्छे अंको से जीत हासिल की और एक रजत पदक जीती थी। उसी वर्ष उसने चीन में एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में बॉक्सिंग की, जहां मैरी कॉम ने स्वर्ण पदक जीती और वह चैंपियनशिप में उसका लगातार चौथा स्वर्ण पदक था। 

उसके बाद वर्ष 2009 में मेरी कॉम फिर एशियाई इंडोर खेलों में स्वर्ण पदक जीती विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में Mary Kom लगातार पांचवां स्वर्ण था। 

और मैरी कॉम वर्ष 2010 में एशियाई खेलों में 51 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा मे फिर कांस्य पदक जीता उसके बाद वर्ष 2012 में मंगोलिया में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में फिर मैरी कॉम स्वर्ण जीता। 

उसके बाद फिर वर्ष 2014 में दक्षिण कोरिया के  इंचियोन में आयोजित एशियाई खेलों में, Mary Kom फ्लाईवेट वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

उसके बाद वर्ष 2012 में Mary Kom ने मुक्केबाजी को पहली बार लंदन मे आयोजित ओलंपिक खेल में एक बेहतर खेल दिखाया और उन्होंने कांस्य पदक जीता जीता। 

मैरी कॉम के पुरस्कार (Mary Kom awards) 

वर्ल्ड चैंपियंस मैरी कॉम की शुरुआती उपलब्धियां 2002 विश्व चैंपियनशिप में मिलीं, Mary Kom वर्ष 2003 में अपना छह विश्व खिताब जीती थी। और उन्होंने घरेलू स्तर पर बहुत सारे  छोटे पुरस्कार जीते हैं इसलिए Mary Kom को एक महान मुक्केबाज बना दिया । Mary Kom को 2003 में राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अर्जुन पुरस्कार’ दिया गया। मेरी कॉम की निरंतर सफलता  को देखते हुए उन्हें वर्ष 2006 में भारत के सबसे प्रसिद्ध  और प्रतिष्ठित पुरस्कार पद्म श्री पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया  और  और मेरी कम को भारत का एक और प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया । और मेरी कौम को वर्ष  2020 भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। और मैरी कॉम वर्तमान समय में राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में कार्य करती हैं। इन सारे पुरस्कार मेरी कॉम को एक विश्व मुक्केबाज चैंपियन बना दिया। 

मैरी कॉम की संपत्ति (Mary Kom Net worth) 

एक कंपनी के report के अनुसार, Mary Kom की संपूर्ण संपत्ति लगभग ’10 करोड़ रुपये है। इसमें से मैरी कॉम का अधिकांश भाग्य उस  मेडल या पुरस्कार राशि से आता है जो उन्होंने अपने समय में एक चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज के रूप में अर्जित की थी।, ‘Unbreakable’ 2013 के अंत में हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित की गई थी और एक बड़ी हिट film थी। उनकी बायोपिक 2014 में रिलीज़ हुई और एक महत्वपूर्ण और व्यावसायिक सफलता थी। इस नई लोकप्रियता के परिणामस्वरूप बॉक्सर के लिए कुछ बेहतरीन विज्ञापन सौदे हुए, जिन्हें  वर्ष 2019 में महिला प्रशिक्षण श्रेणी के लिए PUMA company का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था।   

मैरी कॉम और उनके पति ने नेस्ले कंपनी  ‘एवरीडे’ के साथ-साथ हेल्थकेयर के मशहूर  ब्रांड हर्बल का विज्ञापन किया। दूरसंचार और टेलीफोन नेटवर्क कंपनी बीएसएनएल  वर्ष 2012 मेरी कम को कांस्य पदक जीतने के बाद   विज्ञापन करने के लिए कांटेक्ट साइन किया। MC मैरी कॉम को कई आकर्षक नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें ‘मणिपुर सरकार से 50 लाख और गांव में  दो एकड़ भूमि, राजस्थान राज्य सरकार से 25 लाख, असम राज्य सरकार से 20 लाख नकद पुरस्कार,’ शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश के  सरकार और जनजातीय मामलों के मंत्रालय से लाख और साथ ही उत्तर पूर्वी परिषद से ’40 लाख। वह उन कई पदों से वेतन भी लेती है। 

Mary Kom film से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें 

दोस्तों हम आपको बता दें कि Mary Kom संघर्षपूर्ण जीवन पर एक फिल्म बनाया गया है जिसका नाम है Mary Kom इस फिल्म में मेरीकॉम के जीवन से जुड़ी सभी कठिनाइयों और संघर्षों का विस्तार से विवरण किया गया है और उनका सफलता को भी बेहतर तरीके से दिखाया गया है इस फिल्म में प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम रोल अदा किया है। इस बॉलीवुड मूवी खोलो के द्वारा काफी पसंद किया गया।

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मैरी कॉम के बारे में 10 तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे 

दोस्तों क्या आपको पता है कि  विश्व के मशहूर  मुक्केबाजी चैंपियन मैरी कॉम एक हाई स्कूल ड्रॉपआउट है, हालांकि बाद में उन्होंने वैकल्पिक तरीकों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और यहां तक ​​कि स्नातक भी पूरा किया। 

मैरी कॉम का मुक्केबाजी प्रेरणा तब मिली जब प्रेरणा डिंग्को सिंह ने 1998 मे मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीता था। तभी मेरी कॉम को भारत के लिए स्वर्ण पदक लाने का प्रेरणा मिला। 

मैरी कॉम के एक लड़की होने के कारण उन्हें अपने माता-पिता से काफी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उनका माता-पिता का कहना था कि मुक्केबाजी एक युवा लड़कियों का खेल नहीं है। 

वह मुक्केबाज के क्षेत्र में विश्व ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली एकमात्र भारतीय महिला मुक्केबाज हैं, और  उन्होंने ओलंपिक में पदक  जीता था। 

मैरी कॉम लगातार छह विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहले महिला मुक्केबाज हैं। और  मैरी कॉम एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली मुक्केबाज भारतीय महिला  हैं।

मैरी कॉम का पूरा नाम चुंगनेईजैंग मैरी कॉम हमंगटे है और का जन्म 1 मार्च वर्ष 1983 को कांगथी, मणिपुर, भारत में हुआ था।

वर्ष 1998 में जब मुक्केबाज डिंग्को सिंह ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता तभी से मैरी  कॉम को प्रेरणा मिली और उन्होंने मुक्केबाजी करने का फैसला लिया।

एक कंपनी के रिपोर्ट के अनुसार, मैरी कॉम की संपूर्ण संपत्ति लगभग ’10 करोड़ रुपये है।

वर्ल्ड चैंपियंस मैरी कॉम की शुरुआती उपलब्धियां 2002 विश्व चैंपियनशिप में मिलीं, मेरी कॉम वर्ष 2003 में अपना छह विश्व खिताब जीती थी। मेरी कम को 2003 में राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अर्जुन पुरस्कार’ दिया गया और उन्हें वर्ष 2006 में  भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित  पुरस्कार पद्म श्री पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया

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(अंतिम विचार, conclusion)

दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा और आप Mary Kom  के प्रेरणादायक और संघर्षपूर्ण कहानी को  पूरे अन तक पढ़े होंगे और उनके जीवन के बारे में एक बड़े गहराई से सोचें होंगे दोस्तों हमने इस आर्टिकल में पूरा विस्तार से और आसान से आसान भाषा में समझाने की आपको प्रयास किया है और हमें यह भी उम्मीद है कि आपको हमारा यह पोस्ट पूरा समझ में आया होगा 

दोस्तों हम लोग इस आर्टिकल में मैरी कॉम के  जीवन कथा से जुड़ी बहुत सारी टॉपिक्स को  बताया है जैसे कि मैरी कॉम का बचपन और प्रारंभिक जीवन, मैरी कॉम की निजी जीवन, मैरी कॉम की सामाजिक जीवन, मैरी कॉम का करियर, मैरी कॉम के पुरस्कार, मैरी कॉम की संपत्ति और आर्टिकल के अंत में हमने बताया है कि मैरी कॉम पर बनी बॉलीवुड फिल्म के बारे में 

दोस्तों अगर आपको हमारा यह पोस्ट पूरा इस समझ में आया तो अपने उन दोस्तों के पास शेयर जरूर करें जो Mary Kom के जीवन कथा के बारे में नहीं जानते हैं और उनको नहीं पता है कि मेरी कम कितनी बड़ी विश्व चैंपियन है। लेकिन दोस्तों अगर आपको हमारा इस आर्टिकल को पढ़ने में कोई भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है तो कृपया हमें हमारे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं हम आपकी कमेंट को अवश्य पढ़ेंगे और आपका समस्या का समाधान करेंगे. …..दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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